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Friday, February 4, 2022

होशंगाबाद-बाबई का नाम बदला, प्रदेश के कुछ और शहरों के नाम भी बदलेंगे




रेवांचल टाईम्स। राजधानी के हबीबगंज रेलवे स्टेशन (रानी कमलापति) और मिंटो हाल (कुशाभाऊ ठाकरे सभागार) के बाद केंद्र ने प्रदेश में दो शहरों के नाम बदलकर नए नाम रखे जाने को अपनी मंजूरी दे दी है। केंद्र की मंजूरी के बाद होशंगाबाद को अब नर्मदापुरम के नाम से पहचाना जाएगा। नर्मदा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित होशंगाबाद का नाम मालवा के पहले शासक होशंग शाह के नाम पर रखा गया था। ऐसे ही प्रसिद्ध पत्रकार और कवि माखनलाल चतुर्वेदी के नाम पर बाबई को माखन नगर के नाम से जाना जाएगा। माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म बाबई में ही हुआ था। बाबई होशंगाबाद जिले का हिस्सा है। शिवराज सरकार ने पिछले साल इन दोनों नगरों का नाम बदले जाने के संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भेजे थे। होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम और बाबई का नाम माखन नगर किए जाने के बाद प्रदेश के कुछ और शहरों के नाम बदले जा सकते हैं। इनमें रायसेन जिले का औबेदुल्लागंज, सुल्तानपुर, गौहरगंज, बेगमगंज, सीहोर जिले का नसरुल्लागंज सहित अन्य शहरों-कस्बों के नाम शामिल हैं। इन शहरों से नाम बदलने की मांग पहले से उठ रही है। इनमें से नसरुल्लागंज का नाम भेरूंदा करने की घोषणा मुुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 22 फरवरी, 2021 को कर चुके हैं। भोपाल नगर निगम परिषद वर्ष 2017 में शहर का नाम भोजपाल करने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेज चुकी है, जो लंबित है।
ऐसे ही विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रहते हुए रामेश्वर शर्मा ने ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरुनानक टेकरी करने की बात कही थी। सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने लालघाटी एवं हलालपुर का नाम बदलने की मांग की है। भोपाल जिला और इसके आसपास के शहरों पर नवाबी हुकूमत का बड़ा असर पड़ा है। नवाब परिवार के सदस्यों और उनके नजदीकी लोगों की जहां-जहां रियासत थी, उन शहरों के नाम बाद में उन्हीं के नाम पर रख दिए गए।
कुछ शहरों के पुराने नाम
- भोपाल को भू-पाल या भोजपाल।
- विदिशा को भेलसा या विदावती। - सीहोर को सीधापुर।
- ओंकारेश्वर को मांदाता।
- दतिया को दिलीप नगर।
- महेश्वर को माहिष्मति।
- जबलपुर को त्रिपुरी या जबालिपुरम।
- ग्वालियर को गोपांचल।

कैसे पड़े शहरों-स्थानों के नाम
भोपाल: परमार वंश के राजा भोज ने यहां 1000 ईस्वी से 1055 ईस्वी तक राज किया। शहर का नाम नवाब शासन से पहले भू-पाल था। इसलिए अब भोजपाल करने की मांग है।
लार्ड मिंटो हाल: वर्ष 1909 में भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड मिंटो भोपाल आए थे। उन्हें राजभवन में रुकवाया गया था, वे वहां की व्यवस्थाओं से नाराज थे। तब तत्कालीन नवाब सुल्तानजहां बेगम ने 12 नवंबर 1909 को लार्ड मिंटो से इस हाल की नींव रखवाई और उन्हीं के नाम पर नामकरण हुआ।
औबेदुल्लागंज: रायसेन जिले के औबेदुल्लागंज शहर का नाम भोपाल नवाब सुल्तानजहां बेगम के दूसरे पुत्र औबेदुल्ला खां के नाम पर है।
नसरुल्लागंज: नवाब सुल्तानजहां बेगम के पहले पुत्र नसरुल्ला खां को सीहोर जिले के भेरूंदा (नसरुल्लागंज) की जागीर देकर नामकरण किया था।
गौहरगंज: रायसेन जिले का तहसील मुख्यालय गौहरगंज का नाम भोपाल नवाब हमीदउल्लाह खां की बेटी आबिदा सुल्तान के नाम पर रखा गया है। उन्हें गौहर महल के खिताब से नवाजा गया था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनापत्ति जरूरी
रेलवे स्टेशनों, गांवों, कस्बों और शहरों का नाम बदलने के लिए सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत, राज्य सरकार को केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करना अनिवार्य है। एनओसी यह सुनिश्चित करती है कि जिले में रेलवे स्टेशन, हाईकोर्ट और विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों के नाम भी बदले जाएं।

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