रेवांचल टाइम्स - पानी की इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर अगस्त 2019 में ‘जल जीवन मिशन’ की शुरुआत की थी। जिसका लक्ष्य 2024 तक हर घर तक साफ पीने का पानी मुहैया कराने का है। इस योजना के अंतर्गत हर व्यक्ति को 55 लीटर साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने की बात कही गयी है। जिसके लिए अगले पांच सालों में करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। जिसका 50 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जायेगा जबकि बाकि 50 फीसदी राज्य सरकारों को खर्च करना होगा। पर यदि पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो 1 अप्रेल 2017 में करीब 76.78 फीसदी ग्रामीणों को पीने का 40 लीटर या उससे ज्यादा पानी उपलब्ध था। यह आंकड़ा अप्रेल 2018 में बढ़कर 78.86 पर और अप्रैल 2020 में करीब 2 अंक बढ़कर 80.92 पर पहुंचा था। और यदि इस विकास दर को प्रति वर्ष 2 फीसदी माना जाये तो इस हिसाब से अभी भी साफ और निर्धारित मात्रा से वंचित 18 फीसदी ग्रामीण आबादी के लिए जरुरी जल व्यवस्था करने में कितने साल और लगेंगे मामला है राजधानी भोपाल के बैरसिया तहसील के ग्रामीण क्षेत्र में राजधानी भोपाल के ग्रामीण क्षेत्र में गर्माया जल संकट
पीने के पानी को दो से तीन किलोमीटर दूर से पानी भरते ग्रामीण
जल जीवन मिशन ठेकेदार समय पर नही कर रहे कार्य अधिकरियों की मिलीभगत से जल जीवन मिसन योजना चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट
ग्राम पंचायत चर्चा न्यूज़ पर देखिये गजेन्द्रसिंह सोलंकी गढ़ा की ग्राम पंचायतों की ग्राउंड रिपोर्ट
1 ग्राम पंचायत वीलखो में पानी की समस्या से जूझते ग्रामीण
2 ग्राम पंचायत बन्दरूआ के अर्धधुमकड जाती के बाजरो की बस्ती में न पानी है न लाईट हर महीने आ रहा विजली के विल
3 ग्राम पंचायत रतुआ रतनपुर में जलजीवन मिसन का काम अधूरा नही मिल रहा ग्रामीणों को नल से जल
4 ग्राम पंचायत खंडारिया के अर्द्ध धुमकड़ जाती के ग्राम हरिपुर में दो से तीन किलो मीटर से पानी लाते ग्रामीण
5 ग्राम पंचायत नायसमंद के ग्राम चौकन टोला में पीने के पानी से परेशान अर्धधुमकड जाती के बंजारा समाज के लोग लिहाज से 2024 तक 'हर घर नल से जल' का लक्ष्य हासिल करना एक सरकार के लिए एक टेढ़ी खीर है।

No comments:
Post a Comment