कान्हा नेशनल पार्क की सीमा से लगे जंगल के अंदर चल रहे है डोलोमाइट की खदानों ने जंगल मे बना दी जगह जगह गहरी खाई....विभाग मौन.. - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

Sunday, June 12, 2022

कान्हा नेशनल पार्क की सीमा से लगे जंगल के अंदर चल रहे है डोलोमाइट की खदानों ने जंगल मे बना दी जगह जगह गहरी खाई....विभाग मौन..

रेवांचल टाईम्स डेस्क - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में अबैध भू माफियाओं के द्वारा अबैध कब्जा अबैध खनन अबैध खुदाई सब कुछ खुलेआम चल रहा है सरकार ने जिनको जिम्मेदारी दी है वह जान कर भी अनजान बन बैठे है मंडला जिले में जगह जगह से अबैध रेत निकली जा रही है अबैध खनन कर मुरम निकाली जा रही डोलोमाईट क्रेशरों और क्रेशरों के लिये जगह जगह से पत्थरो की खुदाई की जा रही लीज कही और खुदाई कही और की जा है और खाई बना का छोड़ दिया जा रहा है और जिले में अनेक क्रेशर बिना अनुमति के संचालन किया जा रहा है।



           वही मंडला जिले के विश्व प्रसिद्व कान्हा नेशनल पार्क से लगे जंगलों के अंदर ग्राम भवरताल और भवरताल के आसपास के ग्रामो में सरकार के द्वारा डोलोमाइट खदाने स्वीकृत है और इन खदानों का डोलोमाईट बहुत अच्छी किस्म का माना जाता है और दूर दूर तक इसकी मांग है मांग अधिक होने के कारण नियम को ताक को रख कर मनमाने तरीके से खुदाई की जा रही है औऱ जगह जगह खाई और खाई को पाताल लोक जैसी खुदाई की जा चुकी है पर इन स्वीकृत खदानों में न कभी विभाग के द्वारा निरीक्षण किया गया और न ही खदान चलाने हेतु क्या माप दंड है कभी जानना चाहा कभी इन पर किसी प्रकार की कार्यवाही की नही क्योंकि विभाग के पास टाइम ही नही है और उन्हें जो चाहिए वह सब समय समय मे उपलब्ध डोलोमाइट खदान संचालको के द्वारा पहुँचा जाता है। इस कारण से जंगल के अंदर क्या चल रहा है किसी को देखने की जरूरत और फुर्सत किसी के पास नही है। आश्चर्य तो यह जानकर हो रहा है कि जिनके हाथो में वन पर्यावरण संरक्षण की जबाबदारी है ऐसा विभाग अपने हाथ पे हाथ धरा बैठा हुआ है जबकि नियमानुसार जिन स्थानों से युक्त डोलोमाइट खदानों का खनन किया जा रहा है जहा पर एन जी टी की गाइडलाइन के अनुसार उन खदानों की स्वीकृति के पहले ही वन विभाग ओर कान्हा नेशनल पार्क में प्रबंधन को आपत्ति जतानी थी किन्तु धन के बजन कुछ ज्यादा होने के नियमों को दरकिनार करते हुए माफियाओं को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।




        संचालित इन डोलोमाइट खदानो से वन भूमि में लगे पेड़ो के आसपास लगातार 50 से 60 फीट की ब्लास्टिंग की जा रही है और डोलोमाइट निकाला जा रहा है इससे जंगलो के अंदर बसे ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ती जा रही है ओर खत्म हो रहा है पानी का स्रोत रुक रहा है व्रक्षो ग्रोथ इन डोलोमाईट खदानों की खुदाई से दर्जनों एकड़ भूमि हो चुकी है बंजर ग्रमीणों में बढ़ते प्रदूषण से बढ़ रहा है अनेक प्रकार के बीमारियों का खतरा, डोलोमाईट क्रेशर परिषर में नही लगाए पेड़ न कि गई है फेंशिग


          मंडला जिले में सरकार से स्वीकृत लगभग 43 गौण खनिज डोलोमाइट खदाने व क्रेशरों संचालित है जहाँ पर खादान संचालकों के द्वारा मनमानी और नियम विरुद्ध कार्य किया जा रहा है, वही लीज समाप्त खदानों से भी की जा रही है खुदाई, स्थानीय लोगों ने बताया की डोलोमाईट खादान और क्रेशर संचालकों की मनमानी इतना बढ़ गई है की नियम विरुद्ध लगातार रात दिन क्रेशर चालू रहते है प्रदूषण बोर्ड का बार-बार हवाला दिया जाता है पर क्रेशर मालिको ने प्रदूषण बोर्ड के नियमों धज्जियाँ उड़ा रहे है साथ ही इन डोलोमाईट क्रेशर से 4 से 5 किलोमीटर तक जंगल और जंगल के चारों तरफ सफेद धुंआ ही धुंआ छाया रहता है ग्रामीण परेशान है बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बड़े बड़े रात दिन ट्रकों से डोलोमाइट ले जाया जाता है जिस कारण ग्राम की रोड़ आये दिन खऱाब हो जाती है लोगों का निकलना भी दूभर हो चुका है जिस रोड़ में देखो वही सफ़ेद सफेद धूल उड़ती रहती है हम लोगो का भी स्वास्थ्य आये दिन इस उड़ रही धूल से खराब रहता है पर क्या करे कहा जाये सालो से दादा परदादा यही रहते आये है।

    आसपास की कृषि भूमि बंजर तपदील और जंगल के पेड़ पौधों का बुरा हाल...




