-राहुल मिश्र ( वरिष्ठ पत्रकार)
----------
आदर्शमुनि त्रिवेदी चाचा नहीं रहे, यह खबर जैसे ही पता लगी मन विचलित हो गया। एक युग का अवसान हो गया। मुझे रह रहकर उनका वो बिंदास चेहरा याद आ रहा है, जो हर वक्त निर्भय और निर्भीक रहता था। वे वाकई हर जानने पहचानने वाले के लिए 'आदर्श' थे। एक नया संविधान लिख देना बड़े बड़े कानूनविदों के लिए टेढ़ी खीर है, लेकिन चाचा ने इस कार्य को बेहद सहजता से अंजाम दिया। मुझे याद है कि संविधान की 5 वीं अनुसूची से जुड़े एक मामले में बहस करते हुए आदरणीय चाचा जी ने तत्कालीन चीफ जस्टिस अनंग पटनायक की डिवीजन बेंच के समक्ष संविधान की जोरदार व्याख्या की। इसके दूसरे दिन ही हाईकोर्ट में कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में जस्टिस पटनायक ने आदरणीय चाचा जी की खुले मंच से सराहना की। जस्टिस पटनायक ने कहा-" संविधान के ऐसे वेत्ता मैंने अपने जीवन मे बहुत कम देखे और त्रिवेदी जी का संविधान का ज्ञान अतुलनीय है।"
वकीलों के लिए उनके दिल मे जो स्नेह, आदर था, वही पत्रकारों के लिए भी था। उनसे सम्बंधित किसी भी खबर के लिए शहर का कोई पत्रकार कभी भी परेशान नही हुआ। खबर के हर पहलू पर विस्तार से प्रकाश डालते हुये वे स्वयं अपनी कलम से समाचार लिखकर पत्रकारों तक पहुंचाते थे। हस्तलिपि ऐसी कि प्रिंटिंग मशीन फेल हो जाए। कागज पर एक एक अक्षर बेहद सुंदरता के साथ और करीने से। खास बात यह कि उनकी विज्ञप्ति के बाद पत्रकारों के पूछने के लिए कुछ नही बचता। कभी कोई पत्रकार उनके पास पहुंच जाता तो उसका वो स्वागत होता कि वह अभिभूत हो जाता।
खाने खिलाने में तो मेरी नजर में पूरे हाईकोर्ट में उनका सानी नहीं था। बस उन्हें पता चल जाए कि आज फलां वकील या पत्रकार का जन्मदिन है। आननफानन में केक, मिठाई, समोसे और न जाने क्या क्या मंगवाते और अपने ऑफिस या बार मे ही उसका जन्मदिन मनाते।
वकालत के व्यस्त प्रोफेशन में रहते हुए भी उन्होंने सामाजिक सरोकारों से हमेशा गहरा नाता बनाए रखा। खेरमाई मन्दिर के लिए तो वे देवदूत साबित हुए। प्राचीन, ऐतिहासिक मन्दिर को उन्होंने भव्य स्वरूप देकर शहरवासियों के दिल मे अपनी अमिट छाप छोड़ी।
ब्राह्मण समाज की एकता, कल्याण और विकास के लिए उनका समर्पण अविस्मरणीय रहा। कानून के साथ साथ वे कितने विषयों के ज्ञाता थे, यह तो दावे से नही कह सकता। लेकिन जब भी, जिस भी विषय पर उनसे चर्चा हुई, उनके ज्ञान के आगे नतमस्तक हुए बिना नही रह सका। आदरणीय चाचा जी की सबसे बड़ी खासियत थी, गरीब के दमन, अपमान पर खौल उठना। जब भी किसी को मदद की दरकार हुई, चाचा जी मसीहा बनकर सामने आए।
एक अद्भुत व्यक्तित्व, जो अब दोबारा कभी देखने नही मिलेगा। एक अनोखा ब्राह्मण, जिसके ज्ञान का सूर्य कभी नही ढला। एक बेहद काबिल वकील, जिसने हमेशा वंचित वर्ग की आवाज बुलंद की। एक ऐसा चेहरा, जिसकी आभा में अनेकों चेहरे चमके। एक ऐसा बुजुर्ग, जिसने हर बच्चे की पीर समझी। एक ऐसा इंसान, जिसे सिर्फ इंसानों से प्यार था। अलविदा, चाचाजी, आप हमेशा संस्कारधानी वासियों के दिलों में राज करेंगे।