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Sunday, October 2, 2022

2 अक्टूबर राष्ट्र के लिए विशेष दिन भारत के दो महान राष्ट्र भक्तों की जयंती एक दिन पड़ना एक सुखद संयोग- चतुर्वेदी




दैनिक रेवांचल टाईम्स सिवनी - जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने   देश का नेतृत्व कर देश को आजादी दी,वहीं द्वितीय प्रधानमंत्री पं लाल बहादुर शास्त्री ने श्वेत क्रांति को आधार बना किसानों को खुशहाली दी।


आज डी पी चतुर्वेदी महाविद्यालय और डी पी सी स्कूल ड्रीम लैंड सिटी में भारत माता के दो वीर राष्ट्र भक्तों की जयंती पर भाषण और चित्र कला और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।इस अवसर पर छात्र और प्राध्यापकों को अपने उद्बोधन में संस्थान के चेयरमैन डॉ के के चतुर्वेदी ने दोनो के व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

महात्मा गांधी एक कुशल नेतृत्वकर्ता और मैनेजमेंट गुरूथे

भारत सहित विश्व में भारत की पहचान के पर्याय सत्य,अहिंसा और अपरिग्रह की छवि के प्रणेता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाना,भारत के अद्वितीय गौरव को बढाता है।जहां एक तरफ राष्ट्र पिता महात्मा गांधी को उनके राजनैतिक गुरू गोपाल कृष्ण गोखले के आदर्श पर चल कर भारत की आजादी को अहिंसात्मक तौर से लड़ने के लिए साथ-साथ 12 देशों में नागरिक अधिकार आंदोलन सहित 6 महत्वपूर्ण आंदोलन की अगुवाई कर भारत को स्वतंत्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए कुशल नेतृत्वकर्ता के रूप मे जाना जाता है।जिन्हे नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्र नाथ टैगोर ने महात्मा तो सुदूर देशो में भारत की आवाज बुलंद करने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 4जून 1944 के रेडियो सिंगापुर से प्रसारण में राष्ट्रपिता की उपाधि दी।


लाल बहादुर शास्त्री श्वेत क्रांति के जनक


भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का बचपन का नाम नन्हे था। शास्त्री उपाधि आपको साहित्य और शास्त्रों में पारंगतता के कारण 1925 में काशी विद्यापीठ द्वारा प्रदान की गई। आपका वास्तविक नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था,परन्तु जाति व्यवस्था के विरोध स्वरूप आपने अपना उपनाम लिखना बंद कर दिया था।आप जाति व्यवस्था के सख्त विरोधी और भारत की शान किसान के हितैषी थे।आपका मानना था,कि प्रत्येक व्यक्ति को चावल और गेंहू की खेती कर अपना अन्न स्वंय तैयार करना चाहिए तथा प्रत्येक घर में गौ-माता की पूजा हो,देश में बच्चे कुपोषित ना हों इसलिए श्वेत क्रांति की वकालत की।भारत-पाक युद्ध के बाद आप ने उज्बेकिस्तान के ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान से मुलाकात की और कुछ घंटो में आपकी मौत की खबर आना ,उस गुत्थी का आज तक नहीं सुलझ पाना कई प्रश्न खडे करता है।

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