रेवांचल टाइम्स: इंदौर. अनुकंपा नियुक्ति के तहत मिली नौकरी में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में सोमवार को कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने उज्जैन के पटवारी महेश देपन की करीब 33 लाख 82 हजार रुपए की संपत्ति राजसात करने के आदेश दिए हैं। 1997 में नौकरी लगने के बाद पटवारी ने वर्ष 2004 से 2010 के बीच पद का दुरुपयोग कर अवैध कमाई की थी। लोकायुक्त टीम ने 28 मार्च 2010 को उसके ठिकानों पर छापे मारकर करीब 51 लाख रुपए की संपत्ति होना पाया था, जबकि 2004 से 2010 के बीच महेश की वैध कमाई से करीब 17 लाख 6 हजार रुपए की संपत्ति होनी थी। विशेष लोक अभियोजक महेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने बताया, 2016 में आरोपी की अवैध संपत्ति राजसात करने के लिए कोर्ट में आवेदन पेश किया था, जिस पर सोमवार को विशेष न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने 33 लाख 81 हजार 908 रुपए की संपत्ति राजसात करने के आदेश दिए हैं। चतुर्वेदी अब तक 19 केस में भ्रष्टाचारियों की करीब 20 करोड़ की संपत्ति राजसात करा चुके हैं।
भ्रष्टाचार केस का ट्रायल भी विचाराधीन महेश के पिता पटवारी थे और 1992 में उनका निधन हो गया था। 1997 में महेश को पटवारी पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिली और वह उज्जैन जिले में विभिन्न स्थानों पर पदस्थ रहा। लोकायुक्त को वर्ष 2004 से 2010 के बीच पटवारी द्वारा अवैध कमाई करने से संबंधित शिकायत मिली थी। लोकायुक्त पुलिस ने उज्जैन में महेश के एक से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। महेश के खिलाफ संपत्ति राजसात के अलावा भ्रष्टाचार केस का ट्रायल अलग से विचाराधीन है। महेश की पत्नी मीना के नाम से दर्ज संपत्ति भी राजसात होगी।
ये संपत्तियां होंगी राजसात
1. घट्टिया जिले में 200 वर्गफीट का एक प्लॉट और गीता कॉलोनी उज्जैन में एक मकान : कीमत 19,85,960
2. एक ट्रक-ट्राला : कीमत 13,51,600
3. 12 बोर की दो नाली बंदूक : 25,000
4. छापे में मिली नकद राशि : 11,770 5. बैंकों में जमा राशि : 7,578
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