भुआ बिछिया की नगर परिषद में दुकान नीलामी के मामलों में उड़ रही नियमों की धज्जियां पहुँचा रहे है अपने चहेतों को लाभ... - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

 आवश्कता है  आवश्कता है ....

रेवांचल टाईम्स समाचार पत्र एव वेव पोर्टल में मध्यप्रदेश के सभी संभाग, जिला, तहसील, विकास खंडों, में संवाददाताओं की एंव विज्ञापनों व खबरों से सबंधित व्यक्ति संपर्क करें इन नम्बरों में 👉 9406771592/ 9425117297/ 8770297430/9165745947

Saturday, October 9, 2021

भुआ बिछिया की नगर परिषद में दुकान नीलामी के मामलों में उड़ रही नियमों की धज्जियां पहुँचा रहे है अपने चहेतों को लाभ...

 



रेवांचल टाईम्स - मंडला जिले की नगर पंचायत आये दिन कुछ न कुछ मामले में चर्चाओ में रहती है और रोज नए नित्य कामों से नगर सहित जिले में चर्चित रहती है अब नया एक चर्चा आम हो रही है।

             जहाँ सूत्रों की माने तो नगर परिषद भुआ बिछिया द्वारा निर्मित 48 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में नगर परिषद द्वारा मनमाने ढंग से स्वयं के नियम बनाकर दुकाने नीलाम की जा रही है। दिनांक 14 सितंबर 2021 को प्रथम दुकान नीलामी में दुकान क्र 12 से क्र 40 तक की के बंद लिफाफे खोले गए, जिसमें कि नीलामी शर्तों के अनुसार आरक्षित दुकानों के सक्षम प्रमाण पत्र बंद लिफाफे में ही प्रस्तुत करने थे, जिसमे कि कई दुकानों के आरक्षण प्रमाण पत्र नही पाए गए, उक्त संबंध में वार्ड नं14 के पार्षद विवेक कुमार पाण्डेय द्वारा नीलामी प्रक्रिया के दौरान तुरंत प्रमाण पत्रों के विषय मे आपत्ति की गई कि उक्त सभी आरक्षित दुकानों में से जिनके आरक्षण प्रमाण पत्र लिफाफे में प्रस्तुत नही किये गए हैं, उनके फॉर्म तत्काल निरस्त किये जायें, किन्तु cmo द्वारा उक्त आपत्ति पर विचार नही किया गया। इसके अलावा फॉर्म देते समय नीलामी कर्ताओ से दुकान के क्र की जानकारी लेना भी नियम विरुद्ध है जबकि नीलामी शर्तों में लिफाफे जमा करते समय दुकान क्र का उल्लेख करना आवश्यक था, न कि फॉर्म लेते समय।

नगर परिषद cmo की इन गंभीर लापरवाही के कारण ऐसा ही एक मामला क्र 37 की दिव्यांग जन कोटे की दुकान का फंस गया है, जिसमे अनीश खान द्वारा फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र लगाकर दुकान की उच्चतम बोली लगाई गई, जिसमे विवेक कुमार पाण्डेय जो कि क्र 37 की दुकान के द्वितीय उच्चतम बोलिदार रहे और उनके द्वारा जिला मेडिकल बोर्ड का विकलांग प्रमाण पत्र भी लिफाफे में प्रस्तुत किया गया, उनके द्वारा क्र 37 की दुकान में अनीश खान द्वारा लगाए फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के विषय मे दिनांक 17 सितम्बर 2021 को लिखित आपत्ति दर्ज की गई, जिसका कोई भी जवाब cmo द्वारा नही दिया गया, जो संदेह के घेरे में हैं।

आरक्षित दुकानों संबंधी कोई भी सक्षम प्रमाण पत्र दिनांक 13 सितम्बर 2021 की दशा में जारी होना नियम संगत है, किन्तु अनीश खान द्वारा दिनांक 01 अक्टूबर2021 को नगर परिषद कार्यलय में जिला मेडिकल बोर्ड का विकलांग प्रमाण पत्र, जो कि दिनांक 14 सितम्बर 2021 की स्थिति में जारी किया गया है जमा किया गया, जबकि उक्त प्रमाण पत्र 13 सितम्बर2021 की स्थिति में जारी होने पर ही स्वीकार्य होता। इस प्रकार अनीश खान का फॉर्म निरस्त कर द्वितीय उच्चतम बोलिदार विवेक कुमार पाण्डेय को उक्त दुकान नियमतः आवंटित होना था, पर cmo द्वारा तत्सम्बन्ध में भी कोई कार्यवाही नही की गई। क्र 37 की दुकान में आपत्ति के बावजूद  अनीश खान द्वारा 14 दिनों बाद  जिला अस्पताल का प्रमाण पत्र जमा किया गया जो कि संदेह के घेरे में है एवं उक्त प्रमाण पत्र पिछली तारीख में जारी करने वाले जिला अस्पताल के समस्त डॉक्टर भी घेरे में है।

        इस प्रकार से नगर परिषद मुख्य नगर पालिका अधिकारी से लेकर जिला अस्पताल के डॉक्टर भी तत्सम्बन्ध में जांच के दायरे में हैं और नगर परिषद cmo का अब तक इस मामले में चुप्पी साधे रहना एक बड़ी जांच का प्रश्न बन रहा है। नगर परिषद की दुकान नीलामी प्रक्रिया में चर्चा ये भी है कि आरक्षित आदिवासी कोटे की दुकाने भी बड़े बड़े नेताओं द्वारा अपने संबंधियों और दूसरे लोगो के नाम पर ली गई हैं। वैसे भी कुछ दुकानों के मामले अब तक न्यायालय पहुँच गए है एवं आगे भी और प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत होने की संभावना बनी हुई है, क्योकि नगर परिषद प्रशासन में बैठे जिम्मदारों ने अपने निजी स्वार्थ के चलते और अपने करीबी को फ़ायदा पहुँचा रहे है। और इनके सामने सभी नियम कानून सब शिथिल नजर आ रहे है वही उक्त मामले में नियमविरुद्ध तरीके से कार्य करने के कारण नगर परिषद से तत्सम्बन्ध में न्याय मिलना असंभव प्रतीत होता है।

No comments:

Post a Comment