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Saturday, July 2, 2022

बारिश के मौसम में बच्चों में इन बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा, जानें- लक्षण और बचाव का तरीका




रेवांचल टाईम्स:मानसून आते ही देश में बारिश का दौर शुरू हो गया है. बरसात का सिलसिला अब अगले कुछ महीनों तक जारी रहेगा. बरसात का यह मौसम अपने साथ सिर्फ हरियाली ही नहीं लाता, बल्कि कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है. खासतौर पर इस दौरान बच्चों पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत होती है. बच्चे बरसात के रुके हुए पानी में खेलते हैं और रिमझिम बूंदों में भीगना उन्हें पसंद होता है. उनकी यही अठखेलियां उन्हें इस मौसम में बीमारी की ओर धकेल देती हैं. बच्चा बीमार हो जाए या वह परेशान है तो माता-पिता की परेशानी बढ़ना तय होता है. इस लेख में हम आपको उन बीमारियों के बारे में सचेत करेंगे और उनसे बचने के तरीके भी बताएंगे. आइए जानते हैं बरसात के मौसम में कौन-कौन सी बीमारियां होने का खतरा होता है? साथ ही जानेंगे उन बीमारियों के लक्षण और उनसे बचाव के लिए आपको क्या करना चाहिए.
बारिश के मौसम में बच्चों में होने वाली बीमारियां

बारिश के मौसम में बच्चों में सर्दी जुखाम, डायरिया और स्किन (चर्म रोग) से संबंधित बीमारियां होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. इसके अलावा सिरदर्द, बुखार, कब्ज और भूख न लगना जैसे कई लक्षण बच्चों में देखे जाते हैं. बारिश के दिनों में डेंगू, मलेरिया और चिकुनगुनिया के भी सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं. अगर बच्चों में ये लक्षण दिखाई दें तो परिजन लापरवाही न बरतें और डॉक्टर से सलाह लेकर दवा तुरंत दवा दें.

वहीं, फ्रेंड्स आई एंड चाइल्ड केयर सेंटर, सेक्टर-17ए, नोएडा (Friends Eye and childcare Center, Sector 17A, Noida) की चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. रितु गुप्ता ने बताया कि बारिश के मौसम में बच्चों में फ्लू, वायरल फीवर, डायरिया, टायफाइड, हेपेटाइटिस, पीलिया (जॉन्डिस) और शरीर में दर्द होने की शिकायतें सबसे ज्यादा सामने आती हैं. डॉ. रितु गुप्ता ने बताया कि बारिश के मौसम में मच्छर और मक्खियां बढ़ जाती हैं. मक्खियां जब खाने पर बैठती हैं तो खाद्य पदार्थों के रास्ते भी काफी बीमारियां फैलती हैं. बारिश के मौसम में नमी होने की वजह से वायरस और वैक्टीरिया भी बढ़ते हैं. इससे फ्लू, दमा, एलर्जी और अस्थमा होने की आशंका होती है.
बच्चों को इन बीमारियों से कैसे बचाएं

चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. रितु गुप्ता ने बताया कि बारिश के बाद जगह-जगह गंदा पानी जमा हो जाता है. चूंकि बच्चों को पानी से ज्यादा लगाव होता है इसलिए वे मना करने के बावजूद पानी में खेलते हैं. छोटे बच्चे कहीं भी, किसी भी चीज को छू लेते हैं और फिर उसी हाथ की अंगुलियों को मुंह में डाल लेते हैं. ऐसे में उनके बीमार पड़ने की आशंका ज्यादा होती है. माता-पिता या परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों को गंदे पानी में न खेलने दें. घर के आस-पास गंदे पानी को इकट्ठा होने न दें. बच्चों को बाहर का खाना न खिलाएं.

डॉ. रितु गुप्ता ने बताया कि बच्चे जब भी बाहर खेलने जाएं तो उनको पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं. ताकि मच्छर न काटने पाएं. अगर कपड़े गीले हो जाएं तो तुंरत बदल दें. बच्चे अगर स्वीमिंग पूल में नहाते हैं तो वहां मत जाने दें. इसके साथ ही कोशिश करें कि बच्चे अंगुलियों को मुंह में न डालें. घर हो या बाहर बच्चों को पानी से दूर रखें. गीले कपड़े बच्चों को बिल्कुल भी न पहनाएं. अगर किसी बच्चे को कोई दिक्कत है तो लापरवाही बिल्कुल न बरतें और अपने घर के पास किसी भी डॉक्टर से मिलकर ही बच्चों का इलाज कराएं.

वहीं, नोएडा जिला अस्पताल के डॉक्टर अरविंद कुशवाहा ने भी कहा कि बच्चों को पानी में ज्यादा देर तक न खेलने दें. बच्चों को गंदे पानी से दूर रखें. बारिश के मौसम में बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
इन चीजों पर भी रखें विशेष ध्यानकूलर और गमले में पानी को समय-समय पर बदलते रहें.
सब्जियां, पीने का पानी और फलों को साफ रखें.
घर में मच्छर भगाने वाली दवा का इस्तेमाल करें.
बच्चों को मच्छरदानी में सुलाएं तो बेहतर रहेगा.
पैर और हाथ को गंदा न रखें. गंदा होने पर साबुन से धोएं
अगर कोई शख्स वायरल फीवर या डेंगू, मलेरिया या सर्दी-जुखाम से पीड़ित है तो बच्चों को उसके पास न जाने दें

चिकित्सकों का कहना है कि अगर सावधानी बरती जाए तो बच्चे बहुत कम बीमार पड़ेंगे. बच्चों को बीमार पड़ने पर आर्थिक तौर पर नुकसान तो होता ही है साथ में परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ जाता है.

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