रेवांचल टाईम्स - मण्डला जिले की आदिवासी बाहुल्यता को लेकर अधिकारियों द्वारा शासन-प्रशासन को मोटी रकम देकर आदिवासी जिलों की मांग करते हैं ताकि यहां के मासूम लोगों को एवज में शिक्षा,चिकित्सा,सड़क,बिजली, पानी,परिवहन और विकास के नाम पर अपना स्वयं का विकास कर सकें।जहां आज जिले के आला-अधिकारियों की कुर्सी यूपी,बिहार,महाराष्ट्र,बंगाल, छत्तीसगढ़,गुजरात तथा और अन्य जिलों के माफियाओं से भरा हुआ है।जो यहां आकर अपनी हिस्सेदारी बसूल कर भ्रष्टाचारीयों को संरक्षण देकर शासन-प्रशासन द्वारा सभी अवैध एवं फर्जीवाड़ा कर-करके जिला को बेचने की योजना बनाऐ बैठे है,क्योंकि शासकीय कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को यह मालूम है कि उनको आज यहां रहना है तो कल कहीं और जिसके चलते जितना जल्दी हो सके साम-दाम-दंड-भेद लगाकर जितना कमा सकें कमा लो।
सीईओ-सचिव ने लूट खाया जिले को
जिले में इस समय भ्रष्टाचार का आलम जोरों पर चल रहा है और जिसका मुख्य कारण आला-अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया जाना है।जनपद पंचायत मण्डला भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में बना हुआ जहां जनपद पंचायत सीईओ शैलेन्द्र शर्मा द्वारा भ्रष्टाचारियों को संरक्षण और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के मामले आये दिन सामने आ रहे हैं।ग्राम पंचायत सेमरखापा जिसमें अपनी भूमिका निभाई है साथ ही ग्राम पंचायत बिनैका,हिरदेनगर,औघटखपरी,जन्तीपुर,सकवाह,लिमरुआ,इमलीगोहान जनपद पंचायत मण्डला सीईओ के चहेते पंचायत है जिनका भ्रष्टाचार के मामले में सबसे पहले नाम आता है,जहां पर सरपंच ठेकेदारी,बगैर बिल-बाऊचर भुगतान,बगैर निर्माण कार्य राशि का आहरण, सिविल सेवा प्राधिकरण के दोषी सचिव,निर्माण कार्यों में बंदरबांट शासकीय राशि गबन-घोटाला जैसे एक से बढ़कर एक भ्रष्टाचार और गबन-घोटाला के मामले हैं जिसमें शिकायतकर्ताओं की सीईओ के सामने कतार बनी हुई है वहीं सीईओ शैलेन्द्र शर्मा जांच के नाम पर भ्रष्टाचारीयों के समक्ष अपने नुमाइंदे भेजकर अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त हैं तो जांच अधिकारियों का चोला पहनकर नुमाइंदे अपनी हिस्सेदारी बसूल कर रहे हैं।धीरे-धीरे हिस्सेदारी और संरक्षण इस कदर हावी हो गया है कि भ्रष्टाचार भी अपनी चरम सीमा पार कर चुका है।
सीईओ के संरक्षण में पनप रहा भ्रष्टाचार
जिले के विकास को लेकर सैंकड़ों जतन करने पर जब कभी सरकार द्वारा चन्द राशि आवंटित किया जाता है तो भूखे शेर की तरह भ्रष्टाचारीयों द्वारा उस राशि का कमीशनखोरी और हिस्सेदारी के नाम पर आपसी बंटवारा कर लिया जाता है।बंटवारा के बाद जो राशि बचता है उससे नाम मात्र का कार्य दिखाकर फर्जीवाड़ा के तहत विकास की मुहर लगा दिया जाता है।इसी भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा को लेकर जब ग्राम पंचायत सेमरखापा में सरपंच-सचिव द्वारा शासकीय राशि गबन-घोटाला किया गया जिसमें शिकायतकर्ता अजीत पटेल द्वारा सूचना का अधिकार के तहत मामले का खुलासा किया गया।खुलासा होने के पश्चात ग्रामीणों ने मामले में कार्यवाही को लेकर आला-अधिकारियों को सौंपा, परन्तु आपसी सांठ-गांठ कर सीईओ जनपद पंचायत मण्डला शैलेन्द्र शर्मा द्वारा भ्रष्टाचारीयों से आपसी समझौता कर फर्जी जांच नतीजा तैयार किया गया जिसमें शिकायतकर्ता एवं ग्रामीणों द्वारा न्यायालय में याचिका दायर किया गया जिसमें सरपंच अनीता उइके को दोषी ठहराया गया और लाखों रुपए के गबन-घोटाला का दोषी पाया गया जिसे राशि वसूली से दण्डित किया गया है।वहीं सचिव धरमदास बैरागी के निलंबन की प्रक्रिया चन्द घण्टों की कगार पर है।सीईओ शैलेन्द्र शर्मा के भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब उन्होंने फर्जी जांच अधिकारियों की नियुक्ति कर भ्रष्टाचारीयों को संरक्षण देने में अपनी अहम भूमिका निभाई,वहीं मीडिया कर्मियों द्वारा ग्राम पंचायत बिनैका में चल रहे निर्माण कार्यों की नियमावली के विपरित होने को लेकर शिकायत की गई जिसमें सीईओ ने जांच का आश्वासन देकर अपनी हिस्सेदारी बसूल कर मामले को रफा-दफा कर दिया और शिकायतकर्ता की सीएम हेल्पलाइन भी शिकायत निराकरण के वगैर काट दी गई।
सीईओ को न्यायालय में देना होगा जवाब
जनपद पंचायत मण्डला सीईओ शैलेन्द्र शर्मा द्वारा भ्रष्टाचारियों को संरक्षण एवं भ्रष्टाचार बढ़ावा का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है।शर्मा इसके पहले बीजाडांडी जनपद में पदस्थ थे जहां भ्रष्टाचार की सीमा पार हो चुकी थी जिसको लेकर वहां क्षेत्रीय लोगों द्वारा इनको हटाने को लेकर खुलकर विरोध किया गया वहीं उनकी कार्यशैली एवं कार्यप्रणालियों में बदलाव लाने को लेकर मण्डला जनपद में स्थानांतरण किया गया,परन्तु उनके भ्रष्टाचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं लिया और बढ़ता चला जा रहा है जिसमें उनके खिलाफ न्यायालय ने मामला पंजीबद्ध किया गया है जहां पहली पेशी 12/11/2021को थी,वहीं अगली पेशी 12/01/2022 को है।वहीं भ्रष्टाचार के मुख्य दोषीगण अपने बचाव के लेकर इनके पास आते हैं।सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार दोषियों का स्पष्ट कहना है कि हमारे द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को लेकर बचाव हेतु आला-अधिकारियों ने हमसे मोटी रकम बसूली है और आज उनके द्वारा यह साफ कह दिया गया है कि तुम फिक्र मत करो मैं बैठा हुं।
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