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Monday, June 20, 2022

बच्चों के हालात की यह कैसी तस्वीर दम तोड़ती दो जिंदगी...




रेवांचल टाईम्स :आदिवासी बाहूल्य जिला मंडला के विकास खण्ड मवई में कहते हैं बच्चे हमारे कल के भविष्य हैं मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा है जरा सोचिए जिस घर में दो दो बच्चे खाट पर दम तोड़ रहे हो और सारा दिन माता पिता का समय उनकी देखरेख में कट रहा हो तो उस घर की हालत क्या होगी ?

मामला मवई जनपद के ग्राम पंचायत सहजपुरी का है जहां एक साथ दो बच्चे विकलांगता की श्राप लाचार जिंदगी जी रहे हैं दिन रात कराह रहे हैं पर आज तक नाही ग्राम सरपंच सचिव ना ही किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान इस ओर है ललित कुमार पिता सब्बल सिंह , जिसकी उम्र लगभग 19 वर्ष है हेमलता पिता सबल सिंह जिसकी उम्र लगभग 18 वर्ष है दोनों ही जन्म से विकलांग हैं और खाट पर ही उनका सारा जीवन कट रहा है ताज्जुब की बात यह है कि इन दोनों नौनिहालों को सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है यह दोनों अबोधबालक बेसहारा भूख प्यास और धूप के साथ रिश्ता बनाए जीवन काट रहे हैं इन दोनों मासूमों के लिए यह खाट ही उनका सारा जीवन बन गया है सरकार बच्चों के कल्याण की बात तो करती है  बचपन बचाने की भी बातें खूब होती है पर यह क्या इन बच्चों को ना पेंशन मिला ना राशन मिला शिक्षा की बात तो दूर इन बच्चों का एक-एक दिन बरसों में बीत रहा है ?

      एक काला सच

इन बच्चों के हित में काम करने के लिए सबसे पहले तो ग्राम पंचायत है महिला बाल विकास है बाल अधिकारिता संरक्षण आयोग है बाल कल्याण समिति है किशोर अधिनियम भी है तो बच्चों की सुरक्षा की बात करने वाले कई एनजीओ तब सवाल यह पैदा होता है कि आखिर देश का ननिहाल यह बचपन इतना बदहाल क्यों है वर्ष 2000 से किशोर न्याय बालकों की देखरेख व संरक्षण आदर्श नियम 2006 2015 और 2016 अधिनियम प्रभाव में है या नहीं मुझे ज्ञात है कि इन नियमों के आधार पर बालकों से जुड़ी सभी समस्याओं का न्यायिक एवं आर्थिक समाधान हो सकता है ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कई बच्चे हैं जो आज भी उपेक्षित हैं जिन्हें सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है ?

               ललित और हेमलता का राशन मिलना हुआ बंद_

    _आपको बता दें कि पिछले 1 वर्षों से इन दोनों बच्चों के नाम से जो राशन मिल रहा था उसे भी सहकारिता विभाग के द्वारा बंद कर दिया गया और दोनों का नाम राशन कार्ड से हटा दिया गया कई प्रयास के बाद भी नाही पंचायत ने ध्यान दिया और ना ही राशन की दुकान!  संबंधित अधिकारी कर्मचारियों को इन बच्चों के संरक्षण के लिए सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा विकलांग बच्चों के प्रबंधन एवं संरक्षण के लिए संबंधित अधिकारियों को बहुत जल्द संवेदनशील होना होगा ?

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