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Sunday, February 13, 2022

जिला शिक्षा केन्द्र बना भ्रष्टाचार और लूट का केन्द्र ए पी सी की मनमानी से चर्चाओं में है विभाग...


रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों का चारागाह बना हुआ है मंडला वही भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारियों पर नकेल कसने में लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण व्यूरो में आये दिन कार्यवाही कर रही है पर डर नाम की चीज नही दिख रहा है वही जिले से बाहर के वेंडरों को बुलाकर उनसे भारी कमीशन लेकर सप्लाई ऑर्डर देने का मामला सामने आया है। यह कोई पहला मामला नहीं है इसके पहले भी जिले के अधिकारी, कर्मचारी इस तरह का काम कर चुके हैं। बाहर के वेंडरों को सप्लाई ऑर्डर देकर उनसे भारी कमीशन ले रहे हैं, जबकि बाहरी वेंडरों से कम कीमत में वहीं सामग्री मण्डला के वेंडर सप्लाई कर सकते हैं, लेकिन यह सप्लाई ऑर्डर बाहरी वेंडरों को देकर घोटाला किया जा रहा है। व्यापारियों से इस विषय पर चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि मण्डला आदिवासी बाहुल्य जिला है जहां सरकारी अधिकारी कर्मचारी शासन की अनेक योजनाओं में लूट मचा रखी है, वहीं सरकारी सामग्री की सप्लाई बाहर के वेंडरों को देकर घोटाला किया जा रहा है। जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं है। मण्डला के व्यापारी कहां अपना व्यापार करने जायें।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को समग्र शिक्षा अभियान वार्षिक कार्ययोजना के अंतर्गत चिन्हित विद्यालयों में टैबलेट क्रय की स्वीकृति दी गई है जिसमें लाखों का घोटाला करने की तैयारी का मामला सामने आया है। सामग्री क्रय की कार्यवाही संबंधित विद्यालय की विद्यालय प्रबंधन एवं विकास समिति एसएमडीसी द्वारा किये जाने के निर्देश समग्र शिक्षा अभियान मप्र के द्वारा जारी किये गये हैं, लेकिन जानकारी सामने आई है कि टैबलेट क्रय करने का सिस्टम सेंटालाईट किया गया है। चिन्हित स्कूलों के शिक्षकों को बुलाकर टैबलेट देने से पहले उन्हें संबंधित फर्म के बिल थमा दिये

लेकिन उन्हें टैबलेट नहीं दिया गया है। जबकि टैबलेट शिक्षकों को स्वयं क्रय करने हैं। जानकारी ये भी सामने आई है कि शिक्षक दबी जुबान से विरोध कर रहे हैं, लेकिन खुलकर सामने आने से डर रहे हैं। कुछ शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत जो भी सप्लाई है उसे बाहर के सप्लायरों को ऑर्डर देकर क्रय किया जा रहा है। स्थानीय स्तर के व्यापारियों को काम न देकर बाहर की फर्मों को काम देकर भारी कमीशन खोरी का खेल लंबे समय से किया जा रहा है। टेबलेट क्रय की गाईड लाईन का नहीं हो रहा पालन

          वही निर्देश तो ये भी दिये गए

है कि क्रय की गई सामग्री का भौतिक

सत्यापन किया जायेगा साथ ही गुणवत्तापूर्णहोने पर ही टेबलेट मान्य किये जायेंगे। अब सवाल ये उठता है कि जब प्राचार्य क्रय नहीं कर रहे हैं तो उनकी गुणवत कौन तय करेगा? जबकि दिशा निर्देशों के तहत स्कूलों के प्राचार्य सामग्री का भौतिक सत्यापन क्रय की गई सामग्री के भौतिक सत्यापन के लिए विद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षक की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। टेबलेट का भौतिक सत्यापन विद्यालय की शैक्षिक समिति द्वारा किया जायेगा।


सामग्री का तकनीकी सत्यापन तकनीकी सत्यापन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा विकासखण्ड स्तर पर एक समिति गठित समिति की जाएगी। इस समिति में विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जिला ई गनेंस सोसाइटी के प्रतिनिधि तथा समग्र शिक्षा अभियान के ब्लॉक एमआईएस

कॉर्डिनेटर सम्मिलत होंगे। इनके द्वारा टेबलेट का तकनीकी सत्यापन किया जाएगा, गुणवत्ता पूर्ण होने पर ही टेबलेट मान्य किए जाएंगे। विद्यालय में प्राप्त सामग्री की भण्डार पंजी में स्टाक एंट्री की जाएं। 

      वही जिले में भ्रष्टाचार कम होने का नाम ही नही हो रहा है जबकि आये दिन समाचार पत्र और शिकायतें कर माध्यम से जिला प्रशासन और जिम्मेदारो को अवगत कराया जा रहा है फिर विभागों में किया गए अधिकारी और कर्मचारी के द्वारा किया गया भ्रष्टाचार छुपा नही है।

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