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Tuesday, July 19, 2022

सरकार के फैसले से जनता नाखुश.... खाद्य सामग्रियों में लगेगा जीएसटी...





रेवांचल टाईम्स - बालाघाट आवश्यक खाद्य वस्तुओं जैसे दही, लस्सी, बटर मिल्क, आटा, दाल और चावल सहित अन्य सामग्रियों पर पहली बार 5 प्रतिशत का जीएसटी सरकार द्वारा लगाया गया है। भारत के 75 साल के इतिहास में ये पहली बार है जब इन खाद्य सामग्री पर टैक्स लगाया जा रहा है, इसका सीधा असर आम नागरिक के महिने के बजट पर पडऩा निश्चित है। अब आम आदमी को हर छोटी-छोटी दैनिक उपभोग की वस्तुओं के लिए अधिक पैसे चुकाने होगें। कोरोना महामारी के बाद जिस तरह पेट्रोल व डीजल के दामों में सरकार द्वारा वृद्धि की गई है उससे वैसे भी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही है उसके बाद खाद्य पदार्थो पर जीएसटी लगाना आम नागरिक के नजिरियें से परेशान करने वाला फैसला माना जा सकता है। 

व्यापारियों ने शुरू किया विरोध

प्री-पैक और प्री-लेबल वाले खाद्यान्न, दही, बटर मिल्क आदि आवश्यक चीजों पर 5 फीसदी जीएसटी लगाने के फैसले का विरोध होना शुरू हो गया है। देश के व्यापारिक समुदाय, खाद्यान्न और एपीएमसी एसोसिएशनों ने जीएसटी काउंसिल द्वारा लिए गए इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि इस फैसले से व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। 

दैनिक वेतनभोगीयों पर बुरा असर

आज भी हमारे देश में अधिकतर लोग ऐसे है जसे दिहाड़ी मजदूरी करते है या छोटा मोटा कार्य करके अपने परिवार का पालन पोषण करते है। ऐसे में दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर टैक्स लगने से रोज कमा कर खाने वाले लोगों की जेब पर बुरा असर पडऩा स्वभाविक है।

फैसले से जनता नाखुश

वहीं सरकार के खाद्य पदार्थो में जीएसटी लगाने वाले निर्णय के बाद आम जनता के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। नगर में जब इस विषय पर चर्चा की गई तो आम नागरिको का कहना है कि पहले से ही आम नागरिक महगांई से परेशान है उसके बाद अब रोजमर्रा की वस्तओं पर सरकार द्वारा टैक्स लगाना बिलकुल गलत फैसला है। इस फैसले से गरीब परिवारों के लिए मुसिबतें आने वाले समय में और बढ़ेगी। 

घरों का बजट हुआ डामाडोल

सरकार के इस फैसले से ग्रामीण अंचलों में एवं गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार में काफी चिंता दिखाई दे रही है उसी के चलते कुछ ग्रामीणों से चर्चा की गई तो उनके द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया है कि भाजपा सरकार एक पहली ऐसी सरकार है जिसने आजादी के इतने वर्षों के बाद खाद्य सामग्रियों में जीएसटी लगा रही है। इससे पहले कांग्रेस सरकार ने भी सत्ता संभाली है लेकिन खाद्य सामग्रियों में जीएसटी नहीं लगाई गई है, लेकिन भाजपा सरकार के द्वारा बढ़ती महंगाई के साथ-साथ खाद्य सामग्रियों में जीएसटी लगा रही है जिससे गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार का जीना दुश्वार हो गया है।

भाजपा सरकार के खिलाफ दिखा आक्रोश

ग्रामीण अंचलों में जीएसटी लगाने की चर्चा करने पर ही भाजपा सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश देखा गया है। जहां पर उनके द्वारा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों, गरीबों एवं मध्यम वर्गीय परिवार के हितों में सोचने वाली सरकार नहीं है। वह बड़े-बड़े दावे कर आश्वासन पर ही दिखाई दे रहा है। उनके द्वारा किसी भी गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार को योजनाओं का लाभ नहीं मिलता धरातल पर कभी भी योजनाओं का लाभ पूर्ण तरीके से आम लोगों को नहीं मिल पाता है कुछ लोगों को ही योजनाओं का लाभ मिलता है और कुछ लोग योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। वही इस फैसले पर ग्रामीण अंचलों के लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है और वह इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

जनता के हित में नही फैसला

वहीं नगर वासियों ने जानकारी देते हुए बताया है कि सरकार के द्वारा जो खाद्य सामग्री में जीएसटी लगाने का फैसला लिया गया है वह जनता के हित में नहीं है इससे तो रोजमर्रा दैनिक भोगी एवं निजी कंपनियों में कार्य करने वाले कर्मचारी सहित मध्यम वर्गीय परिवार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा जहां एक और मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों के भविष्य सुधारने के लिए कुछ पूंजी जमा करता है और स्वास्थ्य के लिए जो जमा पूंजी रखता है अब वह भी नहीं रह पाएगी।

संभलने का नहीं मिला मौका

आपको बता दें कि कोरोना काल के चलते 2 वर्षों में जो भयावह दौर आम नागरिकों एवं पूरे प्रदेश सहित देश वासियों ने देखा है उससे अभी पूर्ण रुप से जिलेवासी उभरे ही नहीं थे कि केंद्र सरकार के द्वारा खाद्य सामग्री में जीएसटी लगाकर उन्हें और एक चिंता में डूबा दिया है। वहीं खाद्य सामग्री में जीएसटी लगने से चारों ओर चर्चा का विषय बन गया है जिससे सभी वर्ग के लोगों में आक्रोश एवं नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

       इनका कहना है

      आम जनता अभी वैसे ही परेशान है। कोरोना महामारी के बाद सभी की जिन्दगी पटरी पर लौट आई है हम ऐसा नही कह सकते है। उसके बाद यह दैनिक उपयोग की वस्तुओ पर जो टैक्स लगाया गया है उससे आम जनता को बहुत परेशानी होगी। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए कि पहले तो बहुत से लोगों के पास रोजगार ही नही है जैसे जैसे वे अपने परिवार व बच्चों का लालन पोषण कर रहे है उसके बाद यह टैक्स लगने से गरीब परिवारों को दिक्कतें बहुत आयेगीं।

                         डॉ सीमा श्रीवास्तव 

                      पीजी कॉलेज बालाघाट

सरकार द्वारा लिए गए फैसले से गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार का जीना तो दुश्वार होगा ही साथ ही घर की रसोई का बजट भी बिगड़ जाएगा, जिस ओर सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है और उचित फैसला लेने की जरूरत है।

                      भारती उरकुड़े

                              गृहणी

सरकार द्वारा लिए गए फैसले से व्यापारी वर्ग एवं रोजमर्रा की जिंदगी गुजारने वाले मजदूरों के लिए काफी चिंता का विषय है। इससे गरीब जनता को किसी भी प्रकार का फायदा नहीं है नुकसान ही नुकसान है। कोरोना से हालात अभी तो उभरे ही थे कि सरकार के द्वारा एक और परेशानी गरीब जनता के ऊपर डाली जा रही है जो फैसला जनता के हित में नहीं है।

                         सुनील उरकुड़े

                         स्थानीय व्यापारी

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