मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयेाग ने पुलिस अभिरक्षा में आरोपी/बंदी द्वारा आत्महत्या कर लेने से उसकी मृत्यु हो जाने के मामले में मृतक आरोपी/बंदी के वैध वारिसों को पांच लाख रूपये दो माह में अदा करने की अनुशंसा राज्य शासन को की है। मामला नरसिंहपुर जिले का है। आयोग के प्रकरण क्र. 3940/नरसिंहपुर/2020 के अनुसार एक अगस्त 2020 को पुलिस चौकी बरमान, थाना सुआतला, जिला नरसिंहपुर में पुलिस अभिरक्षा में आरोपी/बंदी नारायण लड़िया द्वारा टाॅयलेट क्लीनर (एसिड) पी लेने के कारण अगले ही दिन (दो अगस्त 2020 को) उसकी मौत हो गई थी। मामले में आयोग ने पाया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों/पुलिसकर्मियों द्वारा घोर लापरवाही की गयी। इससे मृतक के जीवन जीने के अधिकार व उसके मानव अधिकारों का घोर उल्लंघन हुआ। राज्य शासन चाहे, तो यह क्षतिपूर्ति राशि संबंधित लोकसेवकों से वसूल कर सकता है। चूंकि इस मामले में विभागीय स्तर पर संबंधित पुलिस अधिकारियों/पुलिसकर्मियों को दण्डित किया जा चुका है, इसलिये आयोग ने इस संबंध में और कोई निर्देश या अनुशंसा नहीं की है। विस्तृत अनुशंसा में आयोग ने यह भी कहा है कि राज्य शासन पुलिस अभिरक्षा में स्थित बंदियों के लिये हायर सेंटर (अस्पताल में) रेफर किये जाने की स्थिति में उसे प्रायवेट अस्पताल में इलाज के लिये भर्ती कराये जाने और ऐसे प्रायवेट अस्पताल में होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति के संबंध में स्पष्ट नीति निर्धारित करते हुए दिशा-निर्देश जारी करें, क्योंकि बंदी के अभिरक्षा में होने से उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के संबंध में देखभाल का पूर्ण उत्तरदायित्व राज्य शासन का ही है और इस संबंध में ऐसी अभिरक्षा में बंदी या उसके परिजनों की इच्छा पर उसका इलाज प्रायवेट अस्पताल में नहीं कराया जा सकता है, जबतक कि इस संबंध में शासन या संबंधित न्यायालय की ओर से कोई स्पष्ट आदेश या अनुमति प्राप्त न हो। राज्य शासन यह भी सुनिश्चित करे कि पुलिस द्वारा पंजीबद्ध आपराधिक प्रकरण में यदि किसी व्यक्ति को अभिरक्षा में लिया जाता है, तो इस दौरान पुलिस चौकी या पुलिस थाने पर (विशेषकर रात्रि में) रखे जाने के दौरान उसकी व्यवस्था पुलिस के लाॅक-अप में ही की जाये और उसकी सुरक्षा के संबंध में पूर्ण सजगता और सतर्कता के साथ उसपर नजर भी रखी जाये, जिससे वह ऐसी अभिरक्षा के दौरान किसी भी तरह की जोखिमपूर्ण स्थिति में नहीं आ सके। उल्लेखनीय है कि नरसिंहपुर जिले में हुई इस घटना पर जबलपुर पुलिस जोन के तत्कालीन आईजी ने सुआतला थाना प्रभारी सहित बरमान चौकी के प्रभारी सब इंस्पेक्टर एवं कांस्टेबल और ड्यूटी आॅफिसर एएसआई को तत्काल निलम्बित कर दिया था। साथ ही तीन होमगार्ड सैनिकों की किट जमा करके उन्हें भी सेवामुक्त कर दिया था। मालूम हो कि इस मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जबलपुर पुलिस जोन तथा पुलिस अधीक्षक, नरसिंहपुर से तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा था।
Friday, April 8, 2022
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पुलिस अभिरक्षा में आरोपी/बंदी ने की आत्महत्या...आयोग की अनुशंसा - मृतक आरोपी/बंदी के वारिसों को पांच लाख रू दो माह में अदा करें
