रेवांचल टाईम्स - मण्डला 12 ज्योतिर्लिंग में बाबा बैद्यनाथ का खास महत्व है. बाबा बैद्यनाथ धाम झारखंड के देवघर जिले में स्थित है. ऐसी मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव जहां-जहां प्रकट हुए वहां-वहां शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है. बाबा बैद्यनाथ का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि यहां शक्तिपीठ भी है. देवघर के बाबा वैद्यनाथ को उत्तर वाहिनी गंगा का जल जो सुलतानगंज से होकर बहती है पसंद है. यही वजह है कि कांवड़िया 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार सबसे पहले भगवान श्रीराम ने सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर तक की यात्रा की थी. इसके बाद से ही यहां से देवघर जल ले जाने के परंपरा की शुरुआत हुई.गंगा को शिवप्रिया कहा गया है, ज्योतिर्लिंगों पर गंगा जल अर्पण करने की परंपरा रही है. चूकि बाबाधाम से सुल्तानगंज सबसे नजदीक है. यही वजह है कि यहां से कांवड़िया जलभर कर बाबा बैद्यनाथ को चढ़ाते हैं. तो वहीं गंगाजल उपलब्ध ना होने पर किसी (पवित्र) नदी के जल से भी पूजा करने पर बाबा प्रसन्न होते हैं.
सुल्तानगंज बिहार से गंगाजल लेकर 108 किलोमीटर पैदल बिना जूते चप्पल के यात्रा 108 किलोमीटर चलने के बाद बाबा बैजनाथ धाम देवघर झारखंड में जल बाबा को चाहने के बाद सभी कांवड़िये बाबा बासुकीनाथ में जल चढ़ाएंगे तब यात्रा पूरी होगी बोल बम का नारा है बाबा एक सहारा है
मंडला से निकले ये कांवड़िये-
दीपक ब्रजपुरिया, सत्य प्रकाश जयसवाल, अमित जयसवाल, आलोक खरिया, क्रांति बडोनिया, संतोष कुशवाहा, शैलेश खंडेलवाल, नितिन रावत ,समीर कटारे , जगदीश नायक ,विकास त्रिपोलिया ,सीबी चौदह, संजय रावत एवं ओमप्रकाश खंडेलवाल हुए शामिल .

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