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1 जून से 30 जून 2022 मनाया जाएगा ’मलेरिया निरोधक माह’ - revanchal times new

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Monday, May 30, 2022

1 जून से 30 जून 2022 मनाया जाएगा ’मलेरिया निरोधक माह’




मण्डला 30 मई 2022

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रत्येक वर्ष का जून माह मलेरिया निरोधक माह के रुप में मनाया जाता है। भारत में जून के महीने में मानसून की शुरुवात होती है। मानसून के शरुवात होते ही मच्छरों की संख्या एवं घनत्व में भी वृद्धि होने लगती है। इसमें आवश्यक है कि हम मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को लेकर जागरुक रहें। इन बीमारियों में -मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया शामिल है। भारत में मानसून की शुरुवात से बारिस समाप्ति तक इन बीमारियों के बढ़ने के ज्यादा आसार होते हैं। इन बीमारियों से निपटने के लिए जन जागरुकता एवं जन समुदाय की सक्रिय सहभागिता को सफल बनाने हेतु प्रत्येक वर्ष जून माह को ’मलेरिया निरोधक माह’ के रुप में मनाया जाता है, जिससे मच्छर जनित रोगों के संक्रमण को कम कर इन पर विजय पाया जा सकंे।

इस वर्ष भी दिनांक 1 जून से 30 जून 2022 मलेरिया निरोधक माह के रुप में मनाया जाएगा, जिसके अंतर्गत कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए विभिन्न गतिविधियाँ शामिल की जाएगी जैसे अंर्तविभागीय कार्यशाला, ग्राम एवं ग्राम पंचायत स्तर पर एडवोकेशी, ग्राम की प्रमुख दीवारों पर नारे लेखन कार्य आदि किया जाना है। मलेरिया निरोधक माह के अंतर्गत जिले के मलेरिया प्रभावित हाई रिस्क 04 ग्रामों में दिनांक 16 जून 2022 से प्रथम चक कीटनाशक छिड़काव कार्य प्रारंभ किया जावेगा। साथ ही मच्छरजन्य रोगों के नियंत्रण, रोकथाम, बचाव एवं उपचार का स्थानीय लोगों में ग्राम स्तर तक व्यापक प्रचार प्रसार एवं जानकारी के साथ मच्छरदानी के उपयोग एवं मच्छरजन्य परिस्थितियों को रोकने हेतु कूलर, गमले, मटके, टायर, टंकियों इत्यादि में रुके पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलने एवं लार्वा विनिष्टीकरण की जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा विशेष रुप से दी जाएगी।      मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलाया जाता है, जो कि मलेरिया परजीवी के कारण होता है। मलेरिया परजीवी भारत में मुख्यतः दो प्रकार के पाये जाते हैं - प्लाज्मोडियम वाइवेक्स एवं प्लाज्मोडियम फैल्सी फेरम, जिसे मस्तिष्क ज्वर मलेरिया परजीवी के नाम से भी जाना जाता है जो सर्वाधिक खतरनाक होता है। मादा एनाफिलीज को नाइट बायटिंग मच्छर भी कहा जाता है। जो सामान्यतरू शाम एवं भोर बेला के बीच काटता है। यह मच्छर रुके साफ पानी में अंडे देता है। अंडे से मच्छर 9 से 11 दिन में बन जाता है।

अतः यह आवश्यक है कि घरों के आस-पास सफाई रखें, अनावश्यक पानी जमा न होने दें। घरों की छत पर रखें अनुपयोगी वस्तुएं जैसे डिब्बे, फूलदान, टायर, बर्तन दत्यादि की नियमित रुप से सफाई करें, उन्हें इस प्रकार रखें कि उनमें पानी न जमा होने पाये। पानी के बर्तन, टंकी को ढककर रखें। सोने के लिए हम मच्छरदानी का उपयोग करें, घरों में मच्छर निरोधक जालियों, मच्छर निरोधी क्रीम, कॉइल का उपयोग करें। अपने घरों में मच्छर निरोधक पौधे जैसे- लेमन ग्रास, लहसुन, लेवेंडर, गेंदा, तुलसी, सिट्रोनेला इत्यादि लगावें। कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। अतः बुखार आने पर तुरंत खून की जाँच कराएं और अगर जॉच में मलेरिया पाजिटिव निकलता है तो चिकित्सक, आशा, हेल्थ वर्कर द्वारा दिये गए पूर्ण उपचार लें।  मलेरिया निरोधक माह के अवसर पर जिले के आम जन, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिसकर्मी एवं जनप्रतिनिधि और मीडिया बंधुओं को ’जन समुदाय की सकिय सहभागिता एवं स्वच्छता ही मलेरिया, एवं डेंगू नियंत्रण का एक प्रभावी उपाय है’। अतः आप सभी इन मच्छर जनित रोगों के नियंत्रण, उन्मूलन को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दें।


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