उज्जैन का तोपखाना इलाका मुस्लिम बाहुल्य है. यहां एक पुरानी तोप है, जिस पर रमजान के महीने में सुबह सहरी और शाम में इफ्तार के वक्त तोप चलाई जाती है. दरअसल सहरी और इफ्तार का वक्त बताने के लिए इस तोप का इस्तेमाल किया जाता है. 150 साल पुरानी इस तोप से धमाका करने के लिए एक बार में 100 ग्राम बारूद की जरूरत होती है. रमजान के पूरे महीने के दौरान करीब 3 किलो बारूद इस्तेमाल हो जाता है.
स्थानीय निवासी मोहम्मद मकसूद बताते हैं कि 150 साल पुरानी तोप आज भी तोपखाना क्षेत्र में मस्जिद में हमारे पास है. इस तोप का इस्तेमाल रमजान माह के दौरान किया जाता है और इसी के माध्यम से लोगों को सहरी और इफ्तार के समय की जानकारी दी जाती है. मोहम्मद मकसूद ने बताया कि एक वक्त था, जब तोप की आवाज से पूरे शहर के लोगों को इकट्ठा किया जाता था लेकिन अब बिल्डिंग्स बनने से आवाज की सीमा तय हो गई है. अब तोप के धमाके की आवाज 3 किलोमीटर तक जाती हैं.
बता दें कि उज्जैन का तोपखाना क्षेत्र बाबा महाकाल मंदिर से महज 500 मीटर की दूरी पर है, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं. यहां हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोग प्रेम और भाईचारे के साथ रहते हैं.

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