रेवांचल टाईम्स - मंडला जिले के विकास खंड नैनपुर में वार्ड क्रमांक 15 में अवैध रूप से कॉलोनी का मामला शांत होने का नाम नही ले रहा है। जिसमें हर दिन कोई ना कोई नया मोड़ आ रहा है। वही प्रशासन की फजीहत उसके कर्मचारियों की कारगुजारियों के कारण जबाब देने में सोचना पड़ रहा है। क्योंकि पटवारी प्रदीप उसराठे ने अपने कार्यकाल में जमकर अवैध कालोनियों को संरक्षण दिया हुया था। जिसके कारण नैनपुर नगर में अवैध कालोनियों की बाढ़ आ गई है। नैनपुर नगर के हर मोहल्ले में अवैध कॉलोनी है। मगर प्रशासन को जानकारी है। सिर्फ प्रशासन में बैठे अधिकारी ही बता सकते हैं। क्या होने वाला है।
शिकायत होने के बाद पटवारी ने मौके पर बाट दिया प्लॉट
नैनपुर नगर में अवैध कालोनियों की ऐसी भरमार है। कि ग्राहकों तरह तरह के प्रलोभन देकर सस्ते दामों में भूखंड बेच दिया गया है। जिसमें ना रोड नाली लाईट का पता ही नही है। जिसमें पटवारी और विक्रेता के साथ मिलकर जमकर माल
कमाया है। वही वार्ड नं0 15 के मामले में जमीन क्रेतायो के द्वारा शिकायत की गई थी। मगर पटवारी और विक्रेताओं और अन्य लोगों ने मिलकर मामला ऐसा सेट किया कि अन्य भूमि स्वमी की भूमि में प्लॉट उपलब्ध करा दिया गया जिसमें और जाँच प्रतिवेदन में सब को प्लाट देना बता कर मामला को शांत करने का भरसक प्रयास किया था। मगर कहते हैं। ना कि झूठ ज्यादा दिन छिप नही सकता है। जिसके चलते जल्द ही झूठ का राज फास हो गया । जिला प्रशासन की सतर्कता के चलते एक बार फिर न्याय मिलने की उम्मीद जागी है। और जिनको प्लॉट नहीं मिल पाया है। वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
एक प्लॉट के 02 मालिक और दोनों के पास रजिस्ट्री मगर प्लॉट किसी के पास नही
वार्ड नं0 15 की अवैध कॉलोनी में विक्रेता और पटवारी और दलाल ने मिलकर ऐसा जाल बुना की स्वयं फस गये है। वही अब जिला कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद एसडीएम नैनपुर के द्वारा नये सिरे से भूमि का नाप किया जिसमें नाप में सपष्ट हो गया कि पटवारी प्रदीप उसराठे ने विक्रेता के साथ मिलकर जमकर गोलमाल किया गया है। एक जमीन को 2 बार बेचा गया है। इसका प्रमाण भूमि क्रेताओं के पास भूमि राजस्ट्री है। मगर जोकि सिर्फ कागज के तौर पर रह चुकी है। क्योंकि क्रेता अपनी जमा पूंजी लगा कर सिर्फ विवाद हाथ लगा है। और मोटा माल पटवारी और दलाल ने कमाया है। प्लॉट क्रेता सिर्फ भटक रहें हैं।
मौके में नाप के कारण हुआ खुलासा
वही मंडला से आये अधिकारी अपर कलेक्टर मैडम और जांच दल ने मौका में जाकर खसरा न0 34 की सीमा तय की और जिससे स्पष्ट हो गया है। कि खसरा क्रमाक न0 35 की भूमि को विक्रय किया गया है और उन पर भी प्लॉट काटे गये थे। मगर मौके पर सभी क्रेतायो की रजिस्ट्री से चतुर्थ सीमा का मिलान नही हो रहा है। जिसके कारण विवाद को निर्मित हुया था।भूस्वामियों के पास सिर्फ विवाद हाथ लगा है। वार्ड वासियों ने वही दबी जुबान और नाम ना छापने की शर्त पर बतया गया कि पटवारी विवादित कॉलोनी में पार्टनर भी था। खैर जो भी हो अब देखना है। कि जिला प्रशासन पटवारी और विक्रेता पर क्या कार्यवाही करता है। कि एक बार सिर्फ सारा मामला दब कर रहा जाता है ।


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