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Thursday, July 28, 2022

बड़े बड़े नेता होने पर भी कीचड़ से सनी सड़क से होकर नौनिहाल पहुंच रहे स्कूल




रेवांचल टाईम्स –जिला मुख्यालय से करीब 14 किमी दूर ग्राम कातलवोडी में हाईस्कूल व प्रदेश में प्रसिद्ध राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर स्थित है जहां आसपास के गांव के बच्चे पढ़ने और ग्रामीण जन माता रानी के दर्शन करने पहुंचते हैं ।


मगर यहां पढ़ने आने वाले बच्चों की राह इतनी आसान नहीं है उन्हें लगभग 2 से ढाई किलोमीटर घुटने भर कीचड़ में से निकल कर जाना पड़ता है स्कूल तक पहुंचने का मार्ग कच्चा होने के कारण बारिश के दौरान पूरा मार्ग किचड़ से भर जाता है। हालत ऐसी हो जाती है कि मार्ग पर चलना भी दुर्भर हो जाता है। बारिश के दौरान छात्र-छात्राओं को किचड़ में गिरते पड़ते हुए स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। 

शासन-प्रशासन में बैठे लोग ग्रामीण क्षेत्रों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का लाख दावा कर लें लेकिन कई जगहों पर हकीकत इसके उलट होती है। ग्रामीण कभी सड़क , पानी, बिजली, राशन के लिए तरसते हैं और इन परेशानियों के बीच वे जीवन से लड़ते रहते हैं, उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता है।ऐसा ही एक मामला वर्षों से सिवनी शहर से लगे ग्राम फुलारा और मात्रधाम कातलवोडी  की सड़क का है। बारिश के दिनों में दोनों ही सड़कें कीचड़ से सन जाती हैं। यहां से गुजरना हर किसी के लिए कठिन होता है। स्कूली बच्चों के लिए यह डगर तो और तकलीफदेह होती है। बच्चे कभी इसमें फिसलकर गिर जाते हैं तो कभी कीचड़ लगे ड्रेस में ही स्कूल पहुंचते हैं

शहर से लगे ग्राम फुलारा और मात्रधाम कातलवोडी की सड़कों का बुरा हाल है। हाल ऐसा है कि गाडिय़ां तो दूर की बात, पैदल चलना भी दूभर हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी तो स्कूली बच्चों को होती है। कीचड़ से सनी सड़क से आने-जाने के दौरान हर दिन ड्रेस तो गंदे होते ही हैं, कोई न कोई बच्चाफिसलकर गिर जाता है।

सड़क की वजह से बच्चे रोज स्कूल जाने से भी परहेज कर रहे हैं। वहीं महिलाओं, कामकाजी लोगों , मंदिर दर्शन को जाने वाले भक्त व ग्रामीणों को भी आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी

 ग्रामीणों वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन आज तक जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी है, आए दिन कोई ना कोई छात्र या छात्रा उसकी फिसलन में फिसल कर गिर जाती है और किचड भरे कपड़ों में उसे स्कूल जाना होता है। कई बच्चों को यह गिरने से चोट भी आ गई है।

कातलबोड़ी से फुलारा मार्ग एक डेढ़ साल पहले स्वीकृत हो चुका है मगर जिम्मेदारो की लापरवाही और अनदेखी के कारण इस मार्ग का काम नही हो पाया जिसके कारण 50 से अधिक छात्रों को कीचड़ से प्रतिदिन दोचार होना पड़ रहा है या 2 किलोमीटर के स्थान पर 6 किलोमीटर घूम के जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

दो पंचायतों के बीच फसे होने के कारण इस मार्ग में कुछ तत्कालिक व्यवस्था भी नही बन पा रही है। जबकि स्वीकृति का प्रचार चुनाव में खूब हुआ और लोगों ने वोट भी दिया अब देखना है की इस कीचड़ भरी रोड से छात्रों और मंदिर जाने वाले भक्तो को कब तक राहत मिलती हैं। 


इनका कहना है

स्वीकृति तो हो गई है मगर पूर्व सरपंच ने चुनाव को देखते हुए कार्य नहीं कराया अब बरसात खत्म होते ही उस रोड का काम करवा दिया जाएगा।

घनश्याम सनोडिया

जिलापंचायत सदस्य

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