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Friday, November 5, 2021

विकास की गंगा, के समृद्धि की आशा में, आदिवासी जिले में आश्वासन नहीं विकास चाहिए...




रेवांचल टाईम्स - भारतवर्ष में निवासरत लगभग 15 करोड़ वनवासी जो प्रायः जंगलों में अथवा सुदूर स्थानों पर निवासरत है! स्वतंत्रता के 70 वर्षों के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है सड़क, स्वास्थ्य, पीने का पानी ,बिजली, शिक्षा, आदि साधनों के अभाव में उनका विकास अपेक्षा अनुसार नहीं हो पाया और यह अन्य नागरिकों की तुलना में पिछड़ गए ?



         वही मंडला जिले के अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायत घुघरी के ग्राम पंचायत पसवाह के पोशक ग्राम कुंडपानी आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में विकास से कोसों दूर है यह गांव पहाड़ के ऊपर बसा आदिवासी जनजातियों का एक कस्बा है जहां पर ना ही सीसी रोड बना है ना ही सड़क बनी है और ना पीने का पानी है और ना ही शिक्षा की विशेष गुणवत्ता    समस्याओं से घिरा यह वनवासी बाहुल्य गांव गर्मी के दिनों बूंद बूंद पानी के लिए तरस जाता है ?

 280 की आबादी और सिर्फ 3 लोगो को मिला प्रधानमंत्री आवास ?

प्रधानमंत्री आवास गरीबों के कल्याण और विशेषकर जनजाति समुदाय के उत्थान के लिए बनाई गई योजना है केंद्र सरकार दृढ़ संकल्पित है कि प्रधानमंत्री के नाम पर चलाई गई इस योजना से जमीन से जुड़े हुए आदिवासी लोगों को लाभ मिले परंतु कुंड पानी में 2011 में हुए सर्वे के अनुसार सिर्फ 3 परिवारों का ही नाम सूची में पाया गया बाकी पूरा गांव सूची से बाहर है यह स्पष्ट है कि सिर्फ 280 की आबादी वाले इस गांव में सिर्फ तीन लोगों को ही आवास दिया जा सकता है और सत्ता पर बैठे जवाबदार कर्मचारियों का भी यही कहना है कि सर्वे में जिन लोगों का नाम प्रधानमंत्री आवास से जुड़ा है सिर्फ उन्हीं लोगों को ही हम आवास दे सकते हैं ?

नहीं बने एक भी सीसी रोड

केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार के द्वारा एक शहर से दूसरे शहर एक गांव से दूसरे गांव को जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री सड़क, मुख्यमंत्री सड़क, ग्रेवल रोड ,सीसी रोड, आदि अनेकों  उपक्रम चलाई जा रही है परंतु यह गांव एक ऐसा गांव है जहां पर आजादी से लेकर आज तक एक भी सीसी रोड नहीं बनाई गई है स्कूल जाने वाले बच्चे, सरकार की योजनाओं से जुड़े साधन जैसे कि हंड्रेड डायल, मातृशक्ति जननी योजना, 108, एंबुलेंस, अग्निशामक ,आदि कोई भी वाहन का लाभ लोगों को नहीं मिल पाता  ?

गिरता हुआ शिक्षा का स्तर बच्चे दूसरे गांव जाने पर मजबूर?

कहा जाता है शिक्षा समाज की न्यू है और बच्चे हमारे भविष्य हैं परंतु इस गांव में प्राथमिक शाला भवन जर्जर स्थिति में है पहली क्लास से पांचवी क्लास तक यहां पर बच्चों की जनसंख्या 30 है परंतु मौके पर सिर्फ 11 बच्चे पाए गए अतिथि शिक्षक के माध्यम से जानकारी मिली की वही गांव की नीचे एक क्रिश्चियन स्कूल खोला गया है जहां पर यहां के आधा से ज्यादा बच्चे पढ़ने के लिए जाने लगे हैं यहां पर नहीं आते ग्रामीणों के द्वारा जानकारी मिली कि यहां पर प्रधान पाठक भी समय पर स्कूल नहीं जाते इस वजह से बच्चों को दूसरे स्कूल पर भेजना हमारी मजबूरी है ? 

बूंद बूंद पानी के लिए तरसते रहवासी

पहाड़ के ऊपर बसा यह गांव समस्या से ग्रसित तो है ही साथ ही यहां पर पीने के पानी की बहुत समस्या है पहाड़ के नीचे से महिलाएं पानी लेकर आती आते समय उनको बहुत बड़ी घाटी को चढ़कर ऊपर आना होता है जो उनके लिए एक गंभीर समस्या है ? 

      इनका कहना है

 सुरेश मरावी (ग्रामीण)

ग्राम पंचायत परसवाह के पोषक ग्राम कथईडीह के मोहल्ला है कुंडपानी यह हमारे पूर्वजों का बसाया हुआ गांव है हम और हमारा परिवार हमेशा यहां रहेगा हम सरकार से अपेक्षा करते हैं कि हमारी हर एक समस्या पर ध्यान दें और प्रशासन की हर एक मूलभूत सुविधाओं से हमें जोड़ें ताकि हम जनजातियों का विकास हो सके ?

लाल सिंह मरावी ( ग्रामीण)

हमारे गांव में ना ही सीसी रोड है ना कोई पक्की सड़क है प्रधानमंत्री आवास में हमारा नाम भी नहीं है और पूरा गांव छूट गया है हमें मूलभूत हर योजनाओं से जोड़े और लाभ दें ?

प्रेम सिंह मरावी( ग्रामीण)

मुझे प्रधानमंत्री आवास मिला है आवास के लिए मटेरियल लाने ले जाने में थोड़ी तकलीफ तो है परंतु लाया जा सकता है सरपंच सचिव के द्वारा यह कहा जाना उचित नहीं है कि वहां पर मटेरियल पहुंचाया नहीं जा सकता ?

     मायावती मरावी (ग्रामीण)

पीने के पानी इस गांव की सबसे बड़ी समस्या है हम महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर 2 किलोमीटर पानी लेने जाते हैं घर वापस आने तक आधा एक घंटा लग जाता है तब तक बच्चा परेशान हो जाता है बच्चे को लेकर पानी के लिए जाना संभव नहीं है इसलिए क्योंकि पहाड़ी के नीचे पानी के लिए जाना पड़ता है ?

ग्राम सचिवग्राम पंचायत परस्वाह*

     ग्रामीणों के द्वारा दी गई जानकारी सही है मैं भी मानता हूं कि वहां पर समस्या है 2011 में की गई सर्वे के अनुसार  3 लोगों को प्रधानमंत्री आवास से जोड़ा जा चुका है बाकी लोगों का नाम सूची में नहीं है इसलिए उन्हें आवास नहीं मिल पाया मटेरियल पहुंचाने में असुविधा के कारण हम वहां पर एक भी सीसी रोड नहीं बना पाए हैं आने वाले दिनों में नरेगा से हम वहां पर मुरूम डलवा कर के रोड को बनाने का प्रयास करेंगे ?

 

       रेवांचल टाईम्स से कन्हैया धारवैया की रिपोर्ट

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