महात्मा गांधी जी के लांजी आगमन के 88 वर्षों बाद भी लांजी नगर में गांधी जी की प्रतिमा का ना होना दुखद ... तपेश कालबेले.. - revanchal times new

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Saturday, November 27, 2021

महात्मा गांधी जी के लांजी आगमन के 88 वर्षों बाद भी लांजी नगर में गांधी जी की प्रतिमा का ना होना दुखद ... तपेश कालबेले..

 



रेवांचल टाईम्स - महात्मा गांधी मध्यप्रदेश में ... 28 नवंबर 1933 - लांजी बालाघाट.. हम लांजी क्षेत्र की जनता का अहोभाग्य था की इस कालापानी समझे जाने वाले जंगली गांव में हम सबके राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी जैसे देव पुरुष के चरण पड़े थे,

उनका आगमन 28 नवंबर सन 1933 में हुआ था उस समय गांधीजी दिल्ली से गोंदिया होते हुए कोलकाता जा रहे थे उनकी यात्रा हरिजन उधार आंदोलन के उद्देश्य थी काफी व्यस्त कार्यक्रम था गांधी जी को चरण भर की भी फुर्सत नहीं थी लांजी क्षेत्र की जनता महात्मा गांधी जी की एक झलक पाने को लालायित थे ग्राम कुमारी कला में एक कृषक परिवार में श्री नंदराम जी कालबेले के घर जन्मे स्वर्गीय श्री लक्ष्मण कालबेले जी ने महात्मा गांधी जी से लांजी पधारने का अनुरोध किया गांधी जी ने समय की गंभीरता का हवाला देकर उन्हें सप्रेम विदा किया किंतु स्वर्गीय श्री लक्ष्मण पटेल कालबेलिया जी पक्के हठधर्मिता वे लांजी आकर अनशन पर बैठ गए 21 दिनों तक निर्जला उपवास रखा जब यह सूचना गांधी जी को मिली उन्होंने अपना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम बदला सुबह लांजी आए एवं अपने हाथों से दूध पिला कर उन्होंने श्री लक्ष्मण पटेल जी कालबेलिया की प्रबल इच्छा को साकार किया स्वर्गीय श्री लक्ष्मण पटेल जी काल बेले बचपन से ही महात्मा गांधी के अनुयाई थे वे परम देश भक्ति उन्होंने हरिजनों को सदैव गले लगाया वे उनके साथ उठते बैठते खाते पीते थे उनके लिए ग्राम में पानी की व्यवस्था सवर्णों के कोर से की वह सवर्णों के कुए से अपने हाथ से पानी हरिजनों को भरवाते थे अंग्रेजों के कुर्ता मत या चारों को सोते हुए अनेकों बार जेल गए उन्होंने अपना तन मन धन सब कुछ देश को समर्पित कर दिया आजादी के पश्चात किरनापुर क्षेत्र के ग्राम आली टोला का जंगल उन्होंने सरकार को दान स्वरूप दिया निष्काम भाव के सहृदय देश भक्त थे झूठी हवा हवाई के पक्षधर नहीं रहे आज स्वार्थ और पद लोलुपता के परिवेश में उनकी याद आती है  हम सभी गणमान्य नागरिकों नेताओं अधिकारी गणों और विशेषकर लांजी सरपंच के माध्यम से शासन से अपील करते हैं कि ऐसे निस्वार्थ देशभक्त त्यागी और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ मरते दम तक लड़ने वाले उस परम आदर्श की स्मृति में कोई चिन्ह लांजी क्षेत्र के लांजी ग्राम को दें ताकि गांधी जी के लांजी आगमन के साथ स्वर्गीय श्री लक्ष्मण पटेल जी कालबेलिया के त्याग को आने वाली पीढ़ी याद रखें और उनके दिलों में देश प्रेम की जोत हरदम प्रकाशित रहे... परम पूज्य महात्मा गांधी जी ने अनेकों कष्ट सहन करते हुए लांजी सरीखे ग्राम में आकर यहां की जनता को कृतार्थ किया था , आप हमारे लिए ही नहीं सारे विश्व की विभूति हैं, गांधीजी के लांजी आने पर जो कार्य जनहित में खासकर हरिजनों के लिए हुए उनमें से 1 लांजी ग्राम में 3 खर्च की कोई और कुमारी में एक खाजगी कुआं हरिजनों के लिए खोले गए 2 लांजी ग्राम में तीन मंदिर और कोटेश्वर स्थान का एक प्रसिद्ध मंदिर हरिजनों के लिए खोले गए थे तब से आज तक वहां पर हजारों महाकाल भक्तों का तांता लगा रहता है.. अनेकों बार शासन प्रशासन से लांजी में महात्मा गांधी जी  एवं स्वर्गीय श्री लक्ष्मण पटेल जी की  स्मृति चिन्ह के लिए निवेदन करने के बाद भी लगभग 88 वर्षों बाद भी कुछ नहीं होना यहां पर शासन प्रशासन की लापरवाही या स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति उदासीनता प्रदर्शित होती है , जहां पर लांजी मैं गांधी जी की सभा हुई थी उसी स्थान पर मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग स्वराज संस्थान संचालन एवं जिला प्रशासन की तरफ से एक बोर्ड लगाया गया है जो कि फ्लेक्स बोर्ड है वह भी बहुत जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका है..


रेवांचल टाइम्स लांजी, बालाघाट से खेमराज सिंह बनाफरे...

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