     वही स्थानीय लोगो ने बताया है की जब से डोलोमाइट क्रेशर संचालित है तब से लेकर अब तक आसपास की दर्जनों एकड़ कृषि भूमि बंजर में तपदील हो गईं है यह भूमि फसल उगाने लायक नही बची और पेड़ पौधों का भी सर्व नाश हो रहा है अब इनके कारण तो पहले जैसे न जंगल बचा है और न इनमे रहने वाले जानवर भी नही रहे अब केवल खुदाई और क्रेशर की आवाज ही सुनाई पड़ती है। क्योंकि इन क्रेशरों से डस्ट इतना उड़ता है की परत दर परत जगह जगह जमता रहता है जिससे खेतो की नमी और उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है। क्रेशर के आसपास कोई फसल लगाया ही नही जा सकता है जबकि क्रेशर के आसपास खेती योग्य भूमि है खेत भी बने हुए है और फसल भी लगाई जाती है पर अंत मे किसान को इन खेतो से सिर्फ भूसा ही मिलता है साथ ही इन डोलोमाइट क्रेशरो से नदी नाले भी सुख रहे है जिनमे पानी है वो दूषित हो रहे है।

          डोलोमाईट क्रेशर संचालक जिला प्रशासन के सह पर नियमो की धज्जियाँ उड़ा रहे है। जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए है।


     डोलामाईट पत्थर के लालच में 40 से 50 फ़ीट ब्लास्टिंग कर समतल भूमि बना दिये खाई...और खाई से बनाई दी पाताल लोक


          आपको बता दे कि डोलामाईट वाले पत्थर निकालने के लालच में क्रेशर मालिकों ने स्थानीय लोगो के लिए अनेक प्रकार समस्या उत्पन्न कर चुके है सूत्रों की मुताबिक ग्राम भंवरताल में ब्लास्टिंग के कारण दूर-दूर तक पानी का स्रोत भी खत्म होता जा रहा है आसपास की पंचायत के कुछ सार्वजनिक कुआँ है जो पूरी तरह सूख चुके है स्थानीय लोगो ने ये भी बताया कि भवरताल और भवरताल से लगे ग्रामो में लगातार ब्लास्टिंग के कंपन कारण जंगल और कई घरों के दीवार पर भी हल्की फुल्की दरारे पढ़ गई है। डोलामाईट क्रेशर मालिक अपनी मोटी कमाई और मनमानी के चलते जंगल और हजारों लोगो के जीवन को संकट में डाल दिये है जानकारों के माने तो अगर इसी तरह लगातार ब्लास्टिंग हुई तो इस क्षेत्र में पानी का बेहद गहरा संकट पड़ जाएगा। स्थानीय लोगो ने बताया कि डोला माईट क्रेशर और खादान के आसपास वन भूमि में अनेको जगह से दूर तक जगह-जगह पर पत्थर निकालने के चक्कर मे खोद कर समतल भूमि को खाई में तपदील कर दिए है जिससे अनेक प्रकार की समस्या पैदा हो गई है और जंगल के पेड़ पौधों की बृद्धि रुक गई है हर जगह डोला माईट क्रेसर से उड़ रही सफेद धुंध सी दिखाई देती है और जगह जगह इन खाईयो में कई जंगली जानवर के साथ साथ गांवो की गाय बैल भी गिर चुके है ऐसे हुए खाई ओर गढ़ों बड़े बड़े हादसा होने की संभावनाऐ बनी रहती है ये भी देख गया है कि आस पास के नदी नाले भी सूखे पड़े हुए, जंगल के अंदर को जगह जगह खुदाई की जा रही और इन डोलोमाईट संचालको के द्वारा पेड़ पौधों काट-काट कर पूरा डोलो माईट पत्थर निकाला जा है। अब देखना होगा कि क्या विभाग में बैठे जिम्मेदार और जिला प्रशासन के द्वारा किस प्रकार की कठोर कदम उठाते हुए इन डोलोमाईट संचालको के ऊपर कार्यवाही की जाती है। या फिर ऐसा ही चलता रहेगा। वही पूर्व में एक तेज तर्राट आई ए एस कलेक्टर ने इन माफियाओं के खिलाफ़ मुहिम छेड़ी थी उस दौरान इन माफियाओं के खिलाफ भारी भरकम जुर्माना लगाया था लेकिन अपील के दौरान कलेक्टर आदेश की फाइल सचिवालय के किस कोने में पड़ी है इसकी सुध लेने की जिम्मेदार विभाग को फुर्सत नही है वही इन माफियाओं की राजनीति की पकड़ के चलते उक्त अधिकारी का महज एक माह ही में तबादला करवा दिया गया शायद यही वजह है कि जिला प्रशानिक तंत्र भयभीत रहता है जिस कारण से इन अबैध माफियाओं के हौसले बुलंद है।

No comments:

Post a Comment