शिवराज ने घोषित किया मुआवजा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर कहा कि जबलपुर के एक अस्पताल में भीषण अग्नि दुर्घटना का दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। स्थानीय प्रशासन और कलेक्टर से निरंतर संपर्क में हूं। मुख्य सचिव को संपूर्ण मामले पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव के लिए हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। जबलपुर के न्यू लाइफ अस्पताल में आग से हुई दुर्घटना में अमूल्य जिंदगियों के असमय निधन के समाचार से हृदय दु:ख से भरा हुआ है। ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को यह गहन दु:ख सहन करने की शक्ति देने एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। दु:ख की इस घड़ी में शोकाकुल परिवार स्वयं को अकेला न समझें,मैं और संपूर्ण मध्यप्रदेश परिवार के साथ है। राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों के संपूर्ण इलाज का व्यय भी सरकार वहन करेगी।
कमलनाथ ने भी जताया दुख
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि जबलपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से कई लोगों की मृत्यु होने और बहुत से लोगों के हताहत होने का समाचार प्राप्त हुआ। यह अत्यंत पीड़ादायक घटना है। मैं मृतकों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करता हूं। अग्निकांड में झुलसे लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
पिछले साल लगी थी भोपाल में आग
इससे पहले पिछले साल आठ नवंबर को भोपाल के हमीदिया अस्पताल के शिशु वार्ड में आग लगी थी। इसमें कम से कम पांच बच्चों की मौत हुई थी। इसे लेकर भी सियासत गरमाई थी। उस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कहने पर सभी अस्पतालों का सेफ्टी ऑडिट किया गया था। हालांकि, जबलपुर की घटना से लगता है कि नतीजा सिफर ही रहा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि जबलपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से कई लोगों की मृत्यु होने और बहुत से लोगों के हताहत होने का समाचार प्राप्त हुआ। यह अत्यंत पीड़ादायक घटना है। मैं मृतकों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करता हूं। अग्निकांड में झुलसे लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
पिछले साल लगी थी भोपाल में आग
इससे पहले पिछले साल आठ नवंबर को भोपाल के हमीदिया अस्पताल के शिशु वार्ड में आग लगी थी। इसमें कम से कम पांच बच्चों की मौत हुई थी। इसे लेकर भी सियासत गरमाई थी। उस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कहने पर सभी अस्पतालों का सेफ्टी ऑडिट किया गया था। हालांकि, जबलपुर की घटना से लगता है कि नतीजा सिफर ही रहा है।
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