रेवांचल टाईम्स - ग्रामीण कार्यालय के लागते है चक्कर जिला प्रशासन को शिकायत होने पर नही होती है कार्यवाही
प्रदेश के मुख्यमंत्री लाख कहते हैं कि सुशासन आ गया है मगर कहानी कुछ और ही बयान करती हैं उनके अधिकारी आज भी जनता का खुला शोषण करने से नही चूक रहें हैं जब अधिकारीयोँ की जब शिकायत होती है तो सारा दोष जनता के ऊपर मड़ दिया जाता हैं। जिसके कारण गरीब जनता शिकायत करने भी डरती हैं। मगर प्रशासन सिर्फ कागजी खाना पूर्ति कर प्रदेश को प्रगतिशील बता रहें हैं मगर जनता का दर्द सिर्फ जनता ही समझती हैं ।अधिकारी और नेता सिर्फ मजा लूटते हैं। खैर जो भी हो मरना तो जनता को पडता है।
क्या है मामला
मंडला जिले के अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायत नैनपुर में कार्यलय जनपद सीईओ और कर्मचारियों ने मिलकर आये दिन जनता के प्राण निकलने में लगे हैं । और काम करने बाजए कमिशन के चक्कर मे जनता का खून चूस रहें हैं इसी तर्ज पर जनपद पंचायत सीईओ जबलपुर से नैनपुर अपडाउन करती हैं । और कार्यालय में सिर्फ 3 दिन ही बैठती हैं जिसकी शिकायत जिला पंचायत सीईओ मंडला और जिला कलेक्टर को गई मगर अधिकारियों को कोई फर्क नही दिखाई पड़ता हैं । इसी तर्ज पर भी अन्य विभाग के कर्मचारियों ने दूसरे विभाग से आकर मोटी कमाई कर रहें हैं । जनपद पंचायत नैनपुर में अटैच में नंदा मेश्राम जो कि वर्षो से जमी है और शासन की महत्वपूर्ण योजना बस्ती विकास योजना सांसद निधि विधायक निधि और अन्य योजनाओं हित ग्राहियों की फाइल को दबाकर रखने में इनको महारत शामिल हैं वही नाम ना छाप ने की शर्त पर बताया की बिल निकलने से लेकर हरकाम में जनपद पंचायत स्तर के कर्मचारी दक्षिण के बिना कोई काम नही करते हैं जिसके कारण ग्राम की जनता त्रस्त है वही देखा भी जा रहा है कि कर्मचारी आये दिन मन मर्जी कर छुट्टी में चले जाते है जिसके कारण कार्यालय काम भी प्रभावित हो रहा है।
समय पर नही आते हैं। जनपद के कर्मचारी
जनपद पंचायत नैनपुर के कर्मचारियों की जनता को परेशान करने की आदत तो पुरानी हो चुकी जोकि है मगर अधिकारी अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहें हैं जिसके कारण लगतार समाचार पत्रों में ख़बरों का प्रकाशन हो रहा है वही जब से जनपद उपाध्यक्ष अमरेंद्र सिंह आये हैं।तब जनपद पंचायत के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार आया है। पर कब तक यह देखना बाकी है और जिले की मुखिया कह रही है कि विकास खण्डों के जिम्मेदार अधिकारी को अपने मुख्यालय में ही रहना है पर यह आदेश केवल और केवल अधिकारी कर्मचारी इसे अपने ठेंगे में रहे और अपनी मनमर्जी से कार्यालय में आना जाना करते है कौन इन्हें पूछने और देखने वाला है।


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