रेवांचल टाइम्स --पचास वर्षों से आदिवासी वर्ग से अन्य पिछड़ा वर्ग में सामिल कर दिए जाने के कारण हर दृष्टि से पिछड़ता जा रहा पनिका समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के हाथों उनके 22 नवंबर को मंडला आगमन पर ज्ञापन सौपा है।
संगठन के जिला सचिव पी.डी.खैरवार ने बताया है,कि सोमवार 22 नवंबर को जिले के रामनगर में जनजातीय गौरव दिवस के समापन समारोह को संबोधित करने मुख्यमंत्री हैलीपेड जिला मुख्यालय मंडला पहुंचे हुए थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के हाथों पनिका समाज उत्थान एवं जनकल्याण समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा है।ज्ञापन में मांग की गई है, कि अन्य पिछड़ा वर्ग से हटाकर पूर्व की तरह अनुसूचित जनजाति में यथावत् लाया जाए।समिति के प्रदेश अध्यक्ष गणेश दास सोनवानी ने बताया है,कि तत्कालीन प्रदेश सरकार ने बिना कोई कारण बताए शहडोल,रीवा और सागर संभाग के पनिका जाति को छोड़कर सभी संभागों के पनिका जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग में लाकर खड़ा कर दिया था।जो आज भी है।जिससे इस जाति का सामाजिक,शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ापन भयानक रूप लेता जा रहा है। धर्मेंद्र धार्या ने यह भी बताया है,कि 1971 से वर्षों पूर्व से यह जाति आदिवासी वर्ग में सामिल रही है।जिसको बिना कोई खास कारण दर्शाए अन्य पिछड़ा वर्ग में लाकर खड़ा कर देना प्रदेश के लाखों परिवार के लिए बहुत बड़ा धोखा और अन्याय है।
ज्ञापन भेंट अवसर पर समिति के संरक्षक एन.डी.टांडिया, डिंडौरी से प्रांतीय अध्यक्ष गणेश सोनवानी ईश्वर दास,चंद्रप्रकाश बघेल,उत्तम दास,अनूपपुर से सूरज दास पारस, राजकुमार,मंडला जिलाध्यक्ष एड. धर्मेंद्र धार्या,जे.डी.बैरागी, संतोष दास धार्वैया,सोना दास मानिकपुरी,बब्बूदास मोंगरे, तुलसीराम पड़वार,कैलाश संत मुख्य रूप से सामिल रहे।
नैनपुर से राजा विश्वकर्मा की रिपोर्ट
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