रेवांचल टाइम्स :इंदौर पुलिस के हत्थे चढ़े फर्जी जमानत देने वाले गिरोह से एक हजार मामले सामने आए है। आरोपियों ने जमानत राशि का दस प्रतिशत लेकर धोखाधड़ी से लेकर हत्या जैसे गंभीर अपराध के आरोपियों की फर्जी जमानत दी है। एक हजार मामलों की सूची पुलिस ने न्यायालय व जिला प्रशासन को सौंप जानकारी भी मांगी है। क्राइम ब्रांच के डीसीपी निमिष अग्रवाल के मुताबिक, सूचना के आधार पर पहले करण चावड़ा व चार साथियों को फर्जी जमानत देने के मामले में पकड़ा तो उनके पास से बड़ी मात्रा में तहसील कार्यालय की फर्जी सील व फर्जी ऋण पुस्तिका बरामद हुई थी। पता चला कि करण के चाचा प्रकाश के द्वारा गिरोह चलाया जा रहा है। फर्जी जमानत के मामले में कुछ दिन पहले ही प्रकाश को पांच साल की सजा हुई थी वह जेल में था। जेल से रिमांड पर लेकर पूछताछ हुई और आरोपियों के लिए काम करते हुए फर्जी जमानत देने के मामले में 10 आरोपी पकड़े गए।
पूछताछ में पता चला कि आरोपी इंदौर के साथ ही महू, सांवेर, उज्जैन व अन्य जिलों में भी फर्जी जमानत देने का काम लेते है। आरोपी की जितनी राशि की जमानत के दस्तावेज पेश करना होते उसका 10 प्रतिशत लेते थे। आरोपियों ने तहसील कार्यालय व तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों की फर्जी सील बना रखी थी जिसके जरिए खुद फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार करते थे।
डीसीपी अग्रवाल के मुताबिक, आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर एक हजार केस की सूची बनाकर न्यायालय व जिला प्रशासन को सौंंपी है। प्राथमिक जांच में पता चला कि आरोपियों ने पलासिया इलाके में हत्या की आरोपी महिला की फर्जी जमानत देेने के साथ ही मल्हारगंज इलाके में हुई लाखों की धोखाधडी के आंंधप्रदेश के निवासी युवकों की भी फर्जी जमानत दी है। हालांकि अभी न्यायालय से जानकारी मिलने का इंतजार है। साथ ही कुछ ऋण पुस्तिकाओं में जमीनों की जानकारी दर्ज है, उसकी सच्चाई जानने के लिए जिला प्रशासन को सूची दी है। दोनों जगह से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे कार्रवाई होगी। सभी की जमानत निरस््त कराने की भी कार्रवाई होगी। डीसीपी के मुुताबिक, गिरोह से जुडे 15-10 एजेंटों की भी जानकारी मिली है, उनकी तलाश की जा रही है।

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