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Thursday, May 12, 2022

कम लागत में अधिक मुनाफे के लिए करें प्राकृतिक खेती - हर्षिका सिंह कलेक्टर ने जिला स्तरीय कार्यशाला को किया संबोधित

मण्डला 12 मई 2022

कलेक्टर हर्षिका सिंह ने भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति पर आधारित जिला स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुई। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व एवं तरीके की जानकारी देने के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित भी किया। श्रीमती सिंह ने कहा कि प्रदेश के साथ-साथ जिले में भी उर्वरकों की ज्यादा खपत चिंताजनक है। उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी की गुणवत्ता के साथ-साथ उपज को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि कम लागत में अधिक मुनाफे के लिए प्राकृतिक खेती सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। कलेक्टर ने कहा कि प्राकृतिक खेती बहुउद्देशीय होती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में कम उर्वरक, मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार फसल का चयन, उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम प्रयोग किया जाता है। श्रीमती सिंह ने कहा कि जिले में लगभग 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है जिसमें लगभग 2500 किसान जुड़े हैं। पूर्व में एनजीओ एवं अन्य संगठन भी प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जिले के किसानों से अपील की है कि प्राकृतिक खेती के तरीके को अपनाएं। अपनी खेती का कुछ हिस्सा प्राकृतिक खेती के लिए उपयोग में लाएं। प्राकृतिक खेती से फायदा होने पर रकबे को धीरे-धीरे बढ़ाएँ।

कलेक्टर ने कहा कि प्राकृतिक खेती में मौसमी बदलाव से बचाव के तरीके भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जिले के सभी 9 ब्लॉकों में लगभग 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्लस्टर स्तर पर पंचायतें तथा किसानों को चिन्हित करते हुए जिले में प्राकृतिक खेती के रकबे को बढ़ाया जाएगा। श्रीमती सिंह ने प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन एवं धरातल पर वास्तविक क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों का समन्वित प्रयास आवश्यक बताया। कलेक्टर ने कहा कि सभी विभाग सक्रिय रूप से समन्वय बनाते हुए निचले स्तर पर प्राकृतिक खेती को लोकप्रिय बनाएं। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में कृषि क्लब का गठन भी किया जाएगा जिसमें किसानों के अनुभव, फीडबैक तथा महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विचार करते हुए प्राकृतिक खेती को और बेहतर बनाया जाएगा। श्रीमती सिंह ने कहा कि आगामी मौसम को देखते हुए कृषि के तरीके एवं फसल उत्पादन के बारे में नवाचार करें।

 

नगदी फसलों की खेती करें, आर्थिक लाभ कमाएँ

 

                कलेक्टर ने कहा कि जिले में विगत वर्षों से धान का रकबा बढ़ा है। विगत एक-दो सालों से जिला एवं संबंधित विभाग द्वारा कोदो-कुटकी, रामतिल, अरहर एवं अन्य नगदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को अब खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ नगदी फसलों के उत्पादन पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि सभी किसान मृदा परीक्षण के परिणामों के अनुसार भी फसल, सिंचाई एवं उर्वरक का चयन कर सकते हैं।






                श्रीमती सिंह ने कार्यशाला में उत्पादक समितियों के पास उपलब्ध बीज भंडारण की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि उत्पादक समितियां आगामी एक सप्ताह में बीज उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि किसानों को समय पर बीज की आपूर्ति की जा सके। कार्यशाला में उपस्थित श्री अविनाश ने प्राकृतिक खेती के फायदे, तरीके एवं प्राकृतिक खेती से महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा की। कार्यशाला में पीपीटी के आधार पर विस्तृत रूप से प्राकृतिक खेती की जानकारी दी गई। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विशाल मेश्राम ने प्राकृतिक खेती के संबंध में अपने विचार रखे तथा उपस्थित अधिकारियों एवं समिति के सदस्यों की शंकाओं का समाधान किया। कार्यशाला में उपसंचालक कृषि मधुअली, सहकारिता, कृषि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, विभिन्न समितियों के सदस्य तथा संबंधित 

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