रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला से नैनपुर, जबलपुर, निवास, घुघरी, बिछिया, डिंडोरी मवई, से गाँव गाँव तक जाने वाली बसे परिवहन विभागों के नियमों को ताक में रख संचालित हो रही है बसें वही सड़को में दौड़ रही बसे में अधिकतम बसों में न रेट लिस्ट है और न यात्रियों के किये कुछ व्यवस्था जनवरों की तरह ठूस ठुस का लोगों ले जाया जा रहा है और आने जाने वालों से मनमाना किराया भी वसूल रहे है वही अधिकतम बसें जर्जर की स्थिति में संचालित हो रही है । वतर्मान में बरसात का मौसम चल रहा है संचालित बसों की न खिड़की लगती है और तो ओर कुछ बसों में खिड़की भी नही है पन्नी या तिरपाल से काम चला रहे है और कुछ बसों की छत से भी पानी अन्दर आ रहा है पर इन बसों में किराया पूरा पूरा वसूल रहे है बल्कि ये कहे कि परिवहन विभाग से जारी रेट लिस्ट के हिसाब से ज्यादा लोगों से पैसे लिए जा रहे है, बस संचालकों की भर पुर मनमानी चल रही है।
वही सूत्रों की माने तो कुछ बसों के तो फिटनस, परमिट भी नही है और कुछ बसों के निरस्त हो गए फिर भी सड़क में धड़ल्ले से दौड रही है ये सब विभाग और सम्बंधित थानों की मिलीभगत के चल रही है। आये दिन सड़क हादसे भी हो रहे है। पर जिम्मदारो को लोगो की जान माल की कोई परवाह भी नही की जा रही है। जिम्मेदार विभाग के अधिकारी कर्मचारी केवल पैसे बटोरने में लगे हुए जब कोई बड़ा हादसा होता तब कुछ समय के लिए विभाग कुंभकर्णी नीद से जाग कर नियम कानून को निसहाय लोगो पर अजमाता है, और जैसे ही उस हादसे को लोग भूल जाते है वैसे ही सब जस की तस हो जाता है।
अगर यात्रियों की माने तो बस के कंडेक्टर के द्वारा लोगो से अभद्रता से भी पेश आते है ओर लोगों को ऐसी टिकिट दी जाती है जिसमे न बस का नाम होता है न बस का नम्बर और कहा से कहा तक कि टिकिट दी है और न राशि का उल्लेख होता जो लोगो को टिकिट दी जाती है। वह टिकिट में जो भाषा का उपयोग होता है वह केवल कंडेक्टर ही पढ़ सकता है जबकि परिवहन विभाग के नियम के अनुसार बसों में साफ साफ शब्दों में किराया सूची होनी चाहिए जो बसों में नही है यात्रा करने वालो यात्रियों के लिए बैठक व्यवस्था होनी चाहिए खिड़की के साथ साथ दुघर्टनाओ के देखते हुए बसों में दो दरवाजे होने चाहिए बस में छमता से अधिक सवारी नही ले जाने ऐसे अनेक नियम बने हुए पर एक भी नियम बस संचालकों के द्वारा नही माना जाता है।



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