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Friday, September 30, 2022

डेंगू के लक्षण, कारण और इलाज के साथ ही जानिए बचाव के उपाय भी



डेंगू एक मच्छर जनित बीमारी है. डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से डेंगू बुखार होता है. एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से डेंगू बुखार होता है. उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (ट्रॉपिकल) क्षेत्रों में डेंगू के ज्यादा मामले सामने आते हैं. दुनिया की लगभग आधी आबादी यानी 4 अरब लोग ऐसे ही क्षेत्रों में रहते हैं, यानी उन्हें डेंगू बुखार होने का खतरा बना रहता है. डेंगू हर साल 40 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रभावित करता है. बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा हो जाता है या हमारे घरों में कई ऐसी जगहों पर पानी जमा होता है, जो कई दिनों तक खुले में पड़ा रहता है. डेंगू का मच्छर ऐसे साफ पानी में ही पनपता है. इस आर्टिकल में डेंगू के बारे में सब कुछ जानते हैं. जैसे डेंगू क्या है, इसके लक्षण, कारण और इलाज के बारे में भी जानेंगे.
डेंगू क्या है (What is Dengue?)

डेंगू मच्छरों के काटने से फैलने वाली एक बीमारी है. इस बीमारी में व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ सकता है. यह बुखार डेंगू वायरस के कारण होता है, इसलिए एंटीबायोटिक दवाओं से इसका इलाज नहीं हो पाता है. आमतौर पर यह बीमारी बरसात के मौसम में होती है, लेकिन घरों में लंबे समय तक खुले में रखे पानी में भी डेंगू बीमारी फैलाने वाले मच्छर पनप सकते हैं. ध्यान रहे कि डेंगू का मच्छर साफ पानी में ही पनपता है, इसलिए अपने आसपास पानी जमा न होने दें. डेंगू बुखार ट्रॉपिकल क्षेत्रों में होता है. खासतौर पर दक्षिण-पूर्वी एशिया, पश्चिमी प्रशांत, पूर्वी भूमध्यसागर, अफ्रीका और उत्तर व दक्षिण अमेरिका के100 से ज्यादा देशों में हर साल डेंगू का प्रकोप देखने को मिलता है. डेंगू किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है, यह स्त्रियों और पुरुषों में किसी को भी हो सकता है. इसका एक गंभीर रूप हेमरेजिक बुखार बच्चों को ज्यादा प्रभावित करता है.
डेंगू के लक्षण (Symptoms of Dengue?)

अगर आप डेंगू से गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं तो इसके लक्षण किसी भी अन्य बुखार की तरह बहुत ही साधारण से हो सकते हैं. अक्सर लोग इन लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते हैं. डेंगू के लक्षणों में तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द और शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखते हैं. इसके अलावा डेंगू से गंभीर तौर पर बीमार होने पर आपको हड्डियों में गंभीर दर्द होता है, इसे ब्रेकबोन बुखार भी कहा जाता है. उल्टी, जोड़ों में दर्द, आंखों में दर्द जैसे कुछ लक्षण भी आपको डेंगू होने की तरफ इशारा करते हैं. कमर के हिस्से में दर्द, एक दिन में 3 या ज्यादा बार उल्टी, नाक और होंठों से खून बहना, उल्टी और मल में खून आना, थकावट और बेचैनी महसूस होना डेंगू के गंभीर लक्षण हैं.
डेंगू के कारण (Causes of Dengue?)

जैसा कि आपने ऊपर पढ़ा, डेंगू मच्छरों से फैलने वाली बीमारी है. संक्रमित मच्छर के इंसान को काटने पर डेंगू का वायरस इंसान को डेंगू बीमारी से संक्रमित कर देता है. इसी तरह डेंगू संक्रमित व्यक्ति को यदि कोई मच्छर काट ले तो वह डेंगू से संक्रमित हो जाता है और इसके बाद जब वह किसी अन्य व्यक्ति को काटता है तो वह व्यक्ति भी डेंगू से संक्रमित हो जाता है. डेंगू का वायरस फ्लैवीवायरस परिवार से संबंधित है. इन्हें चार वायरल (Type of Dengue Fever) श्रेणियों में रखा जाता है – डी-ई-एन-1, डी-ई-एन-2, डी-ई-एन-3 और डी-ई-एन-4. डेंगू फैलाने के लिए एडीज प्रजाति के मच्छर जिम्मेदार हैं और इनमें भी खासतौर पर एडीज एजिप्टी डेंगू के प्रसार के लिए जाने जाते हैं.

