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Tuesday, May 31, 2022

बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान प्रकिया सम्पन्न.....






रेवांचल टाइम्स - मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग की आत्मनिर्भर भारत योजनांतर्गत पायलट आधार पर बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान का शुभारंभ दिनांक 26 जनवरी 2021 को शासकीय पशु चिकित्सालय कान्हीवाड़ा, जिला सिवनी में किया गया। इसके अंतर्गत 30 अप्रैल 2022 तक 807 बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान का कार्य किया जा चुका है तथा इससे 261 बच्चों का जन्म हो चुका है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत बकरी के चार नस्लों जमुनापारी, बारबरी, बीटल एवं सिरोही के सीमेन स्ट्रा का उपयोग किया जा रहा है। उपरोक्त प्रोजेक्ट को गति देने हेतु उचित मार्गदर्शन विभाग द्वारा मिलता रहा है। डॉ ए पी गौतम, संयुक्त संचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, संभाग जबलपुर द्वारा प्रोजेक्ट का कई बार निरीक्षण किया गया तथा डॉ जे पी शिव, उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, सिवनी द्वारा सतत् निरीक्षण एवं मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है इस प्रोजेक्ट का भौतिक सत्यापन जिला कलेक्टर सिवनी द्वारा भी किया गया है।


बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी..


बकरी को गरीबों की गाय कहा जाता है यदि पशुपालकों को अच्छे नस्ल के बकरे के बच्चे कम खर्च में बकरी से प्राप्त होते हैं तो पशुपालकों की आमदनी में बढ़ोतरी होती है।


कृत्रिम गर्भाधान एक ऐसी तकनीक है जिसके माध्यम से अच्छे एवं चयनित बकरों के वीर्य का उपयोग कर बकरी उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान का कार्य अधिकांशत शिक्षण संस्थानों में होता रहा है परंतु यह प्रथम बार है जो कि मध्यप्रदेश में फील्डस्तर पर डॉ पीताम्बर इनवाती द्वारा शासन के आदेश अनुसार संचालित किया जा रहा है। अच्छी नस्ल के बकरों से एक बार में एक ही बकरी को गाभिन किया जा सकता है परंतु इस विधि के माध्यम से एक बकरे के वीर्य से 15 से 20 बकरियों को गाभिन किया जा सकता है साथ ही बकरियों में जननेन्द्रिय संबंधित बीमारियों की रोकथाम पहले से ही की जा सकती है।


इस विधि में संरक्षित हिमीकृत वीर्य का उपयोग किया जाता है। वीर्य संरक्षण तकनीक से हिमीकृत वीर्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है तथा इसका दूसरा पहलू यह है एक अच्छी नस्ल के बकरे का वीर्य एक राज्य से दूसरे राज्य में आसानी से आदान प्रदान किया जा सकता है, इस प्रकार कम खर्च में एक अच्छी नस्ल की बकरी के बच्चे को पैदा किया जा सकता है।


बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखना जरूरी है। गाभिन बकरियों की पहचान करना, प्रजनन योग्य खाली बकरियों का पता करना तथा गर्भाधान के सही समय का पता करना।


 नर बकरे के माध्यम से बकरियों में गर्मी का निरीक्षण किया जा सकता है गर्मी में आई बकरियों की मुख्य पहचान उसके द्वारा बार-बार पूंछ को हिलाना, बेचैन होना, दाना चारा कम कर देना, बार बार पेशाब करना, झुंड में दूसरी बकरियों पर चढ़ना, बकरे को संभोग के लिए स्वीकृति देना, योनि मार्ग से पारदर्शी योनि द्रव्य का स्त्राव होना तथा बार-बार चिल्लाना इत्यादि।


जो बकरी शाम को गर्मी में आए उसे दूसरे दिन सुबह अथवा शाम में कृत्रिम गर्भाधान कराना चाहिए। इसी प्रकार जो बकरी सुबह के समय गर्मी में आए उसे शाम अथवा अगले दिन सुबह कृत्रिम गर्भाधान करा सकते हैं।


                  डॉ पीताम्बर इनवाती


 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, पशु चिकित्सालय कान्हीवाडा़, जिला सिवनी,(म.प्र.)


अखिल बन्देवार एंव संतोष बन्देवार के साथ रेवांचल टाईम्स की एक रिपोर्ट

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