आखिर किसके संरक्षण में हो खाद की काला बाजारी शासकीय मूल्य से अधिक रेट पर बेचते पकड़ाया खाद व्यापारी फिर भी कृषि विभाग मौन... - revanchal times new

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Saturday, July 30, 2022

आखिर किसके संरक्षण में हो खाद की काला बाजारी शासकीय मूल्य से अधिक रेट पर बेचते पकड़ाया खाद व्यापारी फिर भी कृषि विभाग मौन...



रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में जनता कहती है कि खाद की काला बाजारी में कर्षि विभाग के अधिकारियों का खुला संरक्षण जिसके चलते नही हो रही है कार्यवाही 

प्रदेश के मुख्यमंत्री  लाख घोषणा कर दे चाहे कितनी भी योजना ले आये मगर उसके अधिकारी आदिवासी समाज के हित के लिए जितनी भी घोषणाएं कर दें मगर उसका गरीब आदिवासी समुदाय को कभी नहीं मिलता है फायदा सिर्फ  सरकारी कर्मचारियों और व्यापारी लेते है और जनता को लूटते है  जिसका जीता जागता उदाहरण आज ग्राम चिरईडोंगरी में देखने को मिला जब ईश्वरपुर निवासी अशोक वर्मा  एवं उसके साथियों के द्वारा चिरईडोंगरी के खाद व्यापारी चौरसिया कृषि सेवा केंद्र से 40 बैग यूरिया खरीदने की बात हुई जिसमें व्यापारी द्वारा 40 बैग यूरिया देने के राजी तो हो गया मगर खाद दाम  प्रति बैग का मूल्य 450 रुपए बताया गया  जबकि अभी वर्तमान में शासकीय मूल्य यूरिया का  रेट ₹267 प्रति बोरी है और  रेट सूची व्यापारी की दुकान के बाहर लगी हुई है बावजूद व्यापारी द्वारा प्रति बैग यूरिया का रेट 450 रू बताया गया जिसके कारण किसानो और  

व्यापारियों में तूतू में चालू हो गई जिसके चलते अशोक वर्मा एवं अन्य किसानों के द्वारा कृषि विभाग के छेत्रीय कर्मचारी विमल मसराम से संपर्क किया गया  लेकिन विमल मसराम द्वारा कमीशन के चक्कर में किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई केवल दिखावटी तौर पर पंचनामा तैयार किया गया जबकि चौरसिया कृषि केंद्र के व्यापारी द्वारा खाद की ढेर सारी बोरिया किसी अन्य गोदाम में छुपा कर रखी गई हैं बाद में मंडला डीडीए से बात करके बड़ी मशक्कत से केवल 10 ही बोरियां यूरिया की किसानों को मिल पाई जबकि व्यापारी द्वारा उसके स्टॉक में 18 बोरियां बताई गई है और बाकी की 8 बोरी व्यापारी द्वारा खुद के खेत में उपयोग की जाएगी यह बताया गया और बाकी की 8 बोरी देने से मना कर दिया गया इन सब बातों से केवल एक ही चीज समझ में आती है की कृषि विभाग कार्यवाही के लाख ढोल पीटते रहे लेकिन रंगे हाथों पकड़े जाने के बावजूद भी विभाग कभी कोई कार्यवाही नहीं करता क्योंकि विभाग द्वारा व्यापारियों से मोटा कमीशन की वसूली की जाती है और कुछ समय पूर्व में भी समाचार पत्रों के माध्यम से विभाग को इसकी जानकारी देने की कोशिश की गई है लेकिन फिर भी विभाग की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की गई है वही शासन और प्रशासन से ही उम्मीद है कि ऐसे व्यापारियों के प्रति उचित और कठोर कार्यवाही करें और नही तो ये व्यापारी सिर्फ जनता और किसानों को लूटते रहेंगे।

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