रेवांचल टाइम्स - नगर में घूमती आवारा गाय ने पुराने अस्पताल के पीछे बछड़े को जन्म दिया जन्म देने के बाद तक भी पशु मालिक का का कोई अता पता नहीं रहा लेकिन खबर मिलते ही मालिक अपना मालिकाना हक जमाकर गाय और बछड़े को घर ले गया,
1-- नगर में बढ़ रही आवारा पशुओं की संख्या नहीं हो रही सख्त कार्रवाई
नगर में लगातार आवारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है जो घटना को अंजाम देती नजर आ रही है जिस पर शासन प्रशासन भी ध्यान नहीं देता लेकिन शासन प्रशासन वह भी क्या करें मजबूर है क्योंकि पशु मालिक अपने पालतू पशु को आवारा जानवर बनाने पर तुले हुए है , ऐसा लगता है कि इन निर्धन मालिकों के पास पशु को पालने तक के पैसे नहीं है तभी तो इनको सड़क पर बाजारों में आवारा मरने के लिए ओर सब्जी विक्रेताओं के लठ्ठ खाने के लिए छोड़ दिया जाता है कभी यह पशु खुद चोटिल होते हैं और कभी दूसरे को चोटिल कर जाते हैं कभी-कभी बाजारों में आवारा पशुओं की भयावह लड़ाई भी देखि जाती है जो कई लोगों को चोटिल करते नजर आते हैं पशु अभी तक कई लोगों को काल के ग्रास में ले जा चुके हैं वही हिंदू धर्म में गाय को माता माना जाता है जिसमें 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है लेकिन नैनपुर में गाय मालिक ऐसे हैं जो अपने पशुओं को सुबह बाजार में आवारा छोड़ देते हैं और बाकायदा शाम होते ही रस्सी से बांधकर अपने घर ले जाते नजर आते है यह कोई निर्धन व्यक्ति नहीं अपने आप में सक्षम व्यक्ति है लेकिन आदत से मजबूर है और शाम को गाय को घर ले जाने का मतलब यह है कि मालिक दिन भर बाजार में अपने पशु को बाजारों में छोड़ने के बाद ओर गाय का पेट भरने के बाद शाम को उन पशुओं को घर ले जाने के बाद उनके दूध निकाल कर बेचने का कार्य करते हैं जिससे उन्हें मोटी रकम मिलती है जिसे देखकर यही लगता है कि इन पशु मालिकों को केवल पशुओं को उपयोग करना ही बनता है पालना नहीं ,शाम होते ही आवारा पशु सड़कों पर नजर आने लगते हैं थावर नदी से लेकर निवारी तक आवारा पशु सड़कों पर ही नजर आते हैं खासकर बारिश के मौसम में सूखी जगह न मिलने पर, अनेकों बार शासन प्रशासन द्वारा कार्यवाही भी की गई लेकिन कांजी हाउस में बंद करने के बाद यह पशु मालिक -100 - 200 रुपयों का जुर्माना भरकर उसे तुरंत छुड़ाने और अपना मालिकाना हक जताने आ जाते हैं और छुड़ाने के बाद फिर एक बार उन पशुओं को कुछ दिन घर पर रखने के बाद आवारा जानवर बनने के लिए सड़कों पर बाजारों में छोड़ दिया जाता है वहीं सड़क पर बैठे आवारा पशुओं के कारण अनेकों घटनाएं हो चुकी है क्योकि है जानवर दिन तो नजर आ जाते है पर रात्रि में इनको देख पाना मुश्किल हो जाता है जिस वजह से अनेको वाहन सवार गंभीर रूप से चोटिल भी हो चुके हैं और कुछ तो अपनी जान भी गंवा चुके हैं वही दुर्घटनाओ से अनेको बार जानवर भी घायल हुए या मर चुके है
2-- आवारा पशुओं से सबसे ज्यादा सब्जी विक्रेता है परेशान
बाजारों में घूम रहे आवारा पशु से सबसे ज्यादा सब्जी विक्रेता परेशान करते है इन सब्जी विक्रेताओं के द्वारा सब्जी की दुकान रोड के अगल-बगल ज्यादातर लगाई जाती बड़े व्यापारी अपनी दुकान अपने शैडो में लगाते हैं लेकिन छोटे दुकान नीचे दुकान लगाने पर मजबूर वहीं आवारा पशुओं की वजह से दुकानदारों को बहुत ही नुकसान होता है क्योंकि आवारा पशु अचानक आकर इनकी सब्जियों को खा जाते है बार-बार भगाने पर भी यह पशु लौटकर फिर से परेशान करने आ जाते हैं जिससे इन्हें अच्छा खासा रोजाना नुकसान होता है पर क्या करे मजबूर है
3 -- आमजनों की मांग हो सख्त कार्यवाही
वही आम जनों ने शासन प्रशासन से मांग की है अब आवारा जानवरो पर नही ऐसे पशु मालिक पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो अपने पशुओं को पशु न समझ कर आवारा जानवर समझते है साथ ही जानवरो को पकड़े के पशु मालिको से 4 गुना ज्यादा जुर्माना ओर 3 बार जुर्माना होने के बाद अगर फिर से जानवर पकड़ाता है नीलामी की कार्यवाही करनी चाहिए जिससे पशु मालिको को भी यह समझ मे आये की ये हमारे पाले हुए पशु पालतू है ना कि आवारा
नैनपुर से राजा विश्वकर्मा की रिपोर्ट

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