रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला होने का सौभाग्य कहा जाए या दुर्भाग्य कारण जो भी हो पर आदिवासी वन रक्षक कर्मचारी के द्वारा आदिवासी बेरोजगार भूमि हीनों किसानों को ही लूटने में लगें हुए हैं। जिले भर में ऐसे बहुत से आदिवासी बेरोजगार गरीब किसान निवास करते हैं जिनके पास भूमि ना होने के कारण वे वन विभाग की भूमि में लम्बे अरसे से छोटी सी झोपड़ी बनाकर निवासरत हैं व कुछ भूमि में फसल पैदा कर अपना व अपने परिवार का ऊधर पोषण करते हैं। जिनको शासन द्वारा वन भूमि का पट्टा देकर वन ग्राम का दर्जा दिया गया हैं। वन भूमि का पट्टा दिए जाने के बाद वन ग्राम में रहने वाले आदिवासी किसान अपनी भूमि में मशीनों से समतलीकरण करवा कर जमीन को उपजाऊ बना रहे हैं। और इनको ग्राम पंचायत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिया गया हैं। वन ग्राम में निवास करने वाले आदिवासी लोगों के द्वारा वन भूमि का पट्टा प्राप्त होने के बाद पट्टा वाली भूमि से मिट्टी के ईट बनाकर प्रधानमंत्री आवास में उपयोग कर रहें हैं। कुछ वन ग्राम ऐसे हैं जहां वन ग्राम तक सड़क न बनने के अभाव पर ना ईंट ना रेत पहुंच पाता हैं, जिसके चलते वन ग्राम के निवासी शासन द्वारा मिले पट्टे की भूमि से मिट्टी से ईट बनाकर प्रधानमंत्री आवास में उपयोग कर रहें हैं। पर सम्बंधित वन रक्षक के द्वारा ईट बनाने की एवज में वन ग्राम में रहने वाले अनेक आदिवासी गरीबों से 03-03 हजार वसूले गए हैं। इसी तरह वन भूमि का पट्टा दिए जाने के बाद वन भूमि का पट्टा प्राप्त करने वाले आदिवासी गरीब किसान अपनी भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए जेसीबी मशीन से समतलीकरण करवा रहें थें। जिनसे भी एक आदिवासी वन रक्षक के द्वारा अपने बड़े अधिकारी को सूचना दिए बगैर लम्बी राशि वसूली गई हैं।
मामला मंडला जिले के अंजनिया रेंज का
उल्लेखनीय हैं कि मंडला जिले के वन
परिक्षेत्र अंजनिया जग मंडल (सा.) पूर्व सामान्य वन मंडल के अंतर्गत ग्राम पंचायत डुढ़का की वन ग्राम बघरोड़ी, पाड़रटोला में कुछ आदिवासी किसानों के द्वारा प्राप्त वन भूमि के पट्टे मिलने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना में उपयोग करने के लिए ईट बनाऐ जा रहे थें। वीट गार्ड मिल सिंह तेकाम के द्वारा ईट बनाने वाले गरीब आदिवासियों से यह कहकर अवैध वसूली की गई कि वन ग्राम की भूमि हैं ईट नहीं बना सकते। अगर आपको ईट बनाना हैं तो 05-05 हजार रुपए मुझे देना होगा। बेचारे गरीब भोले भाले आदिवासी के द्वारा वीट गार्ड वन रक्षक मिल सिंह तेकाम के डराने धमकाने व कार्यवाही ना करने के नाम से डरा कर वन ग्राम बघरोड़ी, पाड़रटोला के निवासी चरन सिंह मरकाम, दुबे सिंह कुलस्ते, भगत सिंह मरावी, अघ्घन सिंह धुर्वे, सुदन सिंह मार्को, पर्वत सिंह मरकाम, उक्त छः लोगों ने किसी तरह 03-03 हजार रुपया कहीं से व्यवस्था कर वीट गार्ड मिल सिंह तेकाम को दिया गया। इसी तरह आदिवासी किसान रतीराम मरावी के द्वारा वन भूमि के प्राप्त पट्टा की भूमि में जेसीबी मशीन से समतलीकरण कराया जा रहा था। जिससे भी वीट गार्ड मिल सिंह तेकाम के द्वारा जेसीबी मशीन को राजसात करने के नाम से डरा धमका कर 50 हजार रूपए की मांग की गई। किसान और वीट गार्ड के बीच में 30 हजार रुपए का सौदा तय हुआ, और आदिवासी किसान किसी तरह अपने पड़ोसी और अपने परिवारों से थोड़ा- थोड़ा रुपया लेकर इकट्ठा कर 30 हजार रुपया वीट गार्ड को दिया गया गया। जबकि वीट गार्ड
को चाहिए था कि ईट बनाने वाले और खेत समतलीकरण करने वाले को समझाइश देकर छोड़ देना था मगर वीट गार्ड के द्वारा गरीबों से अवैध रूप से डरा धमका कर राशि वसूली गई।
वन ग्राम के पीड़ितों ने जिला मुख्यालय में आकर की शिकायत
बता दें कि उक्त मामले को लेकर मंगलवार को जनसुनवाई के दिन वन ग्राम बघरोड़ी, पाड़रटोला के 50-60 पीड़ित आदिवासियों ने कलेक्टर और वन संरक्षक पादेन, वन मंडलधिकारी पूर्व/ पश्चिम सामान्य वन मंडल मंडला को लिखित शिकायत दिए हैं। देखना अब यह हैं कि सम्बंधित वीट गार्ड के विरुद्ध वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा क्या कार्यवाही होती हैं।इनका कहना
वन ग्राम बघरोड़ी पाड़रटोला में एसडीओ साहब जांच के लिए जाएंगे, अगर वीट गार्ड पैसा लिया हैं तो वापस दिला कर कार्यवाही की जाएगी।
कमल अरोरा वन संरक्षक पदेन,वन मंडलधिकारी पूर्व/पश्चिम सामान वन मंडल मंडला
शिव दोहरे की रिपोर्ट...
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