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Sunday, August 14, 2022

पेट्रोल की तरह हर महीने बढ़ेगा बिजली बिल, जानें नियावली



भारत सरकार द्वारा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) रुल्स-2022 का प्रारूप जारी कर दिया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा है कि यह नियमावली लागू हुई तो पेट्रोल की तरह ही हर महीने बिजली बिल बढ़ता हुआ नजर आएगा।

इस नियमावली के लागू होने पर फ्यूल (कोयले और क्रूड आयल) की बढ़ती कीमतों की वसूली वितरण कंपनियां सीधे उपभोक्ताओं से करेंगी। शैलेंद्र दुबे ने प्रारूप के माध्यम से बताया है कि 14 नंबर पैरा में यह लिखा है कि कोयले की कीमत बढ़ने पर वितरण कंपनियां बढ़ी लागत उपभोक्ताओं से वसूल करेंगी। इसका पूरा पूरा लाभ निजी क्षेत्र की वितरण कंपनियां उठाएंगी। देसी-विदेशी कोयला और उत्पादन गृहों में खपत किए जाने वाले क्रूड आयल (लाइट डीजल) की कीमतें जब भी बढ़ेंगी बिजली उपभोक्ताओं के बिल में बढ़ी लागत जुड़ जाएगी।

उन्होंने कहा है कि विदेशी कोयले का देश में आयात 20 हजार रुपये प्रति टन के करीब है, यूपी की दूरी अधिक है इस लिहाज से यूपी में यह कोयला मंगाने पर इसकी कीमत करीब 26 हजार रुपये प्रति टन के करीब पड़ेगी। प्रस्तावित नियमावली का पूरा लाभ निजी क्षेत्र की वितरण कंपनियां पाएंगी। उत्पादन इकाइयां बिजली उत्पादन की बढ़ी लागत का भार वितरण कंपनियों पर डालेंगी और वितरण कंपनियां अपने उपभोक्ताओं से इसकी वसूली करेंगी।

90 दिन बाद लागू हो जाएगा यह नियम

उन्होंने आरोप लगाया है कि यह नियमावली पूरी तरह निजी औद्योगिक घरानों को पोषित करने वाला है। इस संशोधन का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। बताया है कि इस नियमावली पर उपभोक्ताओं से एक महीने के अंदर आपत्तियां मांगी गई हैं। 90 दिनों के बाद यह नियमावली लागू हो जाएगा। यानी नये साल से उपभोक्ताओं को हर महीने बिजली उत्पादन लागत में होने वाली वृद्धि की भरपाई अपने जेब से करनी होगी।

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