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भय के साए में भविष्य संवारने को मजबूर है आदिवासी जिले के मासूम बच्चे जिम्मेदार कर रहे है बड़ी घटना का इंतज़ार...




रेवांचल टाइम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में जर्जर जर्जर शिक्षा व्यवस्था का जिम्मेदार कौन जहाँ आज अधिकतर स्कूलों में टीचर नही और है भी तो समय में नही पहुँच रहे है साथ ही जिले के अधिकतर भवन जर्जर जर्जर हो चुके है जहाँ पर जो बच्चे देश के भविष्य पर उनका कब भविष्य अंधकार में बदल जाये ये कोई नही जनता है।

         वही जानकारी के अनुसार बीते वर्ष में जर्जर जर्जर भवन में चल रही पढ़ाई के समय भवन के छत तक गिर गई थी जिसमे आनन फानन में जिला प्रशासन जगा और ओर अपनी जिम्मेदारी निभाई आखिर जिला प्रशासन के जिम्मेदार बड़ी घटना दुर्घटना के बाद ही क्यो जागता है अगर समय रहते जिम्मेदार जागे तो कोई घटना न घट पाये।

         वही जानकारी के अनुसार मंडला के विकास खण्ड मवई '15 सितंबर 2022 दिवस गुरुवार जनपद पंचायत मवई क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत टिकरिया के निकट का ग्राम बाघण्डी स्थित एक ऐसा विद्यालय  जहा मासूम अपने भविष्य को संवारने जाते हैं, मगर भय के साए में | जी हां यह वही स्कूल हैजहां पर लिखा जाता है मासूमों का भविष्य |जरा इन तस्वीरों पर नजर मार कर देखिए ! क्या किसी जिम्मेदारों को इसकी तनिक भी कोई परवाह ही नहीं ?

    नवनिर्वाचित सरपंच रमेश सैयाम एवं ग्राम के कुछ प्रतिष्ठित जनों द्वारा जर्जर स्कूल भवन को जा करके देखा गया जो रात्रि में कल ही अतिवृष्टि के कारण धराशाई हो गया था ।पर आज शेष

 कमरे में बच्चों को बिठाया गया था जहां पर हर वक्त बजती है .खतरे की घंटी। जीर्ण  पुराने भवन के अलावा अतिरिक्त कक्ष भी बनाए गए हैं ,लेकिन इन कक्षाओं की भी जर्जर हालत है |अतिरिक्त कक्ष के छत से मलमें  के टुकड़े गिर रहे हैं वहां पर भी मासूमों का भविष्य भय और दहशत के साए में है | मध्यान भोजन का किचन सेट जिसकी हालत भी जर्जर है आखिर इन सब के पीछे जिम्मेदार है कौन ?अब देखना यह होगा कि 'जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ कर सफाई का प्रमाण प्रस्तुत करने में कौन कितना आगे है |

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