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Tuesday, November 22, 2022

मंडला ज़िले के सांसद और विधायक क्षेत्र का नही चाहते हैं विकास, विकास के नाम पर सिर्फ़ जनता को ठगा है...

 


रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला डिंडौरी जिले की जनता अब अपनी दबी जुबान से कह रही है कि जिन्हें हमने जिताया वो जितने के बाद किये गए वादों भूल गए और जनता आज भी अपनी मूलभुत सुविधाओं के लिए मोहताज नजर आ रही हैं। ब्रॉडगेज से बेहतर थी नेरोगेज ट्रेन, गेज परिवर्तन का नहीं मिल रहा जनता को लाभ यात्री हो रहें परेशान

        मंडला जिला आदिवासियों का बाहुल्य क्षेत्र है। मगर ज़िले की जनता को क्षेत्र के विधयक और सांसद ने ऐसा लोलीपॉप कहो या मंत्र मोध किया है। क्षेत्र में कोई भी विकास नही करने के बाद भी जनता सिर्फ़ इनको ही वोट देती है। मगर क्यों समझ से परे मगर क्षेत्र के नेता भी विकासहीन सांसद विधयक के पीछे दौड़ लगाते नजर आते हैं। जब इन से सवाल करो तो बड़ी बड़ी हांकते है। मगर खैर जो भी हो समय बदलता जा रहा है। जनता अब इनके छलावे में नही आने वाली है। और समय के साथ बड़ा बदलाव होने की सुगबुहट होने की झलक दिखने लगी है। जो कि जल्द ही चुनाव में परिणाम में दिखाई देगा कि विकास का पहिया कहे जाने वाले विधयक औऱ सांसद एक यात्री ट्रेन नहीं चालू करवा पाये तो क्या इन से विकास की उम्मीद क्षेत्र की जनता कर सकती है। यह सवाल खड़ा हो रहा है। खैर जो भी हो जनता को ज्यादा दिन मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है। 


रेलवे के अधिकारी सांसद और विधयक की नही सुनते हैं। 


अधिकारियों की माने तो जानकर बताते हैं। कि 

क्षेत्र के जन प्रतिनिधि की बात रेलवे के अधिकारि अनसुना कर देते हैं। सिर्फ़ रेल्वे के अधिकारी नेताओं की हां में हां मिलते हैं। और उनको अनसुना कर देते हैं। जिसके कारण क्षेत्र में विकास नही हो पा रहा है। वही जनता को परेशानियों से कोई सरोकार ना रखते हुए नागपुर डिविजन के डीआरएम की लच्छेदार बातों में आकर जनता की परेशानियों को दर किनार किया जा रहा है। किसी समस्या किसी से छुपा नहीं है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर डीवीजन के आला अधिकारी रेल यात्रियों के लिए कितने संवेदनशील है, उसकी जानकारी जनता के बीच जाकर उनकी मनोदशा जानने की कोशिश की गई तो सामने आया की जनता नैरोगंज से ही खुश थी। जनप्रतिनिधियों की मनसा गेज परिवर्तन के बाद समझ आई।



एक तरफ सांसद विधायक अपने को जनता का हितेषी मानते हुए मंच से बड़ी बड़ी हकाते है। 



गेज परिवर्तन में यात्रियों को सालों चली मांग पर यात्रियों की अच्छी सेवा देने, लंबी दूरी की ट्रेनों को सीधे समय की बचत को ध्यान में रखते हुए किया गया था। जिससे नैनपुर स्टेशन सीधे बड़े महानगरों से जुड़ जाएगा, पर क्या पता ट्रेन खड़ी रहती है। था यहां के भोले भाले आदिवासी, गरीब जनता की उसके पीछे का सच कुछ और उनको कितना बड़ा छलावा किया जाएगा जो अब सच होता दिखाई दे रहा है। पहले कम से कम नैरोगेज के रहते गोंदिया से जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा जाने के लिए यात्रियों को भटकना नहीं पड़ता था। 24 घंटे उसकी यात्रा के लिए ट्रेने उपलब्ध रहती थीं। ब्रॉडगेज पर जाने के बाद जैसे इस रूट को ग्रहण लग गया ही। एक दिन में कम से कम 25 से 30 गुड्स ट्रेनें चलती है। रेलवे के अधिकारियों को जनता को ना हो। यात्रा और उनकी यात्रा सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं उनका मकसद सिर्फ गुड्स ट्रेन की फायदा देना है। यात्री ट्रेनों को रोक कर गुड्स को पहले लाइन किलियर देना है। जिसके कारण स्टेशनों में घंटो यात्री परेशान रहते हैं। 


वही जनता कहती है। नैरोगेज ठीक थी। 


क्षेत्र की जनता से उनके मन की बात जब जनाने की कोशिश की गई तो उनका दर्द छलक कर सामने आया और उनका कहना है। कि नेरोगेज ट्रेन ही ठीक थी। सब तरफ का कनेक्शन मिलता था, छोटी लाइन बंद करते समय हमें सपने दिखाए गए कि 25 से 30 लंबी दूरी की ट्रेनें चलेंगी, जबकि ब्रॉडगेज का समय इतनी दूरी में दो से ढाई घंटे का होना चाहिए। लेकिन इससे अधिक समय लग रहा है। ब्रॉडगेज में परिवर्तन होने से कोई लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण रेल की यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है। यात्रियों ने मांग की है। गाड़ियों का फेरा बढ़ाया जाना चाहिए। जिससे रेल यात्रा करने में कोई यात्रियों को परेशानी ना हो।

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