रेवांचल टाइम्स - निवास विधायक डाक्टर अशोक मर्सकोले और शहपुरा विधायक भूपेंद्र मरावी ने ज्ञापन सोंपा। ज्ञापन के माध्यम राज्यपाल को स्मरण करते हुए लिखा है कि
संविधान के अनुच्छेद 244 में यह व्यवस्था है कि अनुसूचित क्षेत्रों में राज्यों की कार्यपालन शक्ति को पांचवी अनुसूचि के प्रावधानो (धारा 2) में शिथिल किया गया है,अर्थात अनुसूचित क्षेत्रों की प्रशासनिक व्यवस्था में राज्यपाल को सर्वोच्च शक्ति एवं अधिकार दिया गया है।पांचवी अनुसूचि की धारा 5(1) राज्यपाल को विधायिका की शक्ति प्रदान करता है।संविधान के किसी भी प्रावधानो से यह शक्ति मुक्त है।प्रावधान किया गया है कि आदिवासियों से किसी प्रकार के जमीन हस्तांतरण का नियंत्रण करना राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आता है।जल,जंगल और जमीन आदिवासियों की आजीविका का मुख्य साधन है।इसके खत्म होने से पलायन और भुखमरी जैसी स्थिती निर्मित होती है।
दोनों विधायको ने राज्यपाल महोदय को बताया कि नर्मदा नदी पर प्रस्तावित बसानिया और राघवपुर बांध से डिंडोरी के 61 और मंडला के 18 आदिवासी बाहुल्य गांव विस्थापित एवं प्रभावित होंगे।इससे 10942 हेक्टेयर जमीन डूब में आएगा,जिसमें 3694 परिवारों कि 5079 हेक्टेयर निजी भूमि,2118 वनभूमि तथा 3745 हेक्टेयर शासकीय भूमि शामिल है।इस प्राकृतिक संसाधनो के खत्म होने से आदिवासी समुदाय की आजीविका पर प्रतिकूल असर पङेगा।जबकि इसी घाटी में नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा लिफ्ट सिंचाई योजना से किसान के खेतों में पानी पहुंचाने की दर्जनों योजनाओ पर कार्य चल रहा है।इसलिए इस क्षेत्र में भी बांध की जगह लिफ्ट सिंचाई योजना के माध्यम से किसान के खेतों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था किया जाए।
अतः आपसे अनुरोध है कि आप अपने संवैधानिक अधिकारो का इस्तेमाल करते हुए इन दोनों बांधों पर पुनर्विचार करने हेतु राज्य सरकार को निर्देशित करने का कष्ट करें।जिससे आदिवासियों के समाजिक,सांस्कृतिक और आर्थिक स्थिति पर पङने वाले प्रतिकूल असर को रोका जा सके।



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