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Friday, September 30, 2022

बंदियों के लिए आयोजित हुआ ’अल्प विराम कार्यक्रम’




 

मण्डला 30 सितम्बर 2022

            जेल अधीक्षक ने बताया कि राज्य आनंद संस्थान भोपाल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखिलेश अर्गल के निर्देशन में संस्थान के डिस्ट्रिक्ट प्रोगाम लीडर अनिल कांबले, कटनी एवं मास्टर ट्रेनर दीप्ति ठाकर जबलपुर के द्वारा एक दिवसीय अल्प विराम कार्यक्रमका आयोजन किया गया। बंदियों को राज्य आनंद संस्थान का परिचय संस्थान का उद्देश्य एवं क्रिया-कलाप तथा प्रशिक्षण के आयोजन का जानकारी दी गई।

            सर्वप्रथम जीवन को संतुलित करने के उपाय को समझाने के लिए जैसे- प्रत्येक व्यक्ति प्रारंभिक जीवन में साइकल चलाना अलग-अलग दिनों में सीखता है और कैची चलाकर बाद में सीट पर बैठकर साइकल चलाना सीखकर फिर तेजी से चलता है। संकट/ब्रेकर आने पर ब्रेक लगाने और घंटी का भी इस्तेमाल करता है। ठीक उसी तरह प्रकृति का संतुलन एवं मानव के जीवन का संतुलन स्वयं के जीवन को प्रभावित करता है। इस विषय पर उनके अनुभव और बंदियों ने अपना अनुभव बताया।

            दूसरे सत्र में सभी बंदियों को अल्प विराम अभ्यास कराते हए उन्हें यह कहा गया कि वे उन लोगा को याद करें। जिन्होनें उनकी मदद की है और फिर वे याद करें कि वे स्वयं किस-किस की मदद किये है। जिसने हमारी मदद की है क्या हमने कभी उनका धन्यवाद किया है या नहीं ? आज की अनुकूल/प्रतिकूल जीवन शैली में हम व्यस्तता के कारण जिसने हमारी वास्तविक मदद की है। उन्हें हम उनका कर्तव्य मानकर भूल जाते हैं जबकि उनकी मदद की वजह से हमारा जीवन सफल हो पाता है। स्वयं के जीवन में बुराई कितनी है उसे हम कैसे दूर करें।

            तीसरे सत्र में मास्टर ट्रेनर दीप्ति ठाकुर ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि हमें शांत समय लेना चाहिए। यदि हमारे पास जो समय है और जो व्यतीत हो गये हैं तो हमें शेष समय का सदुपयोग करना है जिससे हमारा जीवन सफल हो सके। जो व्यतीत हो गया है उस पर व्यर्थ चिंतन करके भविष्य को अनिश्चित नहीं करना है। अपने अनुभव को प्रस्तुत करते हए उन्होने कहा कि जेल में नेलसन मंडेला रहे और जेल के समय को अध्ययन/शिक्षा में बिताकर जेल से रिहा होकर राष्ट्रपति बने। अतः आप सभी वादा करें कि जेल से अच्छे आचरण, व्यवहार सीखकर अच्छा व्यक्ति बनकर समाज में जाकर अपना स्थान बनाकर समाज की मुख्य धारा में जुड़ेंगे। मन, बुद्धि, अन्तर्रात्मा की आवाज को हग अल्प विराम के माध्यम से सुनते हैं। स्वयं की कार्य प्रणाली, दिनचर्चा में सुधार करके हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।

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