गुरु में और पारस-पत्थर में अन्तर है यह सब सन्त जानते हैं - स्वप्निल उपाध्याय.....
रेवांचल टाईम्स - पारस तो लोहे को सोना ही बनाता है,परन्तु गुरु शिष्य को अपने समान महान बना लेता है।संतोष वंदेवार कान्हीवाड़ा अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में पूज्य श्री गुरु जी के चरणों में समर्पित मेरे द्वारा लिखे गये कुछ शब्द धर्म सम्राट अनंत श्री विभूषित द्विपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के परम शिष्य राष्ट्र संत आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रज्ञानानंद जी का आज जन्म दिन है महाशिवरात्रि वर्ष १९७५ को सिवनी जिले के ग्राम सांठई में जन्म भागवत भूषण आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य श्री गुरु जी स्वामी प्रज्ञानानंद जी का हुआ । ज्ञातव्य है कि स्वामी प्रज्ञानानंद जी अपने पूज्य गुरू का संदेश जन जन तक पहुँचाने , त्रिपुर सुंदरी माता राजराजेश्वरी की सात्विक पूजा से जन जन को जोडने का संकल्प के साथ-साथ भारतवर्ष में ग्रामीण दूरस्थ अंचलों में वनवासियों के बीच धर्म जन जागरण के प्रचार प्रसार का नेतृत्व कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि पूज्य श्री गुरु जी का आश्रम गुरु कुटि गौ घाट, पोस्ट हिनोतिया थाना कान्हीवाड़ा में है, वही पूज्य श्री गुरु जी का संकल्प है श्री धाम वृंदावन में मणिपुरम में श्री विद्या की उपासना हेतु भव्य एवं दिव्य श्री लिंगम की स्थापना करना पूज्य श्री गुरु जी के इस संकल्प से आज पूरे भारतवर्ष में शिष्य गण एवं भक्तगण जुड़ रहे हैं।
पूज्य श्री गुरु जी जिला सिवनी जिले में स्वामी जी के हजारों भक्त और अनुयायी समाज सेवा के कार्य में जुटे हुये हेै स्वामी जी के शिष्य मंडल सैकडो युवक प्रतिवर्ष रक्तदान शिविर आयोजित कर विगत पाँच वर्षो से रक्तदान करने का पुनीत कार्य कर रहे है । अपने ग्राम सांठई तथा तहसील मुख्यालय केवलारी के महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात आप वैराग्य भाव से भावित होकर धर्म नगरी काशी पहुँच कर धर्म सम्राट ज्योतिष पीठ एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य जगत गुरू स्वामी श्रीस्वारूपानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में पहुँचे और गुरूचरणों की कृपा से आपने वेदो उपनिष्दों तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों का अनुशीलन किया अपना योग्य शिष्य जानकर पूज्य शंकराचार्य जी ने आपको शुभ मुहूर्त में काशी के गंगा तट पर सन्यास की दीक्षा देकर विश्व को धर्म संदेश देने का धर्मादेश दिया । गुरू के भाव को समझ कर जनमानस के मन में आध्यात्मिक भावों को जागृत करने के लिये आपने श्रीमद भागवत, रामायण एवं गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों अनुशीलन किया इन गुढ गं्रथों को आप सरल शब्दों में जनमानस के बीच आप मंत्र मुग्ध शैली में प्रवाहित कर सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में रत है । विशेष रूप से उल्लेनीय है कि आचार्य महामंडलेश्वर राष्ट्रसंत प्रज्ञानानंद जी आध्यात्म और धर्म की व्याख्या विज्ञान के साथ जोड़कर प्रभावीढंग से रखते है और यही कारण है शिक्षित युवावर्ग बडी संख्या में आपके अनुयायी है । आप श्री विद्या के अनन्य उपासक है श्री विद्या की साधना उपासना को ही आपने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है ।
सन्तोष बन्देवार के साथ रेवांचल टाईम्स की एक रिपोर्ट
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