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Monday, November 15, 2021

1 करोड़ रुपये के सांड को देखने यूं ही नहीं उमड़े......जानिए इस सांड इतनी डिमांड क्यों है ?



कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित एक कृषि मेले में साढ़े तीन साल का एक सांड लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। यह सांड हल्लीकर नस्ल का है, जिसके सीमन की अत्यधिक डिमांड रहती है। चार दिनों तक चले इस मेले को हाइब्रिड तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें लोग मवेशियों के साथ शारीरिक तौर पर उपस्थिति होकर या वर्चुअल माध्यम से भी शामिल हो सकते थे। यह मेला 11 नवंबर से 14 नवंबर तक आयोजित किया गया है। हल्लीकर नस्ल के मवेशी ए2 प्रोटीन वाले दूध के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यह अब लुप्तप्राय होते जा रहे हैं।

1 करोड़ रुपये का कृष्णा बना आकर्षण का केंद्र


कृष्णा नाम के सांड की उम्र भले ही साढ़े तीन साल की हो, लेकिन इसने बेंगलुरु के कृषि मेला, 2021 में अच्छे-अच्छे सांडों के छक्के छुड़ा दिए हैं। यह वार्षिक मेला कृषि में हुए नए बदलावों, खेती से जुड़े उत्पादों और कृषि से जुड़े उद्योगों के लिए बेंगलुरु के जीकेवीके कैंपस में लगाया गया है। आमतौर पर यहां बिकने वाले सांडों की कीमत 1 से 2 लाख रुपये के बीच ही होती है, लेकिन कृष्णा इसका अपवाद है, जिसकी कीमत 1 करोड़ रुपये लगाई गई है। प्रदेश के मांड्या जिले के मालावल्ली से आए कृष्णा को देखने के लिए पूरे मेले के दौरान लोगों की भीड़ लगी रही और हर कोई उसकी एक झलक लेने के लिए लालायित नजर आया।

कृष्णा सांड की इतनी डिमांड क्यों है ?

दरअसल हल्लीकर नस्ल के मवेशी अब विलुप्त होते जा रहे हैं। हल्लीकर नस्ल के मवेशियों के दूध में ए2 प्रोटीन ज्यादा होती और इसलिए इस नस्ल के मवेशी को बहुत ही ताकतवर माना जाता है। खासकर कृष्णा की बात की जाए तो यह देखने में तो आकर्षक है ही, इसकी 6.2 फीट की ऊंचाई, 8 फीट लंबाई और 800 किलो वजन के बारे में जानकर लोग गदगद हो जाते हैं। हल्लीकर नस्ल के सांड के अलावा इस मेले में दक्षिण अफ्रीकी नस्ल के घरेलू भेड़ डॉर्पर और ब्लैकहेड पर्शियन नस्ल के भेड़ों की भी बहुत ज्यादा मांग रही है। एक डॉर्पर की कीमत 10 लाख रुपये तक होती है, क्योंकि इसमें उच्च क्वालिटी का मीट मिलता है, लेकिन फैट बहुत ही कम रहता है।

पौष्टिक दूध के लिए मशहूर है


हल्लीकर नस्ल कृष्णा के मालिक बोरेगौड़ा ने कहा है कि, 'ठीक से देखभाल करने पर कृष्णा 20 साल और जीवित रह सकता है। हम चाहते हैं कि लोग इस मौके का फायदा ज्यादा हल्लीकर नस्ल पैदा करने के लिए उठाएं। हम इसका बहुत अच्छे से ख्याल रखते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा हल्लीकर नस्ल के मवेशी पैदा हो सकें, जो कि पौष्टिक दूध देंगे।' यह कृषि मेला 11 नवंबर से 14 नवंबर तक आयोजित किया गया है।




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