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Sunday, February 13, 2022

जिले में रेत माफिया का कहर, प्रधानमंत्री आवास हितग्राही एक ट्राली रेत के लिए है मोहताज...रॉयल्टी के नाम पर फर्जी रसीद देकर, सरकार को लगाया जा रहा है करोड़ों का चूना...




रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में इनदिनों माफ़ियाराज की बाढ़ सी आई हुई है, जहाँ मनमाने तरीके से रेत हो मुरम हो या सरकारी भूमि हो सब बिना अनुमति के खोद रहे है और विभाग केवल कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति कर अपना पलड़ा झाड़ रहे है और जिले के कुछ माफियाओं के वजह से भाजपा संगठन को बड़े स्तर पर राजनीति का हो सकता है नुकसान...

       मध्यप्रदेश के चाहेते मुखिया शिवराज सिंह चौहान भले ही कई मंचो से अपने भाषण में प्रदेश की जनता से वादा करते है कि भू.माफिया, रेत माफिया, शराब माफिया व अतिक्रमणकारी, अन्य माफियाओ के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करने की बात करते हो और उन्हें 10 फिट गड्ढे में गाड़ने की बात करते हो, परन्तु मुख्यमंत्री के इन वादों का असर जिले में उल्टा हो रहा है आज इनके ही पार्टी से जुड़े हुए नेता जनप्रतिनिधि इन अबैध कार्यो में लिप्त है और मुख्यमंत्री के द्वारा जनता से किये वादों पर कालिख पोतने का काम खुलेआम कर रहे है अक्सर देखा जा रहा है की खुद को जिले का रेत मालिक बताकर आदिवासी बाहुल्य जिले में भोले-भाले लोगो में भय और डर पैदा कर उनके जमीनों से रेत का अवैध परिहवन रात और दिन किया जा रहा है और उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में डर का माहौल पैदा करने की कोशिश लगातार की जा रही है ताकि बिना रुकावट अवैध रेत का परिवहन किया जा सके और खनिज विभाग भी कही न कही इनकी मदद कर रहा है क्योंकि ये जिले की समिति से जुड़े हुए जो है।


माफियाओ के फल-फूलने से भाजपा को बड़े स्तर पर हो सकता है राजनीति नुकसान...


       वही जिले के राजनीति पर पैनी नज़र रखने वाले बुद्धिजीवियों का कहना है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासी समुदायों में सरकार और संगठन के प्रति विश्वास पैदा कर मजबूत भरोसा कायम करने में काफी सफलता हासिल की है। लेकिन इन माफ़ियाराज के कारण अब अक्सर देखा जा रहा है कि आदिवासी मण्डला जिले में रेत माफिया, भू माफिया, शराब माफिया, और अतिक्रमणकारियों से सरकार और भाजपा संगठन की छबि धूमिल कर, सरकार और संगठन प्रति विश्वास को खत्म करने का काम रहे है जिसके चलते आदिवासी समुदाय के भोले-भाले लोगो में सरकार और भाजपा संगठन के खिलाफ एक आक्रोश पनप रहा हैं, अब धीरे धीरे लोगों में नफरत सी नजर आ रही है, लोगो का भरोसा सरकार में था वो अब खत्म होते दिखाई दे रहा है अगर सही समय सरकार और भाजपा संगठन इन रेत माफियाओ और भूमाफियाओं और माफ़ियाराज पर लगाम लगाने में सफल नही हुए तो इसका असर सीधे आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव और कई अन्य मोर्चो पर भी देखने को मिलेगा। क्योंकि जिले में केन्द्र सरकार की गरीबो की योजना जो कि हजारों की संख्या में पीएम आवास वाले हितग्राही व अन्य लोग भी रेत के लिए परेशान है क्योंकि रेत समय मे और उचित मूल्य में भी रेत नही मिल रही है, अगर गरीबो के मकान के लिए रेत मिल भी गई तो 4 से 7 हजार रुपये प्रति ट्राली मिलेगी वही रेत ठेकेदारों के द्वारा रॉयल्टी के नाम फर्जी रसीद दी जाती है जिसका मूल्य कभी 1000 रु, तो कभी 1500रु, तो कभी 2000रु, हर दिन मनमाने तरीके घटता बढ़ता रहता है इसलिए ऐसा होता है क्योंकि ये पैसा सरकार के खजाने में नही, रेत माफियाओं के खाजने में जाता है। और जिले से गोड खनिज लगातार सरकार को राजस्व का करोड़ो रुपये का चुना लगाया जा रहा है।


प्रधानमंत्री आवास के हितग्राही एक-एक ट्राली रेत के लिए है मोहताज...


वही आपको बता दे कि नगर से लेकर गांव गाँव मे रेत न मिलने से प्रधानमंत्री आवास समय पर नही बन पा रहे है जब कि जिले अधिकतर गांव कोई न कोई नदी के किनारे स्थित है पर जिले  रेत माफिया पीएम आवास के लिए एक ट्राली भी रेत नही निकालने दे रहे है। और वही जिले की रेत दूसरे अन्य जिलों में ट्रकों से दिन रात पहुँचाई जारही अवैध खदानों से लगातार मशीनों के माध्यम से निकाल कर रात दिन रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है अभी हाल ही में सूत्रों के मुताबिक खबर आई थी कि भुआ बिछिया क्षेत्र में कुछ पीएम आवास योजना के हितग्राहियों ने गॉव के किनारे स्थित नदी से भी रेत निकलना हो रहा है मुश्किल गाँव की नदी से केवल ट्रेक्टर से सिर्फ दो ट्राली रेत निकाले थे उसे लेकर रेत माफिया के पाले हुए गुंडों ने रात के अँधरे में उस गांव में दहशत फैलाने की कोशिश कर रहे थे। जिस लड़के ने नदी से हितग्राहियों के लिए रेत निकाला था उसे जेल भेजने और टैक्टर जप्त करवाने और मारने पीटने की 



 धमकियां दी जा रही थी। अगर इस तरह से रेत माफिया तांडव करने लगे तो पीएम आवास कैसे बनेंगे। पीएम आवास हितग्राही को हर सामग्री बाजार से खरीद कर लाना पड़ता है रेत ही जो गांव में या गांव के पास में स्थिति नदी नालों से मिल जाती है जिससे उस गरीब के पीएम आवास हितग्राही को थोडी सी आर्थिक मदद मिल जाती है। पर इन माफियाओ को ये भी मंजूर नही है इन्हें केवल अपनी ही जेब का ख्याल बना हुआ है। वही जिला प्रशासन और जिम्मेदारो ने इस ओर न देखने की कसम खा रखी है।

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