दैनिक रेवांचल टाइम्स - मंडला अतिथि शिक्षक परिवार मंडला और अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्यप्रदेश के संस्थापक पी.डी.खैरवार ने विज्ञप्ति जारी कर शासन के द्वारा हाल ही में जारी आदेशों की घोर निन्दा की है, खैरवार ने कहा है, शासन के द्वारा गलत समय पर जारी आदेश की घोर निन्दा करता हूं।
जग जाहिर है,कि अतिथि शिक्षकों का शोषण पंद्रह वर्षों से सरकार लगातार करते आ रही है।इनके तन और मन दोनों का बेहिसाब शोषण किया जा रहा है।जितना काम लिया जाता है,उसके एवज में मेहनताना कुछ भी नहीं दिया जाता है। जिससे अतिथि शिक्षकों का परिवार भारी कुपोषण का शिकार होता चला आ रहा है। नियमित रोजगार की मांग को लेकर अनगिनत ज्ञापन,धरना, प्रदर्शन आदि करते लुट से चुके हैं।
जब अपनी जायज मांगों को लेकर 12 अक्टूबर को एक दिन के लिए भोपाल पहुंचकर सांकेतिक धरना की तैयारी चल ही रही है,कि शासन ने दो अलग-अलग फरमान जारी कर प्रदेश के अधिकांश अतिथि शिक्षकों को भोपाल आंदोलन में सामिल होने से रोक दिया है।जबकि इस समय शासन-प्रशासन दोनों को चाहिए कि अतिथि शिक्षकों के हित में कोई अच्छी नीति बनाकर आदेश जारी कर दिए जाएं,ताकि अतिथि शिक्षकों को इस तरह कोई आंदोलन की जरूरत ही न पड़े।
गलत समय में हुए यह आदेश
बता दें,कि हाल ही में जारी दोनों आदेशों से अतिथि शिक्षकों का कोई हित होने वाला नहीं है।एक तो अनुभव प्रमाणपत्र बनवाकर जनरेट करने और दूसरा शिक्षक विहीन शालाओं के अतिथि शिक्षकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण देने का आदेश। शासन-प्रशासन में बैठे लोगों का गणित है,कि इन दोनों ही तुगलकी आदेशों के डर से बाध्य होकर अब अधिकतर अतिथि शिक्षक आंदोलन में सामिल नहीं हो सकेंगे। जिससे उनके हक की लड़ाई कमजोर पड़ेगी और सरकार अब तक से भी ज्यादा शोषण पर शोषण करते इन पर राज करती चलेगी। जबकि इन दोनों आदेशों का अतिथि शिक्षकों के लिए कोई लाभ नहीं।
भारी चिंता का विषय तो यह है,कि जल्द ही शिक्षकों के ट्रांसफर और नई भर्तियां दोनों कार्य होने वाले हैं। जिनकी प्रक्रिया चल भी रही है।इनके चलते 48000 अड़तालिस हजार के आसपास अतिथि शिक्षकों को स्कूलों से बाहर होना पड़ेगा। फिर यह प्रशिक्षण जैसे ढोंग रचने का फायदा ही क्या।जबकि स्कूलों को खुले लगभग साढ़े तीन महीने बीत गए हैं।इसके पहले गर्मियों की छुट्टियां भी चली गई। खाली समय में शासन को यह सब काम आवश्यक समझ में नहीं आए। अब जब परीक्षाओं का दौर आ गया तब अतिथि शिक्षकों को प्रशिक्षण और अनुभव देने की जरूरत पड़ गई।
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्यप्रदेश के संस्थापक के दायित्व से पी.डी.खैरवार ने कहा है,कि इस सरकार की इस तरह के सही समय में सही निर्णय नहीं लेने की नीयत की कड़ी निंदा करता हूं।
मैं तो जंग जीतने निकल गया हूं, उम्मीद सबसे है
खैरवार ने यह भी बताया है,कि मैं भोपाल के लिए रवाना हो गया हूं।यही उम्मीद सभी अतिथि शिक्षकों से है, कि पड़ौसी से कर्ज लेकर ही सही भोपाल के लिए निकल जायें।जंग जीतने मध्यप्रदेश का एक एक अतिथि शिक्षक तैयार है। यह भी अपील की गई है,कि शासन-प्रशासन जितना भी डराने की चाल चले,अतिथि शिक्षक अब डरने वाला नहीं है। मध्यप्रदेश का एक एक अतिथि शिक्षक भोपाल के लिए रवाना हो चुका है।
मुख्यमंत्री जी का इंतजार करेंगी पथराई आंखें
विश्वास है,12 अक्टूबर को धरना प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर मुख्यमंत्री स्वयं अतिथि शिक्षकों के नियमित रोजगार देने आदेश करेंगे।इस दिन दोपहर दो बजे के पहले धरना स्थल पर अतिथि शिक्षकों की पथराई आंखें आपका इंतजार बेसब्री से

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