रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बहुल्य जिला मंडला में नियमों ताक में रख कर काम करना कोई ये नई बात नही है इस जिले में शासन प्रशासन और नियम कायदे नाम की कोई चीज ही नही है जब जिसको मौका मिला उसने उसका पूरा फ़ायदा उठाया है चाहे वह जनप्रतिनिधि हो यह इस जिले के रहवासी बस बेचारे भोलेभाले गरीबों का ही शोषण ही होता आ रहा है ।
वही शासन चाहे जितने भी वादे कर ले पर गरीबों की मदद समय मे नही पहुँच पाती है आये दिन उनके मिलने वाली योजनाओं में जिम्मेदारो ने डाका डाला है। सरकार गरीबो लिए हमेशा खड़ी रहती है गरीबों को एक रुपए चावल एक रुपैया गेहूं गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले को और कोरोना के चलते तो फ्री में गेहूं शक्कर मिट्टी का तेल आदि तरह-तरह की चीजें राशन दुकान में पहुंचाती है ताकि गरीबों को लाभ मिल सके पर जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत घुघरी की ग्राम पंचायत बनिया में नौकरी कर रहे सेल्समैन गरीबों के लिए रोज राशन दुकान खोल सके और एक हर एक गरीबों को राशन मिल सके एवं कोई गरीब भूखा ना रह सके इस लिए समय समय मे दुकान खोलना तय किया है लेकिन बनिया ग्राम पंचायत में बैठे सोसाइटी सेल्समैन अपनी मनमानी करते हुए ग्राम पंचायत बनिया के अंतर्गत बनिया एवं उसके दो पोशक ग्राम सहित 3 गांव हैं सेल्समैन के द्वारा पहला दिन एक गांव दूसरे दिन दूसरा गांव को बुलाया जाता है तीसरे दिन तीसरे गांव को बुलाया जाता है महीने में कुल मिलाकर तीन दिन सोसाइटी राशन दुकान खोला जाता है जो अपने उचित दिन उचित समय में आ गया तो उसको राशन दे दिया जाता है अगर वह आदमी दूसरे दिन आता है तो उसको राशन नहीं दिया जाता लोगों का कहना था कि सेल्समैन बहुत अति कर रहा है हम अगर उस दिन नहीं आ पाते तो हमें सेल्समैन के द्वारा हमें अनाज नहीं दिया जाता है और दूसरे महीना आने पर पिछले महीने का राशन नहीं दिया जाता सरकार सेल्समैन को पूरे महीने का वेतन देती है तो सेल्समैन पूरे महीना ड्यूटी क्यों नहीं करता है वह महीने में 3 दिन ड्यूटी क्यों करता है वह गरीबों के राशन पर डाका क्यों डाल रहा है अधिकारी कर्मचारी को ध्यान देना चाहिए की सोसाइटी आख़िर क्यों बंद रहती है।
वही सेल्समैन का कहना था कि 11 तारीख तक हम ड्यूटी करते हैं और बाकी दिन ऑफिस में बैठते हैं आखिर ऐसा क्यों होता है और हम क्या करें जो आदेश हमे मिलता है हम उसी का पालन कर रहे है।
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