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Wednesday, January 5, 2022

जिले की शिक्षा व्यवस्था का जिम्मेदार कौन क्यो है जिम्मेदार मौन आज भी घासफूस की झोपड़ी में लग रहे है स्कूल...

रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिले की दुर्दशा का आखिर जिम्मेदार कौन है बड़े बड़े वादे करने वाले आखिर कहा है जो आज इन नोनिहालो अपनी मजबूरी किसे बताए ओर दिखाए आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी बैगा आदिवासी आज भी अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए मोहताज है इसका जिम्मेदार कौन जो झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर हैं नौनिहाल गांव की महिलाओं ने बच्चों के लिए झोपड़ी बनाकर पेश की मिसाल स्कूल भवन हो चुका है खंडहर में तब्दील स्कूल भवन की मांग करते करते थक चुके हैं ग्रामवासी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रवैये से हताश होकर गांव की महिलाओं ने बना डाली झोपड़ी...




आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में शिक्षा व्यवस्था के क्या हालात हैं जिसका अंदाजा इन तस्वीरों से लगाया जा सकता है। मामला करंजिया विकासखंड के सनगूढ़ा गांव का है जहाँ शिक्षा विभाग के अधिकारियों के रवैये से हताश होकर गांव की महिलाओं ने स्कूली बच्चों के लिए झोपड़ी बना दिया है क्योंकि स्कूल भवन खंडहर हो चुका है जो किसी भी वक्त धराशाई हो सकता है। ग्रामीणों की मानें तो स्कूल भवन के लिए उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अनेकों बार गुहार लगाई है लेकिन अधिकारियों ने उनकी सुध नहीं ली है।




खोखले सरकारी दावे




स्कूल चलें हम, सब पढ़ें सब बढ़ें, सर्व शिक्षा अभियान जैसे तमाम सरकारी दावों की पोल खोलती हुई ये तस्वीरें सेनगूढ़ा गांव के प्राथमिक शाला मुकद्दम टोला की है जहां स्कूल भवन की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है की वह किसी भी वक्त धराशाई हो सकता है। बीते दिनों जर्जर हो चुके छत का मलबा गिरने के कारण कुछ बच्चे गंभीर रूप से घायल भी हो चुके हैं लिहाजा शिक्षक व ग्रामीणों ने जर्जर हो चुके भवन में स्कूल संचालित न करने का फैसला लिया था जिसके बाद एक ग्रामीण के घर में ही स्कूल का संचालन किया जा रहा था।




शिकायतों के बाद ध्यान नहीं दे रहा न




चूंकि बच्चों की दर्ज संख्या 52 है और ग्रामीण के घर में पर्याप्त जगह न होने के कारण स्कूल का संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा था। इस दौरान ग्रामवासियों ने स्कूल भवन की मांग को लेकर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से अनेकों बार शिकायतें भी की लेकिन लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी जब अधिकारियों ने उनकी सुध नहीं ली तब हताश होकर गांव में स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बच्चों के लिए झोपड़ी बनाने का बीड़ा उठाया और करीब 70 महिलाओं ने एकजुट होकर दो दिनों में लकड़ी, बांस और घांसफूस के सहारे झोपड़ी बनाकर तैयार कर दिया।

1 जनवरी से स्कूल का संचालनझोपड़ी में ही किया जा रहा है जिसकी जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष सुशीला ने बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की अनदेखी और गांव के नन्हे मुन्हे बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें झोपड़ी बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है तो वहीं स्कूल में पदस्थ शिक्षक का कहना है की उन्होंने जर्जर हो चुके




स्कूल भवन की जानकारी अनेकों बार वरिष्ठ अधिकारियों को दी है बावजूद इसके हालत जस के तस बने हुए हैं। स्कूल में पढ़ने वाले छात्र पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी करना चाहते हैं और उन्होंने मीडिया के जरिये सरकार से स्कूल भवन बनाने की गुहार लगाई है। वहीं इस पूरे मामले मे सर्व शिक्षा अभियान विभाग के अधिकारी गोलमोल बातें कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं।




इनका कहना है

आपके द्वारा मुझे इस विषय की जानकारी लगी है मैं ब्लॉक शिक्षा समन्वयक अधिकारों को जाँच कराकर मामले की तष्तिकी के बाद कारवाही की जाएगी।

राघवेंद्र मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी डिण्डोरी।
file photo

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