विभाग के कान तब खड़े हुए जब 31 मार्च को छपकाही गांव के वार्ड एक से लेकर 11 तक में कुछ मुर्गे-मुर्गियों और बत्तख की अचानक छटपटा कर मौत होने लगी। इस दौरान कई कौए भी मरे हुए पाए गए थे। जानकारी मिलने के बाद पशुपालन विभाग की टीम ने गांव जाकर जांच की। इसके बाद पटना से टीम बुलाकर पक्षियों का सैंपल लिया गया। जब इसकी जांच हुई तो बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। मामले की पुष्टि होने के बाद निदेशक पशुपालन पटना के निर्देश के बाद डीएम कौशल कुमार और एसपी डी अमरकेश के संयुक्त आदेश से रैपिड रेस्पांस टीम का गठन कर पक्षियों को मारने का काम शुरू किया गया। बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद एक से नौ किलोमीटर तक के सभी गांवों को चिह्नित करने के लिए टीम का गठन किया गया है जो इस दायरे में पक्षियों की गतिविधि पर नजर रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर एहतियाती कदम उठाएगी। इससे पहले छपकाही गांव को केंद्र मानते हुए इसके एक किलोमीटर के दायरे में सभी गांवों के मुर्गे-मुर्गियों को नष्ट करने के लिए पशुपालन विभाग ने चार टीम का गठन किया था।
विभाग के कान तब खड़े हुए जब 31 मार्च को छपकाही गांव के वार्ड एक से लेकर 11 तक में कुछ मुर्गे-मुर्गियों और बत्तख की अचानक छटपटा कर मौत होने लगी। इस दौरान कई कौए भी मरे हुए पाए गए थे। जानकारी मिलने के बाद पशुपालन विभाग की टीम ने गांव जाकर जांच की। इसके बाद पटना से टीम बुलाकर पक्षियों का सैंपल लिया गया। जब इसकी जांच हुई तो बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। मामले की पुष्टि होने के बाद निदेशक पशुपालन पटना के निर्देश के बाद डीएम कौशल कुमार और एसपी डी अमरकेश के संयुक्त आदेश से रैपिड रेस्पांस टीम का गठन कर पक्षियों को मारने का काम शुरू किया गया। बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद एक से नौ किलोमीटर तक के सभी गांवों को चिह्नित करने के लिए टीम का गठन किया गया है जो इस दायरे में पक्षियों की गतिविधि पर नजर रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर एहतियाती कदम उठाएगी। इससे पहले छपकाही गांव को केंद्र मानते हुए इसके एक किलोमीटर के दायरे में सभी गांवों के मुर्गे-मुर्गियों को नष्ट करने के लिए पशुपालन विभाग ने चार टीम का गठन किया था।

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