रेवांचल टाइम्स :- वर्ष 2013-14 में नैरोगेज ट्रेन बंद होने के बाद से नैनपुर में रेलवे विभाग की उदासीनता और बढ़ती जा रही है। चोरी-छिपे यहां की सुविधाओं को छीनने का प्रयास किया जा रहा है। जिसका ताजा उदाहरण है, नगर में संचालित रेलवे का अपर मंडल कार्यालय अब इसे नैनपुर में बंद कर दिया गया है। इस ऑफिस को कब और कैसे बंद कर दिया गया इसका उत्तर नैनपुर में देने वाला कोई नहीं है। रेलवे विभाग का इतना बड़ा अमला नैनपुर में है इसके बाद भी अधिकारियों को नहीं पता कि ए.डी.आर.एम. ऑफिस कहां गया।
लोगों का कहना है कि, ऑफिस चोरी हो गया है। जिसकी रिपोर्ट जीआरपी एवं आरपीएफ पुलिस थाना में दर्ज कराई जाना चाहिए। इस संबंध में जब अपर मंडल ऑफिस की जवाबदारी संभाल रहे श्री राव से पूछा गया तो वह कुछ बता पाने में अपनी असमर्थता व्यक्त कर रहे हैं। कार्यालय बंद होने की जानकारी अब तक सामने नहीं आ सकी है। जिससे लोगों का कहना है कि, चोरी-छिपे रेलवे द्वारा यहां की सुविधाओं को कम किया जा रहा है। ज़रूरत यहां सुविधा बढ़ाने की है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
"ऑफिस ना होने से बढ़ रही परेशानियां"
नैनपुर में अपर मंडल ऑफिस ना होने से रेल प्रशासन की अनेक गतिविधियां एवं प्रशासनिक कार्य अवरुद्ध होते जा रहे हैं।
वहीं आम जनता को रेल प्रशासन से मिलने वाली सुविधा से भी वंचित होना पड़ रहा है।
रेल विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत नैनपुर में अपर मंडल कार्यालय का होना अनिवार्य है। लेकिन अब इसकी नदारदगी अधिकारियों की कार्यगुजारी उजागर कर रही है। नगर में करीब 700 एकड़ भूमि रेलवे की है।
जिसका उपयोग क्षेत्र में रेल विकास के कार्य के लिए किया जा सकता है, और इन सब कार्यों के सुपरविजन के लिए नैनपुर में अपर मंडल रेल कार्यालय की महती आवश्यकता है।
"बड़ी रेल दुर्घटना के बाद 1984 में खोला गया था"
17 अगस्त 1984-85 में सबसे बड़ी रेल दुर्घटना बालाघाट से नैनपुर के बीच चरेगांव समनापुर में हुई थी।
दुर्घटना में हजारों लोग प्रभावित हो गए थे, सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। घटना होने के बाद तत्काल मंडल कार्यालय खोले जाने के आदेश रेल मंत्री अब्दुल गनी खान चौधरी ने जारी किए थे। इसके बाद नैनपुर में अपर मंडल कार्यालय खोला गया था प्रत्येक सप्ताह में शुक्रवार के दिन नैनपुर आकर एडीआरएम नागपुर,
नैनपुर में आकर रेल विभाग की सुरक्षा का जायजा लिया करते थे। साथ ही आम जनता को रेल प्रशासन से मिलने वाली सुविधा के संबंध में रूबरू हुआ करते थे। लेकिन 8 वर्ष बीत जाने के बाद आज तक नहीं पता कि
एडीआरएम ऑफिस आखिर गया तो गया कहां और किस के आदेशों से अन्यत्र स्थानांतरित हो गया।

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