रेत माफियाओं ने खोखला कर दिया बंजर नदी को नदी का अस्तिव है खतरे में तेजी से चल फल फूल राह है रेत का काला कारोबार... - revanchal times new

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Thursday, January 6, 2022

रेत माफियाओं ने खोखला कर दिया बंजर नदी को नदी का अस्तिव है खतरे में तेजी से चल फल फूल राह है रेत का काला कारोबार...




रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मुख्यालय से लेकर आस पास के ग्रामीण कस्बे से लेकर सभी ब्लाकों में अवैध रेत का कारोबार जम कर फल फूल रहा है।

     जिले में बहने वाली नदी बंजर का तो बुरा हाल है रेत माफ़िया गिद्ध की तरह नोच रहे है और दिन रात अबैध रेत का खनन करने में लगे है और इन्हें न तो पुलिस का डर है और न खनिज विभाग का इनके सामने तो प्रशासन क्या है कुछ समझ रहे है अब तो इन माफियाओं के सामने तो कार्यवाही करने को लेकर जिम्मेदार नतमस्तक नजर आ रहे है वही अंजनिया की सुर्पन नदी भुआ विछिया की बुडनेर नदी घुघरी की बुड़नेर दिन रात से मशीन और मजदूरों से पानी के अंदर से रेत निकाल रहे है जिससे जलीय जीवों को खतरा बना हुआ है पर किसी को क्या सब को अपनी जेब भरने की पड़ी हुई है, नदियों सूखने की कगार में है पानी का स्त्रोत कम हो रहा है पर जिससे इन अबैध रेत माफियाओं को क्या पड़ी है इन्हें तो केवल सोने जैसे रेत दिख रही आख़िर कितना दोहन कर दिन रात कमाने में लगे हुए है और लोगो को क्या परेशानी हो रही है सरकार की सरकारी राजस्व की हानि हो रही है, इससे किसी को क्या लेना देना जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाके की नदी नालों से रेत निकाल के आस पास अनेक जगह रेत के बिगर अनुमति के अवैध भंडारण देखे जा सकते है नदी से रात में रेत निकाल कर बाहर डंप किया जाता है और उसे फिर एक एक करके रेत को टेक्ट्रर ट्राली में बेची जा रही है, जबकि इन रेत माफियो के पास खनिज विभाग से रेत भंडारण करने के लिए कोई अनुमति नही है, रेत नदी नालों से निकला जा रहा है और बिना नम्बरों के टेक्टर ट्राली में बेचा जा रहा है, एक ही पर्ची से अनेकों बार रेत ढोकर लोगो तक पहुचाई जा रही और तो और जो पर्ची ट्रैक्टरों चालक के पास होती है वह रेत माफियाओं के स्वयं के द्वारा जारी की जाती है। जिससे सरकार की राजस्व को सीधे सीधे हानि पहुचाई जा रही है, जिला मुख्यालय से लेकर आस पास टेक्टर ट्राली में बिकने वाली रेत की कोई न जांच करने वाला है और न देखने वाला है साथ ही इन जगह जगह रेत का अवैध भंडारण करने वालो को कोई देखने वाला भी नही है, आखिर इस अवैध रेत का अवैध कारोबार को कौन दे रहा है संरक्षण? आखिर क्यों नही की जा रही है कार्यवाही? आखिर जिम्मेदार क्यो है मोन?? जबाबदार आखिर जबाब देने से क्यो बचते नजर आ रहे है? सवाल अनेक है लेकिन शायद जिले में इसका जबाब कोई नही दे सकता, जिसके कारण चोरी को रेत भी गरीब को 4 हजार रु से लेकर 6 रुपये तक कि ट्राली रेत खरीदना पड़ रहा है, यानी खुलेआम गरीबो से लूट, वाह रे सिस्टम, सच है लेकिन कडुआ है। गरीब हो गरीब हो रहा है और बड़े और बड़े हो रहे है शायद यही है अच्छे दिन जिसकी लाठी उसकी भैस और जिले के जनप्रतिनिधि ने तो कसम खा रखी की न हम कुछ करगें न बोलेंगे और कही न कही इन जनप्रतिनिधियों के संरक्षण भी इन माफियाओ को प्राप्त है।

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