दरअसल, यह पूरा मामला लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) के तिकुनिया इलाके का है, जहां पिछले 2 वर्षों में आदमखोर बाघिन ने 21 लोगों को अपना शिकार बनाया था। जिसके बाद वन विभाग (Forest Department) ने इलाके में अभियान चलाकर एक बाघिन (Tigress) और एक बाघ (Tiger) को पिंजरे में कैद किया। जब दोनों की जांच की गई तो पाया गया कि बाघिन के आगे के दोनों केनाइन टूटे हुए थे और बाकी के दांत भी घिसे हुए थे। बाघिन की उम्र लगभग 9 साल पाई गई। कैमरा ट्रैप के आधार पर बाघिन लोगों पर हमला कर उनकी जान ले रही थी।
उसी इलाके से पकडे गए बाघ की उम्र लगभग 5 साल थी और वह पूरी तरीके से स्वस्थ था, लेकिन वह इंसानों पर हमला नहीं कर रहा था। इसलिए बाघ को निर्दोष साबित किया गया और दोषी बाघिन को वन विभाग ने उम्र कैद की सजा सुनाते हुए लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर में भेज दिया। साथ ही निर्दोष बाघ के गले में कॉलर आईडी लगाकर दुधवा टाइगर रिजर्व के कोर जोन इलाके में छोड़ दिया।
अब लखनऊ जू में गुजरेगी बाकि की जिंदगी
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है जब से इलाके में जंगली जानवर के हमले की सूचना मिली टीम गठित कर एक अभियान चलाया गया था। अभियान के दौरान एक बाघिन और एक बाघ को पिंजरे में कैद किया था। बाघिन की जांच में पाया उसके दोनों केनाइन टूटे हुए थे और उसकी उम्र 9 साल थी। वह आसानी से मिलने वाले इंसान का शिकार कर रही थी। इसलिए उसे लखनऊ के चिड़ियाघर (Lucknow Nawab Wajid Ali Shah Zoo) भेजने का निर्णय लिया गया है, जहां पर बाकी का जीवन गुजरेगा।
छोड़े गए बाघ की होगी निगरानी
डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि पकड़ा गया बाघ पूरी तरह स्वस्थ है। इसकी उम्र लगभग 5 साल है। जांच में पाया गया कि बाघ जंगल से बाहर जरूर आया है, लेकिन इंसानों पर हमला नहीं कर रहा है। इसके चलते इसके गले में कॉलर आईडी लगाकर दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) के कोर जोन इलाके में उसको छोड़ दिया गया है, जहां पर 6 महीने तक वन्य विभाग की टीम इसके बिहेवियर और उसके स्वास्थ्य की निगरानी करेगी।

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