अचानक हुई बारिश ने मटर उत्पादन को किया प्रभावित 70% किसानों ने दूसरी बार की खेतों मे बोनी.. - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

🙏जय माता दी🙏 शुभारंभ शुभारंभ माँ नर्मदा की कृपा और बुजुर्गों के आशीर्वाद से माँ रेवा पब्लिकेशन एन्ड प्रिंटर्स का हुआ शुभारंभ समाचार पत्रों की प्रिंटिग हेतु संपर्क करें मोबाईल न- 0761- 4112552/07415685293, 09340553112,/ 9425852299/08770497044 पता:- 68/1 लक्ष्मीपुर विवेकानंद वार्ड मुस्कान प्लाजा के पीछे एम आर 4 रोड़ उखरी जबलपुर (म.प्र.)

Tuesday, November 1, 2022

अचानक हुई बारिश ने मटर उत्पादन को किया प्रभावित 70% किसानों ने दूसरी बार की खेतों मे बोनी..


रेवांचल टाईम्स - मध्यप्रदेश मे हरे मटर की सबसे अधिक पैदावार करने वाले जबलपुर जिले मे इस साल मटर की कमी आने की संभावना हैं जिसके कारण बाजार मे भी मटर उपभोक्ताओं को महँगा मिलेगा। वर्ष 2022 मे 35 हजार हेक्टेयर मे मटर की बोनी करने का लक्ष्य रखा गया है जबकि अभी तक सिर्फ 20.50 हजार हेक्टेयर मे बोनी हो पाई हैं। जो कि बोनी का 58% हैं ,वही इस साल चने की फसल के लिए 39 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है जिसकी अभी तक महज 1.34 हेक्टर ही बोनी हो पाई हैं।

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में हरे मटर का व्यापक रूप से उत्पादन होता है तकरीबन 35 से 40 हजार हेक्टयर में मटर की फसल लगाई जाती है लेकिन इस बार हुई बारिश के चलते बोनी में देरी हो रही है इतना ही नहीं कई किसानों को तो मटर की फसल में अच्छा खासा नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जबलपुर जिले का हरा मटर हर साल 42 हजार मेट्रिक टन से ज्यादा का मटर उत्पादन करता है और इस हरे मटर की फसल से किसान लखपति भी बनते हैं। जबलपुर जिले मे हर साल 400 करोड़ रुपए से ज्यादा का मटर किसान बेचते हैं।

जानकार बताते हैं कि जबलपुर जिले मे हरे मटर की कई किस्मों का किसान उपयोग करते हैं जिसमें मुख्यतः पी.एस -3,पीयू -7,83, और के.एन-5 होता है। जबलपुर जिले में पैदा हुआ हरा मटर प्रदेश के अलावा बाहरी राज्य जैसे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली,उत्तर प्रदेश में भी निर्यात होता है। जबलपुर जिले मे शहपुरा,पाटन,मझौली मे सबसे अधिक मटर किसान लगाया करते हैं।

उद्यानकी विशेषज्ञ बताते हैं कि इस साल 15 से 16 अक्टूबर तक हुई बारिश ने किसानों की हरे मटर की फसल को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। तकरीबन 70% किसानों ने अपने खेतों में मटर की फिर से बोनी की है। जिसके कारण किसानों को अच्छा खासा नुकसान हुआ हैं, बारिश से मटर के उत्पादन में भी प्रभाव पड़ा है। जानकार बताते हैं कि 10 अक्टूबर तक मटर की बोनी हो जाती हैं और अधिकतर किसानों ने समय से ही मटर की बोनी कर दी लेकिन 15 से 16 अक्टूबर के बीच हुई बारिश ने किसानों की हरे मटर की फसल को बर्बाद कर दिया।

एक हेक्टर में 90 से 100 क्विंटल हरा मटर पैदा होता है और यह फसल सिर्फ 65 दिन मे ही पैदा होती है। जानकार बताते हैं कि बोनी से लेकर फल्ली आने तक करीब 60 से 65 दिन लगते हैं और पहली तुड़ाई इस बीच हो जाती है जबकि हरे मटर की दूसरी तुड़ाई पहली तुड़ाई के 10 से 12 दिन बाद होती है। हरी मटर की खेती करने मे किसानों की लागत करीब 50 से 70 से हजार रुपए प्रति हेक्टयर की लागत लगती हैं। बेमौसम हुई बारिश से मटर के उत्पादन मे 30 से 40% तक उत्पादन को प्रभावित किया है।

भले ही उत्पादन कम हो लेकिन एक जिला एक उत्पाद में शामिल मटर कि जबलपुर ब्रांडिंग के लिए जिला प्रशासन ने इस बार भी ब्रांडिंग के लिए जबलपुरी मटर का टैग बनवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 90 लाख से करीब एक करोड़ बारदाने तैयार करवाए जा रहें हैं जिसके जरिए देश-विदेश में प्रसिद्ध जबलपुर के हरे मटर को जिला प्रशासन ब्रांडिंग करेगा।

जबलपुर जिले के पाटन, पनागर, शहपुरा और मझोली मे हरे मटर का एक बड़ा रकवा है। जिले का 80% मटर देश के कई राज्यों मे सप्लाई होता हैं। वहीं अगर विदेशों की बात की जाए तो जबलपुर का हरा मटर जापान और सिंगापुर के व्यंजनों के लिए भी निर्यात किया जाता है। पर इस बार कहीं ना कहीं देर तक बारिश होने के चलते ना सिर्फ उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।मटर की खेती करने वाले किसान बताते हैं कि 10 अक्टूबर के पहले हमने हरे मटर की बोनी कर दी थी लेकिन 15 और 16 अक्टूबर को हुई अचानक बारिश ने बीज को खराब कर दिया, खेतों में पानी भर जाने के चलते बीज खराब हो गए जिससे अच्छा खासा ना सिर्फ नुकसान हुआ है बल्कि हमें दोबारा बोनी करनी पड़ी।

कृषि विभाग के संयुक्त संचालक एस.के निगम के मुताबिक जबलपुर जिले में हरे मटर का एक बड़ा रकबा है, यह फसल किसानों के लिए बहुत लाभकारी भी है पर इस साल कम उत्पादन से किसानों की आय को प्रभावित जरूर किया है। उन्होंने बताया कि हरे मटर की बोनी के बाद हुई बारिश ने बीज खराब कर दिया, जिससे निश्चित रूप से किसानों को नुकसान हुआ है। हालांकि चना और मसूर को किसी तरह का नुकसान नहीं है। उन्होंने बताया कि आम दिनों में दीपावली के पहले ही बाजार में मटर आना शुरू हो जाती है थी जिसके कारण किसानों को अच्छा अच्छा खासा दाम भी मिलता था पर इस बार 10 से 15 दिन हरी मटर की फसल लेट हुई है।

No comments:

Post a Comment