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Monday, September 27, 2021

पत्नी बनी प्रेमिका को पहले चलती कार से दिया धक्का,फिर कार बैक कर चढ़ाई और जैक - रॉड से मारकर खाई में फेंका...

 


रेवांचल टाईम्स - पत्रकारवार्ता में प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने खोले पाँच वर्ष पूर्व की गई हत्या के राज 

       सोमवार के दिन प्रभारी पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने पत्रकारवार्ता आयोजित कर लगभग 5 वर्ष पूर्व की गई हत्या का खुलासा करते हुऐ बताया कि 15  दिसंबर 2016 को बरगी राजेन्द्रग्राम निवासी हर प्रसाद मरावी पिता दुर्योधन मरावी उम्र 64 वर्ष ने लिखित शिकायत पेश कर रिपोर्ट की थी कि उसकी पुत्री उम्र 30 वर्ष 7 से 8 माह पूर्व राजेन्द्रग्राम निवासी प्रवीण गुप्ता के साँथ पत्नी के रूप में डिंडौरी के हँसनगर में किराये का भवन ले 5 वर्षीय पुत्र उज्जवल के साँथ रहती थी।और हरप्रसाद को अखबार पढ़ ज्ञात हुआ कि पुत्र उज्जवल बाल कल्याण समिति बिलासपुर में मिला था। जिस पर थाना कोतवाली में गुम इंसान क्रमाक 85/2016 कायम कर जाँच में लेते हुये पतासाजी की गई तो जांच के दौरान साक्षियों के कथन से यह बात सामने आई कि महिला 14 अप्रैल 2016 को पुत्र उज्जवल को लेकर पति प्रवीण से मिलने कहकर निकली थी,जो वापस नही लौटी।


पुत्र ने खोला राज -- महिला के पुत्र उज्जवल ने बताया कि उसके पिता गाड़ासरई में सफेद कार लेकर आये थे,जिसमे वह अपनी माँ के साँथ बैठ गया था। और गुजरते वक़्त जंगल मे माँ को मारकर फेंक दिया था।जिसे संज्ञान में लेते हुये थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 799/2021 धारा 302,317,201,120 ताहि3(2)(5) एस सी एस टी एक्ट का कायम कर विवेचना में लिया गया था।



प्रवीण ने कुबूला जुर्म -- पुलिस पूछताछ में आरोपी प्रवीण ने बताया कि वह महिला को वर्ष 2009 से जानता था,और इसी दरमियाँ प्यार हुआ और पत्नी बनाकर डिंडौरी के हँसनगर में किराए से रहने लगा था,इसी बीच 2011 मे पुत्र उज्जवल ने जन्म लिया।इसके बाद समाज मे शादी तय होने के बाद प्रेमिका पत्नी से लड़ाई -झगड़ा होने लगा।बार - बार समझाइश के बावजूद जब वह नही मानी 22 अप्रैल 2016 को शादी तय होने उपराँत 13 या 14 अप्रैल 2016 को एक बार पुनः समझाइश देने गाड़ासरई मिलने को बुलाया था।जहाँ से वह प्रेमिका पत्नी और पुत्र उज्जवल को समझाने की बात कह अमरकंटक लेकर गया,लेकिन बात नही बनी तो उसे रास्ते से हटाने का सोच शहडोल से घुनघुटी के बीच सुनसान रास्ते पर सिद्ध बाबा घाट के पास चलती कार से पत्नी को नीचे गिराया फिर कार बैक कर उसके ऊपर चढ़ा दी थी।इसके बाद भी मन नही भरा तो गाड़ी से उतर कर जैक -रॉड से तब तक मारा जब तक उसने दम नही तोड़ा और इसके बाद उसे खाई में फेंक दिया था।एवं पुत्र उज्जवल को अमलाई रेलवे स्टेशन से ट्रैन में बैठकर अनूपपुर तक गया व चिप्स लेकर आने का बहाना कर कार में बैठकर घर वापस आ गया था।


एस आई टी टीम को मिली सफलता -- बता दें कि मामले गुमशुदा की तलाश ,पतासाजी एवं आरोपी की गिरफ्तारी हेतु प्रभारी पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन व एस डी ओ पी रवि प्रकाश कोल के मार्गदर्शन में एस आई टी टीम का गठन किया गया था।जिसमे निरीक्षक सी के सिरामे ,निरीक्षक धीरज राज,उपनिरीक्षक अनुराग जामदार, सउनि मुकेश बैरागी,प्रधान आरक्षक प्रवीण खम्परिया,कार्य प्रधान आरक्षक रूप सिंह,अभिमन्यु वर्मा व आरक्षक सुनील गुर्जर की टीम बनाई गई थी।इसके अलावा मामले का पटाक्षेप करने में दर्शन, महादेव, अंकित मिश्रा,कृष्णपाल,कृष्ण कुमार, आरक्षक नीतीश दुबे, राघवेंद्र की सरहानीय भूमिका रही।

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