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Saturday, March 12, 2022

चांद तक पहुंच गया इंसान, एक गांव ऐसा-जहां एंबुलेंस तक ऐसे पहुंचते हैं लोग

  




रेवांचल टाईम्स:इंसान चांद पर पहुंच गया है, लेकिन आज भी भारत में ही झारखंड राज्य के गुमला जिले का एक ऐसा गांव है जो देश में चल रहे विकास के तमाम वादों को झुठला रहा है. इस गांव की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर आप सदियों पीछे चले जाएंगे, जब सुविधाएं नहीं होती थीं और लोगों को अस्पताल या शहर जाने के लिए सोचना पड़ता था. आज भी झारखंड के गुमला जिले के इस गांव में विकास की बातें बेमानी हैं. प्रसव पीड़ा से कराह रही एक महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए उसके घर के लोगों को ऐसी जुगत लगानी पड़ी जिसकी तस्वीरें विचलित कर देने वाली हैं.

केंद्र और राज्य सरकार एक तरफ जहां आदिम जनजाति के लोगों के विकास के तमाम दावे करती है, तो वहीं एक तस्वीर इन वादों की पोल खोलने के लिए काफी है. गुमला जिले के अतिसुदूरवर्ती झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा पर बसा मिरचाईपाठ गांव में आज भी सड़क की सुविधा नहीं है. जिससे यहां के लोगों को काफी परेशानी होती है.

गुरुवार को मिरचाईपाठ गांव की फुलमनी को प्रसव पीड़ा हो रही थी. उनके परिजनों ने एंबुलेंस के लिए झारखंड हेल्पलाइन नंबर- 108 पर कॉल किया, लेकिन उस गांव तक सड़क नहीं होने का हवाला देते हुए हेल्पलाइन नंबर से एंबुलेंस भेजने में असमर्थता जताई गई. तब परिजनों ने ग्रामीणों के सहयोग से छत्तीसगढ़ हेल्पलाइन नंबर पर कॉल लगाया. जिसके बाद महिला को गांव से एंबुलेंस तक गेडुआ के सहारे कंधे पर उठाकर पहुंचाया गया. ऐंबुलेंस से फुलमनी को जशपुर अस्पताल ले जाया गया. जहां पीड़िता का सकुशल प्रसव कराया गया.

वहीं, जिले के डीसी सुशांत गौरव ने कहा कि गुमला के ग्रामीण इलाकों के लिए ममता वाहन हो या मामले से जुड़ी कोई अन्य समस्या उनको धीरे-धीरे ठीक किया जा रहा है. इस गांव को चिन्हित करते हुए सड़क के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों को जोड़ा जा रहा है.

इस गांव के लिए ये कोई नई घटना नहीं है. यहां कई बार मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं उपलब्ध हो पाती, जिसकी वजह से उनकी मौत भी हो जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि देश में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है लेकिन हमारे गांव की स्थिति बहुत खराब है. यहां सड़क है ही नहीं.


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