डेंगू का मच्छर रुके हुए साफ पानी में पनपता है और आमतौर पर दिन में ही काटता है. डेंगू संक्रमित मच्छर के काटने के बाद वायरस व्यक्ति के खून में फैलता है और इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2 से 7 दिनों का होता है. डेंगू की बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलती, बल्कि इनक्यूबेशन पीरियड के दौरान संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद यदि मच्छर किसी अन्य व्यक्ति को काटता है तो दूसरा व्यक्ति भी संक्रमित हो जाता है.
डेंगू का इलाज (Treatment of Dengue?)

जैसा की हमने ऊपर बताया, यह बीमारी वायरस के कारण होती है, इसलिए इसमें एंटीबायोटिक्स काम नहीं करते. इसका कोई इलाज मौजूद नहीं है, बल्कि एंटीवायरल दवाओं से लक्षणों के आधार पर इसका इलाज किया जाता है. ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो अपने डॉक्टर को दिखाएं और ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ लें. उल्टी की वजह से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए सादे पानी के साथ ही जूस, नारियल पानी आदि का सेवन करें. डेंगू के कुछ गंभीर लक्षण भी दिख सकते हैं, अगर ये लक्षण दिखें तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. आमतौर पर डॉक्टर बुखार उतारने के लिए पैरासिटामॉल खाने को देते हैं.

डेंगू के लक्षण दिखने पर स्वयं दवाएं न लें. खासतौर पर खून को पतला करने वाली दवाएं, जो रक्तस्राव को बढ़ा दें, जैसे – एस्पिरिन, आइबूप्रोफेन और नेप्रोक्सिन सोडियम आदि. डेंगू के इलाज में कई प्राकृतिक और घरेलू इलाज भी उपयोगी साबित हो सकते हैं, लेकिन गंभीरता बढ़ने पर आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए. गंभीर मामलों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की भी आवश्यकता पड़ सकती है.
डेंगू से कैसे बचें (Prevention of Dengue?)

हालांकि, डेंगू का टीका कुछ क्षेत्रों में उपलब्ध है, लेकिन WHO के अनुसार डेंगू से प्रभावित क्षेत्रों में यह टीका प्रभावी नहीं है. डेंगू से बचने का सबसे आसान उपाय स्वयं को मच्छरों के काटने से बचाना है. मच्छरों से बचने का सबसे आसान उपाय मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करना ही है. मच्छरों से बचने के लिए मॉस्क्यूटो रैपिलेंट का इस्तेमाल करें. इसके अलावा साल के जिस समय डेंगू का प्रकोप ज्यादा होता है, उस समय पूरे बाजू के कपड़े, मोजे-जूते पहनने चाहिए. घर के खिड़की-दरवाजों को बंद रखें. घर या आसपास कहीं पानी जमा हो तो उसे साफ कर दें. जहां से पानी साफ करना संभव न हो वहां पानी में एक ढक्कन मिट्टी का तेल या पेट्रोल डाल दें.
डेंगू बुखार की जांच (Diagnosis of Dengue Fever in Hindi)

जब भी डेंगू के लक्षण दिखें तो टेस्ट करना जरूरी हो जाता है, क्योंकि यह बीमारी घातक भी हो सकती है. इसके अलावा टाइफाइड, फ्लू और खसरा जैसे रोगों के लक्षण में एक जैसे होते हैं. डेंगू की जांच के लिए खून में एंटीबॉडीज व वायरस की उपस्थिति का पता लगाने के वास्ते खून की जांच (Blood Test) होती है. यदि लक्षण पांच दिन तक बने हुए हैं तो मरीज के सीरम का सेंपल लेकर उसमें मौजूद वायरस का पता लगाया जाता है. सीरम या सेरेब्रो स्पाइनल द्रव के सेंपल से वायरल जीनोमिक का पता लगाने के लिए पॉलीमरेज चेन रिएक्शन का इस्तेमाल किया जाता है.


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