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सरकार और शिक्षकों की लड़ाई में बच्चों की हो है नुकसान, शोषित अतिथि शिक्षकों की हड़ताल से स्कूलों में जड़े ताले, बच्चों की पढ़ाई हुई ढप्प...

रेवांचल टाईम्स - मंडला जिले के अतिथि शिक्षक वर्षों पूर्व लंबित मांग को लेकर अब फिर से सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में उतरकर शाला बहिष्कार कर चुके हैं।जिससे स्कूलों में ताले डल चुके हैं।



इस आशय की जानकारी देते हुए  पी.डी.खैरवार ने बताया है, कि मार्च  2020 में कोविड काल के आ जाने पर भोपाल शाहजहांनी पार्क से चार महीने से चल रहे अनिश्चितकालीन सत्याग्रह से 2020 में वापस आना पड़ा था।अठारह महीने की कमलनाथ की सरकार को गिराकर सरकार पर आये शिवराज सिंह चौहान की सरकार से बड़ी उम्मीदें लगाए अब तक नियमित रोजगार मिलने का इंतजार ही करते आ रहे थे।तब से सरकार का इंतजार करते कोई जंगी हड़ताल करने की मनसा थी ही नहीं। ध्यानाकर्षण  ज्ञापन आदि का सिलसिला लगातार जारी रहा पर गूंगी-बहरी सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा । अति तो तब हो गई जब कुछ महीनों पहले अतिथि शिक्षकों के स्थान पर शिक्षक भर्ती भी कर ली गयी फिर ट्रांसफर कर भी अतिथि शिक्षकों को हटा दिया गया है।तब भी अतिथि शिक्षकों के नियमित रोजगार के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई।अब हाल ही में ट्रांसफर और नई भर्ती के लिए फिर से आदेश आ गये। अब जाकर लगने लगा,कि सरकार के पास अतिथि शिक्षकों के नियमित रोजगार के लिए कोई नीति है ही नहीं। सरकार की अतिथि शिक्षक विरोधी नीतियों से गुस्साए अतिथि शिक्षक किंकर्त्तव्यविमूढ़ पर आते गये। कहां जाएं क्या करें,किससे कहें की स्थिति में आकर   अब शालाओं का बहिष्कार कर विरोध  जताने विवश हो चुके हैं।

अब आस्वासनों से मानने वाले नहीं हैं।अतिथि शिक्षकों के इस हड़ताल के चलते मंडला जिले के अधिकतर स्कूलों में पांच दिनों से ताले डले हुए हैं। संपूर्ण  मध्यप्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों की ओर से मंडला जिले के शोषित पीड़ित अतिथि शिक्षकों ने सरकार पर गहरा आरोप लगाया है,कि सरकार अतिथि शिक्षकों को डिस्पोजल सा बना रखी है।जरूरत पड़ने पर भर्ती कर  उपयोग में लाती है और उपयोग पूरा हो जाने के बाद स्कूलों से अलग कर देती है। जिससे पढ़े लिखे युवावस्था में अतिथि शिक्षक के रूप में शुरू होकर बुढ़ापा तक पहुंच चुके हैं। इस तरह शोषितों की मांग को भी सरकार पंद्रह वर्षों से पूरा नहीं कर पा रही है।सरकार के यह नजरंदाजानापन समझ से परे है।

अब मंडला जिला सहित सिवनी और अन्य जिले के अतिथि शिक्षक भी शाला बहिष्कार को व्यापक रूप देकर  हड़ताल पर जाने लगे हैं।यहां पर बताना जरूरी है,कि मंडला जिले के प्राय:अधिकांश स्कूलों में अतिथि शिक्षकों के अलावा कोई रैगुलर शिक्षक पदस्थ हैं ही नहीं।

मध्यप्रदेश शासन के द्वारा जारी आदेशों के अनुसार आगामी दो-तीन महीने के भीतर शिक्षकों के स्थानांतरण और भर्ती आदेशों के पालन हो जाने के बाद सभी अतिथि शिक्षकों का रोजगार छिन जाएगा।जबकि आधे से अधिक का रोजगार तो पिछले महीनों हुई भर्तियां और ट्रांसफर के चलते खत्म हो गया है।

   समाचार के माध्यम से सरकार से बार बार और हजार बार मांग की जा रही है,कि अतिथि शिक्षकों को सम्मान जनक वेतन पर नियमित रोजगार दिये जाने जल्द से जल्द आदेश कराये जाएं।वरना अतिथि शिक्षक अब अतिथि शिक्षक ही बने रहकर पढ़ाने का काम नहीं करेंगे।

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