पुलिस अभिरक्षा में आरोपी/बंदी ने की आत्महत्या...आयोग की अनुशंसा - मृतक आरोपी/बंदी के वारिसों को पांच लाख रू दो माह में अदा करें
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयेाग ने पुलिस अभिरक्षा में आरोपी/बंदी द्वारा आत्महत्या कर लेने से उसकी मृत्यु हो जाने के मामले में मृतक आरोपी/बंदी के वैध वारिसों को पांच लाख रूपये दो माह में अदा करने की अनुशंसा राज्य शासन को की है। मामला नरसिंहपुर जिले का है। आयोग के प्रकरण क्र. 3940/नरसिंहपुर/2020 के अनुसार एक अगस्त 2020 को पुलिस चौकी बरमान, थाना सुआतला, जिला नरसिंहपुर में पुलिस अभिरक्षा में आरोपी/बंदी नारायण लड़िया द्वारा टाॅयलेट क्लीनर (एसिड) पी लेने के कारण अगले ही दिन (दो अगस्त 2020 को) उसकी मौत हो गई थी। मामले में आयोग ने पाया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों/पुलिसकर्मियों द्वारा घोर लापरवाही की गयी। इससे मृतक के जीवन जीने के अधिकार व उसके मानव अधिकारों का घोर उल्लंघन हुआ। राज्य शासन चाहे, तो यह क्षतिपूर्ति राशि संबंधित लोकसेवकों से वसूल कर सकता है। चूंकि इस मामले में विभागीय स्तर पर संबंधित पुलिस अधिकारियों/पुलिसकर्मियों को दण्डित किया जा चुका है, इसलिये आयोग ने इस संबंध में और कोई निर्देश या अनुशंसा नहीं की है। विस्तृत अनुशंसा में आयोग ने यह भी कहा है कि राज्य शासन पुलिस अभिरक्षा में स्थित बंदियों के लिये हायर सेंटर (अस्पताल में) रेफर किये जाने की स्थिति में उसे प्रायवेट अस्पताल में इलाज के लिये भर्ती कराये जाने और ऐसे प्रायवेट अस्पताल में होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति के संबंध में स्पष्ट नीति निर्धारित करते हुए दिशा-निर्देश जारी करें, क्योंकि बंदी के अभिरक्षा में होने से उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के संबंध में देखभाल का पूर्ण उत्तरदायित्व राज्य शासन का ही है और इस संबंध में ऐसी अभिरक्षा में बंदी या उसके परिजनों की इच्छा पर उसका इलाज प्रायवेट अस्पताल में नहीं कराया जा सकता है, जबतक कि इस संबंध में शासन या संबंधित न्यायालय की ओर से कोई स्पष्ट आदेश या अनुमति प्राप्त न हो। राज्य शासन यह भी सुनिश्चित करे कि पुलिस द्वारा पंजीबद्ध आपराधिक प्रकरण में यदि किसी व्यक्ति को अभिरक्षा में लिया जाता है, तो इस दौरान पुलिस चौकी या पुलिस थाने पर (विशेषकर रात्रि में) रखे जाने के दौरान उसकी व्यवस्था पुलिस के लाॅक-अप में ही की जाये और उसकी सुरक्षा के संबंध में पूर्ण सजगता और सतर्कता के साथ उसपर नजर भी रखी जाये, जिससे वह ऐसी अभिरक्षा के दौरान किसी भी तरह की जोखिमपूर्ण स्थिति में नहीं आ सके। उल्लेखनीय है कि नरसिंहपुर जिले में हुई इस घटना पर जबलपुर पुलिस जोन के तत्कालीन आईजी ने सुआतला थाना प्रभारी सहित बरमान चौकी के प्रभारी सब इंस्पेक्टर एवं कांस्टेबल और ड्यूटी आॅफिसर एएसआई को तत्काल निलम्बित कर दिया था। साथ ही तीन होमगार्ड सैनिकों की किट जमा करके उन्हें भी सेवामुक्त कर दिया था। मालूम हो कि इस मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जबलपुर पुलिस जोन तथा पुलिस अधीक्षक, नरसिंहपुर से तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा था।
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Revanchal Times Weekly News Paper

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